Houthi : हूती विद्रोही कौन हैं? सऊदी अरब और हूतियों में दुश्मनी क्यों ? क्या है उनका असली मकसद, ईरान किसलिए करता है मदद

Houthi : हूती विद्रोही कौन हैं? सऊदी अरब और हूतियों में दुश्मनी क्यों ? क्या है उनका असली मकसद, ईरान किसलिए करता है मदद

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच पिछले 3 महीने से जंग चल रही है। हूती विद्रोहियों ने सऊदी के कई तेल ठिकानों और एयरपोर्ट्स पर हमले किए हैं। अब इसे खत्म करने के लिए सऊदी ने हूती विद्रोहियों को पैसे देने की पेशकश की है। इजराइली अखबार हायोम के मुताबिक सऊदी हूती विद्रोहियों को 1 अरब डॉलर (95 अरब रुपए) देने को राजी हो गया है।

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यमन में सक्रिय हूती विद्रोही पश्चिम एशिया के सबसे अहम सशस्त्र और राजनीतिक संगठनों में से एक हैं। उनका संघर्ष केवल यमन की सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान का प्रभाव, लाल सागर में जहाजों की आवाजाही और वैश्विक तेल व्यापार जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं।

हूती विद्रोही कौन हैं?

हूती आंदोलन को अंसार अल्लाह (Ansar Allah) के नाम से भी जाना जाता है। सकी स्थापना 1990 के दशक में यमन में हुई थी, और जून 2004 में धर्मगुरु हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती के नेतृत्व में यमन सरकार के खिलाफ इसने सशस्त्र विद्रोह शुरू किया था। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में यमन के उत्तरी हिस्से में हुई थी। इस आंदोलन का आधार जायदी शिया समुदाय है, जो यमन की आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शुरुआत में यह आंदोलन धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय था। बाद में इसने सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया और यमन की केंद्रीय सरकार के खिलाफ अपनी ताकत बढ़ाई। 2014 में हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद यमन में राजनीतिक संकट और गृहयुद्ध और गहरा गया। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।

सऊदी अरब और हूतियों की दुश्मनी क्यों है?

सऊदी अरब और यमन पड़ोसी देश हैं। दोनों के बीच लंबी सीमा है, इसलिए यमन में किसी शत्रुतापूर्ण सशस्त्र संगठन का मजबूत होना सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। 2014 में हूतियों ने सना पर कब्जा किया और यमन की तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया।

मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया। इसके बाद संघर्ष में मिसाइल हमले, हवाई हमले और सीमा पार सैन्य कार्रवाई शामिल होती गई।  2022 में युद्धविराम के बाद संघर्ष की तीव्रता कुछ समय तक कम रही, लेकिन 2026 में लड़ाई फिर तेज होने की खबरें सामने आईं। हूतियों की हालिया बढ़त ने लाल सागर के तटीय इलाकों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

 

आज हूती यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं और उनके पास मिसाइल, ड्रोन तथा अन्य सैन्य क्षमताएं हैं।

 

हूती विद्रोहियों का लक्ष्य क्या है?

हूतियों के लक्ष्य को समझने के लिए तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।

 

यमन की सत्ता पर पकड़ मजबूत करना

हूती केवल विद्रोही लड़ाके नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक-सैन्य आंदोलन भी हैं। उनका प्रमुख लक्ष्य यमन में अपनी सत्ता और राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखना तथा बढ़ाना है। वे राजधानी सना सहित देश के बड़े आबादी वाले हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। 

विदेशी हस्तक्षेप और विरोधियों का मुकाबला

हूती सऊदी अरब और अमेरिका के क्षेत्रीय प्रभाव का विरोध करते हैं। वे यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के विरोध में भी लड़ते रहे हैं। उनकी विचारधारा में अमेरिका और इजराइल-विरोध प्रमुख है। हालांकि, आंदोलन के राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य उद्देश्यों को एक ही वजह से नहीं समझा जा सकता। 

क्षेत्रीय ताकत और रणनीतिक दबाव बढ़ाना

लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य दबाव बनाकर हूती अपने विरोधियों के व्यापार और सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकते हैं। जहाजों और तेल ढांचे पर हमलों की धमकी उन्हें क्षेत्रीय बातचीत में एक महत्वपूर्ण पक्ष बनाती है। सऊदी अरब और यमन पड़ोसी देश हैं। दोनों के बीच लंबी सीमा है, इसलिए यमन में किसी शत्रुतापूर्ण सशस्त्र संगठन का मजबूत होना सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

ईरान हूतियों की मदद क्यों करता है?

ईरान और हूती आंदोलन के बीच राजनीतिक तथा सैन्य संबंध हैं। ईरान को सऊदी अरब का क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। ऐसे में हूतियों को समर्थन देने से ईरान को अरब प्रायद्वीप और लाल सागर के आसपास प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिलता है। ईरान ने हूतियों को सैन्य सहायता और तकनीकी समर्थन दिया है। हालांकि, हूती आंदोलन की अपनी स्थानीय जड़ें, राजनीतिक हित और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता भी है। उसे केवल ईरान का संगठन कहना पूरे संघर्ष की जटिलता को नहीं दर्शाता।  ईरान की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह सऊदी अरब और हूतियों के बीच संवाद के लिए एक संभावित मध्यस्थ बन सकता है। लेकिन मध्यस्थता की कोशिश और किसी समझौते का वास्तव में लागू होना दो अलग बातें हैं।

सऊदी अरब हूतियों को 1 अरब डॉलर क्यों देना चाहता है?

इजराइली अखबार Israel Hayom की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के साथ संघर्ष रोकने के लिए 1 अरब डॉलर यानी करीब 95 अरब रुपये के वित्तीय समझौते पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में खाड़ी क्षेत्र के अज्ञात राजनयिक सूत्रों का हवाला दिया गया है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित वित्तीय सहायता का संबंध पहले हुई समझ के तहत हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और नागरिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण से भी हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, रियाद चाहता है कि हूती कब्जाए गए क्षेत्रों को लेकर समझौता करें और हमले रोकें। 

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। यह एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापार करने वाले जहाजों के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हूतियों की तटीय इलाकों में बढ़त और जहाजों पर हमले की क्षमता के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और तेल परिवहन पर खतरा बढ़ सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में हूतियों की क्षेत्रीय बढ़त ने सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए भी चिंता पैदा की। 

 
यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे माल ढुलाई, बीमा और ईंधन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। बाब अल-मंदेब और होर्मुज जलडमरूमध्य अलग-अलग समुद्री मार्ग हैं। दोनों में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन इनके भौगोलिक स्थान और व्यापारिक भूमिकाएं अलग हैं।

 क्या हूती सिर्फ यमन की सत्ता चाहते हैं या पूरे क्षेत्र पर प्रभाव?

हूतियों का मूल संघर्ष यमन की सत्ता, राजनीतिक व्यवस्था और अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों को लेकर है। लेकिन समय के साथ उनकी सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय गठजोड़ ने उन्हें यमन की सीमाओं से बाहर भी प्रभावशाली बना दिया है।

 – यमन के भीतर अपने शासन और क्षेत्रीय नियंत्रण को बनाए रखना।

– सऊदी अरब, अमेरिका और इजराइल जैसे विरोधियों पर सैन्य तथा राजनीतिक दबाव बनाना।

– लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों पर अपनी सैन्य स्थिति का इस्तेमाल करके क्षेत्रीय बातचीत में प्रभाव बढ़ाना। हूती फिलहाल पूरे अरब क्षेत्र पर शासन करने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। उनका मुख्य सत्ता-केंद्र यमन है, लेकिन उनकी कार्रवाई के प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।