वीडियो को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है, जिसमें चिंता जताई गई है कि स्टेशन से इतना बड़ा बॉक्स कैसे ले जाया गया। आगे चलकर यह किसी खंभे या अन्य वस्तु से टकरा सकता है। इस घटना ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा छेड़ दी है।

दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी एशिया में रहती है, लेकिन इसके बावजूद वहां से एक ऐसी फुटबॉल टीम नहीं आ पाती जो फुटबॉल में धाक जमा सके। एशियाई स्तर पर बात होती है, तो उत्तर दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन.. पता नहीं कितने ही नाम सामने आते हैं। ऐसे देशों में फुटबॉल का जुनून भी है और रिवाज भी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी हवा गोल हो जाती है।
पिछले विश्वकप में जापान ने जरुर जर्मनी और स्पेन को 2-1 से हराकर उलटफेर किया था लेकिन एशियाई टीम ज्यादातर मौकों पर उलटफेर करने पर ही सुर्खियों में आती है और फिर गुम हो जीता है। अगर कोटा ना होता शायद फीफा विश्वकप में एशिया से कोई भी टीम चयनित ना होती।
अगर 2002 में दक्षिण कोरिया के सेमीफाइनल में पहुंचने को अलग कर दिया जाए, तो एशियाई देशों ने आज तक वर्ल्ड कप में कोई कमाल नहीं किया हैआम तौर पर एशिया में फुटबॉल की नाकामी की तीन वजहें दी जाती हैं, दम खम की कमी, कुपोषण और ट्रेनिंग तथा रिवाज की कमी। लेकिन बारीकी से देखने पर इन तीनों दावों पर सवाल उठ सकते हैं। समूचा दक्षिण एशिया मजदूरी और कृषि पर आधारित इलाका है, जहां के लोग न सिर्फ अपने देशों में बल्कि विदेशों में भी कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। अगर गौर से देखा जाए, तो क्रिकेट भी कोई कम दम खम वाला खेल नहीं, जहां कई बार बल्लेबाजों को घंटों क्रीज पर रहना पड़ता है और इस दौरान मेहनत भरे शॉट भी खेलने पड़ते हैं।
क्रिकेट में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका का बोलबाला है। एशियाई फुटबॉल में बार बार कुपोषण को उभारा जाता है। वन गोल नाम की संस्था ने तो बाकायदा एशियाई फुटबॉल संगठनों के साथ मिलकर रिसर्च भी किए हैं और नतीजे निकाले हैं कि किस तरह वहां के बच्चों को विटामिन और दूसरी पोषक चीजें नहीं मिलतीं “और इस वजह से बच्चे अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ मुकाबला नहीं कर सकते”. इस दलील को सिर्फ चीन की मिसाल से काटा जा सकता है।
पिछली सदी तक चीन खेल की दुनिया का एक मामूली देश था, लेकिन पिछले एक दो दशक में यह इतनी तेजी से उभरा है कि ओलिंपिक में सीधे पहले दूसरे नंबर पर जा पहुंचा है। ओलिंपिक खेलों पर ध्यान देने के बाद से चीन में खेल का कायापलट हो चुका है। छोटे छोटे बच्चे तैराकी और दौड़ में नाम कमा रहे हैं।
ऐसे में ले देकर ट्रेनिंग और रिवाज पर ही ध्यान दिए जाने की जरूरत है। चीन ने हाल के दिनों में फुटबॉल पर पैसे लगाने की शुरुआत की है। ड्रोग्बा जैसे कुछ नामी खिलाड़ी चीनी प्रीमियर लीग में खेल चुके हैं, जबकि बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जा रहा है। भारत में फुटबॉल लीग की शुरुआत हुई है, जिसमें काफी पैसा लगाया जा रहा है।

