
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश भर के निजी सेटेलाइट चैनलों के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। सरकार की ओर से जारी निर्देशों में चैनलों को बताया गया है कि उनको किस तरह के कंटेंट नहीं दिखाने हैं। सूचना व प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी इस एडवाइजरी में कहा गया है कि चैनल देश विरोधी कंटेंट नहीं दिखाएं। हालांकि यह नहीं बताया गया है कि किस तरह के कंटेंट को देश विरोधी माना जाएगी। सरकार ने सांप्रदायिकता बढ़ाने वाले कंटेंट भी नहीं दिखाने को कहा है।
सूचना व प्रसारण मंत्रालय की एडवाइजरी में ज्यादातर बातें वहीं है, जो पहले की एडवाइजरी में थीं। जैसे यौन अपराध से पीड़ित महिलाओं की पहचान नहीं जाहिर की जाए, सैन्य या अर्धसैन्य बलों की कार्रवाई का लाइव प्रसारण नहीं किया जाए, आपदा से जुड़ी कवरेज में संयम बरता जाए आदि आदि। लेकिन इसके अलावा इस बार एडवाइजरी में चैनलों से यह भी कहा गया है कि वे किस तरह की डिबेट कराएं। उनसे भड़काऊ डिबेट नहीं कराने को कहा गया है।
यह भी कहा गया है कि चैनलों को पैनलिस्ट और प्रतिभागियों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर म्यूट, डिस्क्लेमर, कार्यक्रम रोकने या फीड बंद करने जैसे कदम उठाने को भी कहा गया है, ताकि अपमानजनक, आपत्तिजनक या भड़काऊ कंटेंट का प्रसारण रोका जा सके। इसके साथ ही मंत्रालय ने चैनलों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का ठीक तरीके से इस्तेमाल करने को कहा है।
सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि कई निजी टीवी चैनलों पर प्रोग्राम कोड के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। कहा गया है कि इंटर डिपार्टमेंटल कमेटी ने भी पाया कि कुछ चैनलों पर ऐसे कंटेंट दिखाए गए जो प्रोग्राम कोड के अनुरूप नहीं थे। इसलिए चैनलों को अपने रिव्यू मैकेनिज्म मजबूत करने और न्यूज जुटाने, एडिटिंग, प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन और टेलीकास्ट से जुड़े सभी कर्मचारियों को प्रोग्राम कोड के प्रावधानों की पर्याप्त जानकारी देने की सलाह दी गई है।
पहली बार ऐसा हुआ है कि सरकार ने चैनलों के एआई के इस्तेमाल में सावधानी बरतने को कहा है। इसमें एआई के जरिए बनने वाले ग्राफिक्स और वर्चुअल न्यूज प्रेजेंटेशन जैसी चीजें शामिल हैं। कहा गया है कि एआई का इस्तेमाल सिर्फ सहायक भूमिका में किया जाना चाहिए और इससे खबर की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके इस्तेमाल में भी प्रोग्राम कोड के पालन का ध्यान रखने को कहा गया है।

