
ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के लिए दूसरे दौर के मतदान के बाद मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा चुनाव जीतने में सफल रहे। वे चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने हैं। इस चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो उन्हें चुनौती दे रहे थे। लूला की जीत को ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
लूला की जीत से क्यों लगा ट्रंप को झटका?
लूला की जीत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ट्रंप ने इस चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो का समर्थन किया था। फ्लेवियो बोल्सोनारो ने भी अपने कैंपेन में व्हाइट हाउस के साथ अपने संबंधों पर जोर दिया और कहा कि ब्राजील को ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर डील की जरूरत है, जिसमें रेयर-अर्थ मिनरल सेक्टर भी शामिल है
ब्राजील किसी का बैकयार्ड नहीं
दोबारा चुने जाने के बाद साओ पाउलो में संबोधन के दौरान लूला ने कहा कि ब्राजील किसी का बैकयार्ड नहीं है। लूला का यह बयान इस क्षेत्र में US के असर पर एक कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि ब्राजील ने उनके जरिए विदेशी दखल को हरा दिया है। उन्होंने कहा कि हमें डिजिटल प्लेटफॉर्म को रेगुलेट करने की जरूरत है।
लूला ने अपने संबोधन में पॉलिटिकल मतभेदों के बावजूद, ब्राजील की कंजर्वेटिव पार्टी की लीडरशिप वाली कांग्रेस के साथ काम करने का वादा किया और कहा कि वह पूरे देश के लिए सरकार चलाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं 215 मिलियन ब्राजलियन लोगों के लिए शासन करूंगा, अब हमारा कोई चुनावी विरोधी नहीं है।
इस महीने की शुरुआत में पहले राउंड में फ्लेवियो बोल्सोनारो लूला से 2.2 मिलियन से ज्यादा वोटों से आगे थे, जिससे कांटे की टक्कर वाले दूसरे राउंड का माहौल बन गया था।