युद्ध से जर्जर मध्यपूर्व में इसकी कमी दिखती है। हालांकि कतर और दुबई जैसे देशों में फुटबॉल को लेकर क्रेज उभर रहा है लेकिन क्रेज से ग्राउंड पर जीत तक के सफर में लंबा फासला होता है।वर्ल्ड कप में एशियाई देशों को शामिल करना मजबूरी है क्योंकि हर महाद्वीप के नाम पर कोटा बंधा है. वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा यूरोप से 13, दोनों अमेरिकी महाद्वीप और कैरिबियाई देशों को आठ, अफ्रीका को पांच और एशिया तथा ओसियाना को मिला कर पांच देश होते हैं. मेजबान को टूर्नामेंट में अपने आप जगह मिल जाती है।
जरूरत है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालमेल बिठाने की। आखिर जब लातिन अमेरिका और अफ्रीका के फुटबॉल खिलाड़ी यूरोप में खेल सकते हैं, तो फिर एशियाई खिलाड़ी क्यों नहीं। इसका मतलब यह कतई नहीं कि यूरोप में फुटबॉल खेलने वाला ही बड़ा स्टार होता है, बल्कि फुटबॉल को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की जरूरत है।
सरकारों को भी लगातार फुटबॉल पर ध्यान देने की जरूरत है, सिर्फ विश्व कप के दौरान नहीं। कतर को आठ साल में वर्ल्ड कप का आयोजन करना है और मेजबान होने के नाते वह अपने आप वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कर जाएगा, लेकिन तब तक एशियाई फुटबॉल का कितना भला होता है, इसे लेकर बहुत ज्यादा शक नहीं होना चाहिए।
मौजूदा हालात ऐसी है कि फीफा रैंकिंग में सबसे ऊपर जो एशियाई देश है, वह है जापान, जो 18वें नंबर पर है और भारत की तो बात ही छोड़िए, जो 136वें नंबर पर है।

IPL 2026 के दौरान हैमस्ट्रिंग में चोट लगने के बाद रोहित शर्मा का अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज के लिए खेलना अभी भी अनिश्चित बना हुआ है, जबकि विराट कोहली भी 1 जून को अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के IPL Final जीतने वाले मैच में नाबाद 75 रन बनाते समय हैमस्ट्रिंग में खिंचाव आने के बाद संशय के घेरे में हैं।
भारतीय टीम प्रबंधन हार्दिक पंड्या की फिटनेस पर भी करीब से नज़र रखे हुए है। इस ऑलराउंडर ने आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियंस के लिए पीठ की ऐंठन के कारण कुछ मैच नहीं खेले थे, और एकदिवसीय सीरीज के लिए उनकी तैयारी की पुष्टि अभी बाकी है।
शनिवार से न्यू चंडीगढ़ में शुरू हो रहे अफगानिस्तान के खिलाफ भारत के एकमात्र टेस्ट मैच से पहले मीडिया से बातचीत में टेन डेशकाटे ने कहा कि कोई भी घोषणा करने से पहले चिकित्सा दल ही अंतिम फैसला लेगा।

उन्होंने कहा, “इस बारे में आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। ज़ाहिर है, जब विराट या रोहित जैसे खिलाड़ी (टीम से बाहर होते हैं) तो यह बड़ी खबर होती है, लेकिन प्रोटोकॉल वही रहेंगे। हम इन खिलाड़ियों की फिटनेस का आकलन करेंगे, और हमारे पास अब यह तय करने के लिए कुछ दिन हैं कि क्या वे खेलने और टीम का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह फिट हैं, और उसी के अनुसार बदलाव किए जाएंगे। लेकिन मुझे यकीन है कि जैसे ही मेडिकल टीम इस पर कोई फैसला लेगी, आधिकारिक जानकारी जरूर दी जाएगी।
सहायक कोच ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल के बीच खिलाड़ियों के काम के बोझ में संतुलन बनाने की चुनौती के बारे में भी बात की, खासकर तब जब केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ी टूर्नामेंट के अंतिम चरणों में चोटों के साथ खेल रहे होते हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह हर खिलाड़ी के लिए अलग-अलग होता है। भारतीय टीम के नजरिए से देखें तो, हम चाहते हैं कि जब खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय ड्यूटी पर हों, तो वे अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हों, और यह हर मामले को अलग-अलग तरीके से संभालने का विषय है। इसलिए मैं इस बात को समझता हूं कि इन खिलाड़ियों के लिए यह साल का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। आईपीएल एक शानदार घरेलू टूर्नामेंट है, इसलिए यह इन दोनों चीज़ों के बीच संतुलन बनाता है। मुझे लगता है कि पिछले आईपीएल में खिलाड़ियों पर जितना काम का बोझ था, या कम से कम अनुबंधित खिलाड़ियों के एक बड़े हिस्से पर उसे देखते हुए, हमने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है, और चोटें तो लगती ही रहती हैं।”
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उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें क्रिकेट से दूर रखा जाए, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जब अंतरराष्ट्रीय मैचों की ज़रूरत हो, तो वे अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस पर हों।
उन्होंने कहा, “आप खिलाड़ियों को मैच न खिलाकर सुरक्षित नहीं रख सकते, लेकिन हमें अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल के अहम हिस्सों की पहचान ज़रूर करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी न केवल चोट-मुक्त हों, बल्कि जब हमें उनकी सबसे ज्यादा जरुरत हो, तो वे शारीरिक रूप से भी अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति में हों।”

Google ने कंटेंट क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के लिए एक नया फीचर Search Profiles लॉन्च किया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स Google Search और Google Discover पर अपनी डिजिटल पहचान को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगे। Search Profile एक समर्पित प्रोफाइल पेज होगा। इसमें किसी क्रिएटर या पब्लिशर के आर्टिकल्स, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट और अन्य महत्वपूर्ण कंटेंट एक ही जगह पर दिखाई देंगे।
Google का कहना है कि यह फीचर पसंदीदा क्रिएटर्स के कंटेंट को खोजने में यूजर्स की मदद करेगा, वहीं पब्लिशर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को बड़े ऑडियंस तक पहुंचने का मौका देगा।
Search Profiles को Google का एक तरह का डिजिटल बिजनेस कार्ड माना जा सकता है। इसके जरिए क्रिएटर्स यह तय कर सकते हैं कि Google के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उनकी प्रोफाइल कैसी दिखाई देगी।
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कैसे काम करेगा यह फीचर?
Search Profile बनाने के बाद यूजर्स अपनी प्रोफाइल को अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज कर सकते हैं। इसमें शामिल हैं:
- प्रोफाइल फोटो (अवतार)
- बायो और परिचय
- वेबसाइट लिंक
- सोशल मीडिया हैंडल
- वीडियो प्लेटफॉर्म्स के लिंक
- फीचर्ड कंटेंट
इस प्रोफाइल में क्या-क्या जोड़ा जा सकता है
- लेटेस्ट आर्टिकल्स और ब्लॉग पोस्ट
- YouTube वीडियो
- सोशल मीडिया अपडेट्स
- पर्सनल वेबसाइट
- क्रिएटर बायो और प्रोफाइल फोटो
- सपोर्टेड प्लेटफॉर्म्स के लिंक
यह प्रोफाइल कई जगहों पर दिखाई दे सकती है, जैसे-
- Google Search Results
- Google Discover Feed
- Google Knowledge Panel
- डायरेक्ट प्रोफाइल URL
कौन बना सकता है Search Profile?
