
सोनिया गांधी पर लिखी गई किताब Belonging: A Journey of Love 10 नवंबर को लॉन्च होगी। इसके पहले कांग्रेस नेता सोनिया ने X पर अपना पहला पोस्ट कर राजीव गांधी के साथ अपनी प्रेम कहानी के दिनों को याद किया और बताया कि कैसे राजीव के साथ एक रेस्टोरेंट में उनकी मुलाकात हुई थी, और कैसे यह प्यार परवान चढ़ा।
बता दें कि सोनिया की निजी और राजनीतिक जिंदगी पर आधारित उनकी किताब Belonging: A Journey of Love 10 नवंबर को रिलीज होगी। हालांकि प्रकाशन से पहले ही इस किताब को लेकर काफी विवाद हो चुका है।
कैसे हुई राजीव से मुलाकात : सोनिया गांधी ने एक वीडियो साझा कर बताया कि वह इंग्लैंड में अपनी पसंद का खाना मिलने वाली जगह तलाश रही थीं। इसके बाद उन्हें कैम्ब्रिज में एक ग्रीक रेस्तरां मिला, जहां पहली बार एक दोस्त ने दोनों का परिचय कराया था। उन्होंने कहा कि यहीं से प्यार की शुरुआत हुई, हमने साथ मिलकर यादों की एक दुनिया बनाई। उन्होंने बताया कि मिलते ही मुझे लगा कि मैं उनके साथ रहूंगी।

बता दें कि सोनिया गांधी ने शनिवार को ही अपना X अकाउंट बनाया और पहले पोस्ट में अपनी आगामी पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ का एक वीडियो साझा किया। बता दें कि यह किताब 10 नवंबर को लॉन्च होगी। सोनिया गांधी ने कहा- जब मैं उनसे पहली बार मिली, तो मुझे लगभग तुरंत लगा कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ मैं रहना चाहूंगी। बाद में मुझे पता चला कि वह भी ऐसा ही महसूस करते थे। इसके बाद हम दोनों दोस्त बन गए। हम पार्टियों, घूमने और छात्रों की बैठकों में साथ समय बिताते थे। उन्होंने कहा, वह बहुत सौम्य दिखने वाले व्यक्ति थे। बेशक, वह बहुत अच्छे दिखते थे। लेकिन उनका सौम्य स्वभाव साफ नजर आता था।
परिवार में हुई हत्याओं का जिक्र : किताब में सोनिया ने इटली में बिताए बचपन से लेकर कैंब्रिज में राजीव गांधी से मुलाकात तक का जिक्र किया है। इसमें नेहरू-गांधी परिवार में शादी और परिवार में हुई हत्याओं के बाद बदली जिंदगी के बारे में लिखा है।

बचपन से लेकर कैम्ब्रिज जाने तक का सफर : ‘Belonging’ की शुरुआत युद्ध के बाद इटली के वेनेटो क्षेत्र में सोनिया के बचपन से होती है। इसके बाद किताब में उनके कैम्ब्रिज जाने और 1965 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पोते राजीव गांधी से मुलाकात का जिक्र है। आत्मकथा में राजीव गांधी से उनकी शादी और अपनी सास, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात का भी वर्णन है। इसमें भारत में जीवन के साथ तालमेल बैठाने के उनके अनुभव शामिल हैं। इनमें हिंदी सीखना, साड़ी पहनना और भारतीय खानपान व संस्कृति को अपनाना भी शामिल है। किताब में गांधी परिवार को बदलकर रख देने वाली बड़ी त्रासदियों का भी जिक्र है। इनमें विमान हादसे में संजय गांधी की मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं।
आत्मकथा में 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम का भी वर्णन है। उस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत हुई थी। इसके बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया और पार्टी व गठबंधन का नेतृत्व किया। कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन अगले 10 साल तक देश की सत्ता में रहा।
किताब के इन हिस्सों पर हुई थी कंट्रोवर्सी : एनडीटीवी की एक रिपोर्ट बताती है कि पब्लिशर और सोनिया गांधी के बीच मुख्य रूप से तीन विषयों को लेकर सहमित नहीं बन पाई थी। सोनिया गांधी की किताब में भारतीय क्षेत्र में चीन की कथित घुसपैठ और सीमा के मौजूदा हालात का प्रमुखता से जिक्र किया गया था। किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली, नेतृत्व और केंद्र सरकार की कई अहम नीतियों पर सोनिया गांधी के सवाल शामिल हैं। वहीं किताब में राष्ट्रीय मामलों और भारत के सामाजिक ताने-बाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असर को लेकर सोनिया गांधी के निजी विचार लिखे गए हैं। जब पब्लिशर ने इन हिस्सों में बदलाव का सुझाव दिया, तो सोनिया गांधी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि यह उनके अपने अनुभव और नजरिए हैं, जिनमें कोई समझौता नहीं हो सकता।
आखिर क्या है किताब में : ये किताब सोनिया गांधी की आत्मकथा है। इसमें सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन से लेकर भारत में उनके जीवन तक को दर्ज किया गया है। राजीव गांधी से विवाह, देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी की बहू बनना, इन सबका उल्लेख इस आत्मकथा में किया गया है। सोनिया ने कहा कि राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के बाद जब उन्होंने अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि ”उनके जीवन के हर पड़ाव को जोड़ने वाली कड़ी प्रेम और निष्ठा रही है।” उन्होंने अपनी इस यात्रा को ”इटली के छोटे शहर में अपने बचपन की सरलता से लेकर भारत में बिताए वर्षों की जटिलता” तक की यात्रा बताया।


