पुलवामा के 22 साल के मोहम्मद ओवैस ने पास की CDS परीक्षा! AI के 399 रुपये के पेड सब्सक्रिप्शन से यूं की तैयारी

जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के एक छोटे से गांव डेंजरपोरा से निकले 22 साल के मोहम्मद ओवैस भट ने वह मुकाम हासिल किया है जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। सोमवार को जारी हुई (Combined Defence Services Examination 2026) की फाइनल लिस्ट में ओवैस ने ऑल इंडिया 107वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे कश्मीर का नाम रोशन किया है। यह सफलता उनके साढ़े चार साल के अथक संघर्ष, दो असफलताओं और तीसरे प्रयास में मिली जीत की कहानी है।

PTI के अनुसार ओवैस की इस कामयाबी के पीछे दो नाम हैं – एक उनके आदर्श ब्रिगेडियर एस.एस. शेखावत (Brigadier S.S. Shekhawat) और दूसरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) । सेना के जांबाज अधिकारी शेखावत की वीरता से प्रेरित होकर वर्दी का सपना देखने वाले ओवैस ने अपनी पढ़ाई में AI को ही अपना सबसे बड़ा साथी बनाया। महंगे कोचिंग सेंटर्स के बजाय 399 रुपये के AI सब्सक्रिप्शन और यूट्यूब लेक्चर्स से तैयारी कर उन्होंने साबित कर दिया कि जुनून हो तो संसाधनों की कमी आड़े नहीं आती।

महज 399 रुपये के कोर्स से की तैयारी, रैंक हासिल कर किया कमाल

ओवैस की तैयारी का सबसे दिलचस्प पहलू रहा AI का इस्तेमाल। उन्होंने बताया कि उन्होंने महंगे कोचिंग सेंटर्स पर लाखों रुपये खर्च करने के बजाय सिर्फ 4000 रुपये में तैयारी की।

“मैंने 399 रुपये का AI पेड सब्सक्रिप्शन लिया, उसमें अपना पूरा सिलेबस डाला और उससे मौजूदा ट्रेंड्स का अनुमान लगाने को कहा। इससे मुझे पैटर्न समझने में आसानी हुई। AI की मदद से प्रश्नों के फॉर्मेट का विश्लेषण करके मैं पहले से ही लगभग 20 से 40 सवालों का अंदाजा लगा सका।” उनका मानना है कि ChatGPT और दूसरे AI बॉट्स और यूट्यूब लेक्चर्स आज के दौर में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए सबसे बड़े हथियार हैं।

पुलवामा से भारतीय सेना तक का सफर

22 साल के मोहम्मद ओवैस भट ने पुलवामा के डेंजरपोरा से निकलकर देशभर के युवाओं के लिए एक नई मिसाल पेश की है। सोमवार को घोषित हुई कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा की अंतिम मेरिट लिस्ट में उन्होंने 107वां स्थान प्राप्त किया है।

ओवैस ने बताया कि भारतीय सेना के वीर अधिकारी ब्रिगेडियर एस.एस. शेखावत को वह अपना रोल मॉडल मानते हैं, जिनके शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें फौज में जाने के लिए प्रेरित किया।

साढ़े चार साल का संघर्ष और दो असफलताएं

यह सफलता रातों-रात नहीं मिली। ओवैस ने बताया कि यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले दो बार उन्हें असफलता हाथ लगी थी। PTI से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह मेरा तीसरा प्रयास था, इसलिए मुझे बहुत संतुष्टि मिल रही है। मुझे वह समय याद आ रहा है जब मैं सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा था। तब मैंने सपना देखा था कि एक दिन मुझे ऑल इंडिया रैंक मिलेगी। ईश्वर की कृपा से मैंने AIR 107 हासिल की है।”

संघर्ष कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बने

ओवैस ने तैयारी कर रहे युवाओं को सलाह दी कि बिना कोर्स कंटेंट समझे तैयारी शुरू न करें। “सिलेबस को अच्छी तरह समझ लें। बिना सिलेबस के तैयारी अथाह समुद्र जैसी लगती है। अगर आप टारगेट अप्रोच अपनाएंगे तो इस विशाल समुद्र को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट सकते हैं। महंगे कोचिंग सेंटरों पर 2 से 2.5 लाख रुपये खर्च करने से बचें।” जब उनसे पूछा गया कि कश्मीर से कम युवा CDS की तरफ क्यों जाते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसकी वजह जागरूकता की कमी और सशस्त्र बलों के बारे में सही जानकारी न होना है।

अब ओवैस जनवरी में डेढ़ साल की ट्रेनिंग के लिए भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शामिल होंगे, जिसके बाद उन्हें सेना में कमीशन मिलेगा।