फिलहाल यह सुविधा केवल उन क्रिएटर्स के लिए उपलब्ध है जो Google की पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि यूजर की उम्र कम से कम 18 वर्ष हो।
फॉलोअर्स की न्यूनतम संख्या:
- YouTube पर 1 लाख फॉलोअर्स
- Instagram पर 1 लाख फॉलोअर्स
- X (पूर्व में Twitter) पर 1 लाख फॉलोअर्स
- TikTok पर 3 लाख फॉलोअर्स
- Knowledge Panel को भी मिलेगा फायदा
यदि किसी क्रिएटर के पास पहले से Google Knowledge Panel मौजूद है, तो Search Profile उससे जुड़ जाएगा। इससे Knowledge Panel में नई प्रोफाइल फोटो, ताजा कंटेंट और डायरेक्ट प्रोफाइल लिंक दिखाई देंगे, जिससे ऑनलाइन विजिबिलिटी और बेहतर हो सकती है।
कैसे बनाएं Google Search Profile
क्रिएटर्स आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना Search Profile बना सकते हैं-
profile.google.com/claim पर जाएं।
- अपने Google अकाउंट से साइन इन करें।
- कम से कम एक सपोर्टेड सोशल मीडिया अकाउंट लिंक करें।
- Create Profile” बटन पर क्लिक करें।
यूजर्स यह भी जांच सकते हैं कि Google ने उनके लिए पहले से कोई प्रोफाइल ऑटो-जनरेट की है या नहीं। इसके लिए वे profile.google.com पर जा सकते हैं या Google Search में अपना नाम सर्च कर सकते हैं।
अभी सिर्फ अमेरिका के लिए किया गया है लॉन्च
Google ने फिलहाल Search Profiles फीचर को केवल अमेरिका के यूजर्स के लिए लॉन्च किया है। हालांकि कंपनी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इसे अन्य देशों में भी उपलब्ध कराया जाएगा। डिजिटल दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Search Profiles को कंटेंट क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के लिए एक अहम टूल माना जा रहा है, जो उन्हें Google के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहुंच और पहचान बढ़ाने में सहायता करेगा। Edited by : Sudhir Sharma

इतिहास में कुछ तिथियां केवल कैलेंडर के पन्नों पर अंकित दिन नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना में सदैव जीवित रहने वाली प्रेरणाएं बन जाती हैं। ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, 6 जून 1674 का दिन भारतीय इतिहास की ऐसी ही एक अमर तिथि है, जब रायगढ़ की पवित्र धरती पर श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ। यह घटना किसी राजा के सिंहासनारोहण का मात्र राजकीय आयोजन नहीं थी, बल्कि भारतीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक अस्मिता और स्वाधीन शासन की उद्घोषणा थी। उस दिन एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि स्वराज्य के विचार का राज्याभिषेक हुआ था।ALSO READ: जयंती विशेष: छत्रपति शिवाजी: धर्म, संस्कृति और राजनीति के अद्वितीय साम्राज्य निर्माता Chhatrapati Shivaji Maharaj
सत्रहवीं शताब्दी का भारत राजनीतिक अस्थिरता, विदेशी प्रभुत्व और सामाजिक निराशा के दौर से गुजर रहा था। सत्ता का केंद्र जनता से दूर था और शासन का उद्देश्य लोककल्याण के बजाय साम्राज्य विस्तार बन चुका था। ऐसे समय में एक युवा ने यह स्वप्न देखने का साहस किया कि इस भूमि का शासन इसी भूमि के लोगों के हाथों में होना चाहिए। यह स्वप्न था-'हिन्दवी स्वराज्य' का और उस स्वप्न के महान शिल्पकार थे श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज।
शिवाजी महाराज ने अपने जीवन की यात्रा किसी विशाल साम्राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि संघर्षशील राष्ट्रनायक के रूप में प्रारंभ की थी। सीमित संसाधन, विपरीत परिस्थितियां और शक्तिशाली शत्रुओं के बीच उन्होंने जिस धैर्य, साहस और दूरदर्शिता का परिचय दिया, वह विश्व इतिहास में अद्वितीय है। उनके लिए सत्ता व्यक्तिगत वैभव का साधन नहीं, बल्कि जनकल्याण और राष्ट्ररक्षा का माध्यम थी।
यही कारण है कि उनके प्रत्येक अभियान के पीछे विस्तारवाद नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और सुरक्षा का उद्देश्य दिखाई देता है। लगभग तीन दशकों तक चले संघर्ष, संगठन और राष्ट्रनिर्माण के पश्चात जब स्वराज्य एक सुदृढ़ शक्ति के रूप में स्थापित हो गया, तब राज्याभिषेक की आवश्यकता अनुभव की गई। यह केवल धार्मिक या परंपरागत प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक घोषणा थी कि यह राज्य किसी साम्राज्य की जागीर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और सार्वभौम सत्ता है। रायगढ़ का दुर्ग उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब भारतीय आत्मविश्वास ने पुनः अपना मस्तक ऊंचा किया। राज्याभिषेक समारोह की भव्यता जितनी आकर्षक थी, उससे कहीं अधिक उसका वैचारिक महत्व था।
