Gold-Silver Outlook: पिछले हफ्ते तेज गिरावट से रिकवर करते हुए इंटरनेशनल मार्केट में आज सोमवार 26 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की रिकवरी आई। निवेशकों की नजर 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेड की बैठक, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हैं।
अमेरिका के अहम कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर आज 26 अक्टूबर को गोल्ड फ्यूचर्स प्रति औंस $1.60 यानी 0.04% बढ़कर $4,009.50 और सिल्वर फ्यूचर्स $0.201 यानी 0.37% उछलकर प्रति औंस $54.150 पर पहुंच गया।
पिछले हफ्ते कोमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स $173.20 यानी 4.14% गिरकर प्रति औंस $4,007.90 और सिल्वर फ्यूचर्स $3.35 यानी करीब 6% फिसलकर प्रति औंस $53.95 पर आ गया। घरेलू मार्केट में कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स प्रति 10 ग्राम ₹5,768 यानी करीब 4% गिरकर ₹1.42 लाख तो सिल्वर फ्यूचर्स ₹15,087 यानी 7.14% फिसलकर प्रति किग्रा ₹1.96 लाख पर आ गया। आज इनमें हल्की बढ़त आई।
सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव क्यों?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व पॉलिसी आउटलुक
27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक सोने और चांदी के लिए काफी अहम है। फेड के नीतिगत बयान से महंगाई, ब्याज दरों और मौद्रिक नीति में ढील दिए जाने की संभावनाओं के बारे में संकेत मिलेंगे। अगर संकेत मिलता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है क्योंकि इस पर ब्याज नहीं मिलता है तो महंगी ब्याज दरों के दौर में इसका क्रेज कम हो जाता है। वहीं फेड के नरम रुख से इसे सपोर्ट मिल सकता है लेकिन तेजी कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार फेड के संकेतों को किस तरह समझता है।
हाई बॉन्ड यील्ड्स और मजबूत डॉलर
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की ऊंची यील्ड और डॉलर की मजबूती से भी सोने-चांदी को झटका लगा। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से गोल्ड होल्डिंग की लागत बढ़ जाती है। वहीं डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी वालों के लिए सोना और चांदी डॉलर में खरीदना महंगा हो जाता है।
कच्चे तेल में उबाल और महंगाई से जुड़ी आशंका
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के फिर प्रति बैरल $117 के पार जाने से आशंका बनी की महंगाई लंबे समय तक बढ़ सकती हैं। ऐसा होने पर केंद्रीय बैंक लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति अपना सकते हैं या ब्याज दरों में और बढ़ोतरी पर विचार कर सकते हैं। इससे गोल्ड जैसी ब्याज नहीं देने वाले एसेट्स पर दबाव बढ़ सकता है।
चांदी को इंडस्ट्रियल डिमांड में सुस्ती से झटका
बिकवाली की हालिया आंधी में चांदी को सोने के मुकाबले अधिक नुकसान हुआ है, क्योंकि इस पर इंडस्ट्रियल डिमांड का भी असर पड़ता है। चांदी का इस्तेमाल सिर्फ निवेश और ज्वैलरी में ही नहीं, बल्कि कई इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में भी होता है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज में ईबीजी- कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक इंडस्ट्रियल मेटल्स और सोने में कमजोरी के साथ-साथ मांग में नरमी ने भी चांदी की कीमतों में गिरावट को बढ़ाया है। भाव बढ़ने के कारण कुछ इंडस्ट्रीज चांदी के विकल्प तलाश रहे हैं या इसका इस्तेमाल कम कर रहे हैं।
अब किन बातों पर रहेगी नजर
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले के अलावा निवेशकों की नजरें अमेरिका के कोर PCE (पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर्स) इनफ्लेशन, तीसरी तिमाही के जीडीपी ग्रोथ, ड्यूरेबल गुड्स यानी लंबे समय तक चलने वाली चीजें और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों के साथ-साथ रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध से जुड़ी गतिविधियों पर भी नजर रहेगी।
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिटेंड और रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी (Jateen Trivedi) का कहना है कि नियर टर्म आउटलुक सतर्क वाला दिख रहा है और अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसलों को लेकर स्पष्टता आने तक गोल्ड पर दबाव बना रह सकता है। जतीन के मुताबिक अगर फेड का रुख सख्त रहता है, तो डॉलर मजबूत हो सकता है और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है, जिससे सोने और चांदी पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ फेड का नरम रुख शॉर्ट कवरिंग को बढ़ावा दे सकता है, जिससे कीमतों को कुछ सहारा मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