'सदियों बाद किसी भारतीय शासक ने पूर्ण वैदिक परंपरा के अनुसार स्वयं को स्वतंत्र सम्राट घोषित किया था। 'यह घटना उस मानसिक गुलामी के विरुद्ध भी थी, जिसने समाज को यह विश्वास दिला दिया था कि विदेशी शासन ही उसकी नियति है। श्री शिवाजी महाराज ने अपने राज्याभिषेक के माध्यम से यह संदेश दिया कि स्वराज्य केवल राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की अवस्था है।
रायगढ़ में आयोजित यह समारोह भारतीय संस्कृति की जीवंतता और सामाजिक सहभागिता का अनुपम उदाहरण था। देश के विभिन्न क्षेत्रों से विद्वान, संत, धर्माचार्य, योद्धा और आम जनता के साथ जनप्रतिनिधि इसमें सम्मिलित हुए। यह आयोजन किसी एक क्षेत्र या समुदाय का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की आकांक्षाओं का उत्सव बन गया। राज्याभिषेक के उपरांत दान, दक्षिणा और लोकहित के कार्यों पर जो बल दिया गया, वह शिवाजी महाराज की जनोन्मुखी शासन दृष्टि को स्पष्ट करता है।
आज जब हम श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस को स्मरण करते हैं, तो हमें केवल उसके ऐतिहासिक वैभव को नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसके मूल संदेश को समझना चाहिए। श्री शिवाजी महाराज का जीवन बताता है कि राष्ट्र का निर्माण केवल तलवार की शक्ति से नहीं, बल्कि चरित्र, संगठन, न्याय और जनविश्वास से होता है। उन्होंने अपने शासन में धर्म को आस्था का विषय बनाया, शासन का उपकरण नहीं।
उन्होंने महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, किसानों को संरक्षण दिया, प्रशासन को जवाबदेह बनाया और सुरक्षा को राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी माना। वर्तमान समय में जब नेतृत्व के मूल्य, प्रशासनिक नैतिकता और राष्ट्रीय दायित्व पर निरंतर चर्चा होती है, तब शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व एक आदर्श उदाहरण बनकर सामने आता है।
यह राज्याभिषेक हमें याद दिलाता है कि सत्ता का वास्तविक अर्थ सेवा है, अधिकार का वास्तविक उद्देश्य संरक्षण है और नेतृत्व का वास्तविक स्वरूप त्याग एवं उत्तरदायित्व है।'यह भी विचारणीय है कि राज्याभिषेक केवल अतीत की गौरव गाथा बनकर न रह जाए।' यदि हम वास्तव में इस दिवस का सम्मान करना चाहते हैं, तो हमें शिवाजी महाराज के आदर्शों को अपने जीवन और समाज में उतारना होगा। स्वराज्य का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और आत्मअनुशासन भी है। जिस राष्ट्र के नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होते हैं, वही राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है।
श्री छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने पराधीनता के अंधकार में आत्मविश्वास का दीप प्रज्वलित किया। यह घटना हमें स्मरण कराती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि नेतृत्व में दूरदृष्टि, समाज में एकता और लक्ष्य के प्रति अटूट निष्ठा हो, तो इतिहास की दिशा बदली जा सकती है।
आज, राज्याभिषेक दिवस पर हम केवल एक महान राजा को स्मरण नहीं करते, बल्कि उस विचार को नमन करते हैं जिसने भारत को स्वराज्य का मंत्र दिया। रायगढ़ की वह ऐतिहासिक गूंज आज भी हमें पुकारती है कि राष्ट्र निर्माण का कार्य कभी समाप्त नहीं होता। प्रत्येक पीढ़ी को अपने समय में स्वराज्य के मूल्यों की रक्षा करनी होती है।
वास्तव में, 6 जून 1674 का राज्याभिषेक केवल शिवाजी महाराज के मस्तक पर मुकुट धारण करने का क्षण नहीं था, वह भारत के स्वाभिमान, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का महोत्सव था। यही कारण है कि 'तीन शताब्दियों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह दिवस भारतीय जनमानस में प्रेरणा, गौरव और राष्ट्रभक्ति का अमिट प्रतीक बना हुआ है।'ALSO READ: छत्रपति शिवाजी महाराज की कितनी पत्नियां थीं?
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ऑस्ट्रेलियन फुटबॉलर Ryan Williams ने
भारत की जर्सी के लिए अपने देश की नागरिकता तक छोड़ दी।
क्योंकि उन्हें खेलना था, उस देश से जिसे उनका परिवार अपना घर कहता था – भारत
उनका ये सपना आसान बिल्कुल भी नहीं था
पर उन्होंने वो सब कुर्बान किया जो उनके सपने के बीच में था।
रयान जब ब्लू जर्सी पहनकर मैदान में उतरे तो सिर्फ़ 4 मिनट में उन्होंने इतिहास रच दिया और बन गए भारत के लिए डेब्यू करने वाले वो खिलाड़ी जिसने सबसे तेज़ गोल किया।
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NEET Paper Leak Controversy: कानपुर में नीट पेपर लीक और सीबीएसई विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर यूपी सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का बयान सुर्खियों में आ गया। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि “ऐसा नहीं हो सकता कि दाढ़ी वाला हत्या करे और मूंछ वाले को पकड़ लिया जाए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज कोना श्रीकर भरत ने गुरूवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की।भरत ने 2023-2024 के बीच भारत के लिए सात टेस्ट मैच खेले, जिसमें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल 2023 भी शामिल है।बत्तीस साल के भरत ने फरवरी 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पदार्पण किया और इसके एक साल बाद उन्होंने विशाखापत्तनम में इंग्लैंड के खिलाफ देश के लिए अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला। उन्होंने कुल 221 रन बनाए जिसमें उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 44 रन रहा।
भरत ने गुरूवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘गर्व और कृतज्ञता की भावना के साथ मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान करता हूं। अपने देश के लिए खेलना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरी इस यात्रा में बहुत अधिक सहनशक्ति और ताकत की जरूरत पड़ी लेकिन टेस्ट मैच में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान हर पल के लायक था। चार लोगों के हमारे परिवार में हम सभी ने दो दशक तक एक ही सपना जिया।’’
#TeamIndia wicket-keeper batter KS Bharat has announced his retirement from international cricket.
Wishing him the very best for the road ahead and all his future endeavours @KonaBharat pic.twitter.com/hhuDTBr6rj
— BCCI (@BCCI) June 5, 2026
भरत ने कहा, ‘‘मेरी बहन, मां और पिताजी को दिल से धन्यवाद जिन्होंने मेरे लिए ऐसा माहौल और समर्थन तैयार किया। मैं उनके प्यार, अनुशासन और कड़ी मेहनत का ही नतीजा हूं।’’
दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने घरेलू क्रिकेट में आंध्र का प्रतिनिधित्व किया। वह रणजी ट्रॉफी में तिहरा शतक लगाने वाले पहले विकेटकीपर बल्लेबाज हैं। उन्होंने 2014-2015 में गोवा के खिलाफ आंध्र के लिए 311 गेंद में 308 रन बनाए थे। यह आंध्र के किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया पहला तिहरा शतक था।
भरत ने भारत के पूर्व कप्तानों विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी धन्यवाद दिया। इन्हीं दोनों कप्तानों की अगुवाई में उन्होंने आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। इसके अलावा उन्होंने भारत के पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ का भी आभार जताया।
भरत ने लिखा, ‘‘आईपीएल पदार्पण के दौरान मेरे कप्तान विराट कोहली को बहुत-बहुत धन्यवाद जिन्होंने मुझे अपनी प्रतिभा दिखाने और पहचान बनाने का मौका दिया।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘मेरे भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को भी बहुत-बहुत धन्यवाद जिनके नेतृत्व में मैंने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। यह अनुभव मेरे लिए अनमोल है और इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।’’
भरत ने लिखा, ‘‘मेरे भारतीय कोच राहुल द्रविड़ सर को भी धन्यवाद। भारत ए टीम से लेकर भारतीय टीम तक उनका मार्गदर्शन मेरे लिए अविस्मरणीय रहा है। आपके सहयोग से ही मैं एक भारतीय टेस्ट क्रिकेटर बन पाया।’’
भरत ने आईपीएल 2021 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेला जबकि 2022 में उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स का प्रतिनिधित्व किया।

World Environment Day: विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला एक ऐसा वैश्विक महाअभियान है, जो हमें याद दिलाता है कि यह धरती हमारा इकलौता घर है और इसकी हिफाजत करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आज के समय में जब ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और तेजी से कटते जंगल हमारे अस्तित्व के लिए खतरा बन चुके हैं। आइये आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हम आपके लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास और 2026 की खास थीम के बारे में…ALSO READ: घर में गार्डनिंग का शौक हैं तो जान लीजिए पौधों से जुड़े ये गोल्डन वास्तु रूल्स
विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास: World Environment Day History
विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत आज से करीब 54 साल पहले हुई थी। इसकी कहानी कुछ इस तरह है:
1. स्टॉकहोम सम्मेलन (1972)
पर्यावरण प्रदूषण और धरती को हो रहे नुकसान को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 5 जून से 16 जून 1972 तक स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एक बड़ा वैश्विक तथा विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। जिसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया।
इसे 'स्टॉकहोम कॉन्फ्रेंस ऑन ह्यूमन एनवायरमेंट' कहा जाता है। इसी सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव पारित कर हर साल 5 जून को 'विश्व पर्यावरण दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की। साथ ही, पर्यावरण की देखरेख के लिए UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) का गठन भी किया गया।
2. पहला पर्यावरण दिवस (1973)
घोषणा के अगले ही साल यानी 5 जून 1973 को पहली बार आधिकारिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। उस समय इसकी पहली थीम 'केवल एक पृथ्वी' (Only One Earth) रखी गई थी।
3. वैश्विक अभियान और मेजबानी (1987 से)
शुरुआत में यह दिन सामान्य रूप से मनाया जाता था, लेकिन साल 1987 से संयुक्त राष्ट्र ने एक नया नियम बनाया। इसके तहत हर साल इस दिन को मनाने के लिए एक अलग देश को मेजबान (Host) चुना जाता है और एक खास थीम तय की जाती है, ताकि पूरी दुनिया का ध्यान पर्यावरण से जुड़ी किसी एक गंभीर समस्या पर केंद्रित किया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 19 नवंबर 1986 से लागू हुआ। उसके जल, वायु, भूमि- इन तीनों से संबंधित कारक तथा मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं। आज इस अभियान से दुनिया के 143 से ज्यादा देश जुड़ चुके हैं, जहां सरकारी स्तर से लेकर स्कूलों और मोहल्लों तक पेड़ लगाने, प्लास्टिक हटाने और पर्यावरण को बचाने की कसमें खाई जाती हैं।
आपको बता दें कि पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में भारत के प्रारंभिक कदम के तौर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 'पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव' विषय पर व्याख्यान दिया था। और तभी से हम प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मना रहे हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम: World Environment Day Theme 2026
वर्ष 2026 के लिए विश्व पर्यावरण दिवस की आधिकारिक थीम निम्न तय की गई है:
'प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।' (Inspired by Nature. For Climate. For Our Future)
अभियान का संदेश (Campaign Message): इस वर्ष का मुख्य नारा #NowFor Climate (अब जलवायु के लिए) है, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तुरंत कदम उठाने की मांग करता है।
मेजबान देश (Host Country): 2026 की वैश्विक गतिविधियों और मुख्य समारोह की मेजबानी अज़रबैजान (Azerbaijan) देश कर रहा है, और इसका आयोजन वहां की राजधानी बाकू (Baku) में किया गया है।
मुख्य उद्देश्य: इस थीम का फोकस इस बात पर है कि हम जलवायु संकट (Climate Change) से निपटने के लिए प्रकृति से सीखें। जंगलों को बचाना, अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) को अपनाना और इकोसिस्टम को दोबारा जिंदा करना ही हमारे सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।
“धरती हमारी नहीं, हम धरती के हैं। पर्यावरण की रक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है।”
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: World Environment Day Wishes: विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाली का संदेश: शुभकामनाएं, विचार और प्रेरक पंक्तियां

World Environment Day 2026: हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमारे अस्तित्व को बचाने, प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और भावी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, हरी-भरी पृथ्वी छोड़ने का संकल्प लेने का दिन है। प्रकृति संरक्षण की शुरुआत हमारे अपने घर और आंगन से भी शुरू की जा सकती है। जब एक परिवार मिलकर एक नन्हा पौधा लगाता है, तो वह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए जीवन और खुशहाली बोता है।ALSO READ: घर में गार्डनिंग का शौक हैं तो जान लीजिए पौधों से जुड़े ये गोल्डन वास्तु रूल्स
इस खास मौके पर अपने प्रियजनों को प्रेरित करने के लिए यहां कुछ बेहतरीन शुभकामनाएं, विचार और प्रेरक पंक्तियां दी गई हैं:
विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं
1. धरती का आवरण है हरियाली,
इसके बिना जीवन की हर शाम है खाली।
आइए इस पर्यावरण दिवस पर कम से कम
एक पौधा लगाने का संकल्प लें।
विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
2. पेड़-पौधे हैं जीवन का आधार,
मत करो इनका अनादर।
आओ प्रकृति को सजाएं,
मिलकर पेड़ लगाएं।
Happy World Environment Day!
3. स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और
हरी-भरी धरती ही असली संपत्ति है।
आइए अपनी इस संपत्ति को सहेजने का वादा करें।
पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं!
4. जब घर के आंगन में पेड़ मुस्कुराएगा,
तब हर चेहरा खिलखिलाएगा।
अपने घर से शुरुआत करें,
प्रकृति को सुंदर बनाएं।
पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
5. “हरे-भरे पर्यावरण में ही
जीवन की खुशियां छुपी हैं।
इस दिन हर पेड़ की सुरक्षा का संकल्प लें।”
विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
पर्यावरण संरक्षण पर अनमोल विचार
* “प्रकृति के पास हर इंसान की ज़रूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन किसी एक इंसान के लालच को पूरा करने के लिए नहीं।”
* “पेड़ लगाना केवल पर्यावरण की मदद करना नहीं है, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को सांसें उपहार में देना है।”
* “प्रकृति हमारी माता है। यदि हम उसकी रक्षा करेंगे, तो वह हमारा पोषण करेगी। यदि हम उसे नष्ट करेंगे, तो हम खुद के विनाश का रास्ता चुनेंगे।”ALSO READ: प्रकृति के साथ आत्मीयता: पर्यावरण संरक्षण का पहला कदम
प्रेरक पंक्तियां और स्लोगन
हरियाली का संदेश
1. “तभी आएगी जीवन में खुशहाली, जब हम सब मिलकर फैलाएंगे हरियाली।”
2. “पेड़ लगाओ, देश बचाओ; पेड़ लगाओ, जीवन सजाओ।”
3. “जहां हरियाली, वहां खुशहाली। अपने पर्यावरण को संवारें, अपने भविष्य को संवारें।”
4. एक छोटा सा संकल्प
“कागज को बचाएं, पानी को सहेजें,
प्लास्टिक को छोड़कर, थैले को भेजें।
चलो आज इस धरा को स्वर्ग बनाते हैं,
मिलकर एक नया पौधा लगाते हैं।”
घर से कैसे करें शुरुआत?
पर्यावरण को बचाने के लिए किसी बड़े जंगल में जाने की जरूरत नहीं है:
* एक पौधा, एक याद: अपने बच्चों के साथ मिलकर घर के बगीचे में एक पौधा लगाएं और उसे एक सुंदर नाम दें।
* गीले और सूखे कचरे का प्रबंधन: घर के कोने में एक कंपोस्ट बिन रखें, जिससे रसोई के कचरे से प्राकृतिक खाद बन सके।
* पक्षियों के लिए दाना-पानी: आंगन के पेड़ों पर पक्षियों के लिए पानी का बर्तन और दाना लटकाएं।
आइए, आज से ही इस मुहिम का हिस्सा बनें। हैप्पी वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे!
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: पर्यावरण दिवस: जब आखिरी नदी सूखेगी, तब इंसान क्या करेगा?

