क्या ईरान पर होने वाला है परमाणु हमला? नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन ले सकता है बड़ा फैसला

क्या ईरान पर होने वाला है परमाणु हमला? नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन ले सकता है बड़ा फैसला

US Iran Nuclear Attack Claim

US Iran Nuclear Attack Claim: अमेरिका के मशहूर टीवी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक टकर कार्लसन के एक सनसनीखेज दावे ने वाशिंगटन से लेकर मध्य पूर्व और पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। कार्लसन का दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले कुछ ही दिनों में ईरान पर परमाणु हमला (Nuclear Attack) कर सकते हैं। यह खौफनाक फैसला इजराइल में फंसे राजनीतिक संकट और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भारी दबाव के बीच लिया जा सकता है। हालांकि यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर रहेगा कि ट्रंप की पार्टी को मिडटर्म इलेक्शन में कितनी सीटें मिलती हैं। 

टकर कार्लसन का बड़ा खुलासा

मशहूर अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी कुर्सी बचाने और जेल जाने के डर से डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सीधा सैन्य एक्शन लेने का भारी दबाव बना रहे हैं। ALSO READ: इजराइल में पलटी बाजी! हार के अनुमानों के बीच नेतन्याहू का गठबंधन सबसे आगे, ट्रंप ने लिया श्रेय

 

कार्लसन के अनुसार, हाल ही में हुए इजरायली आम चुनावों में बेंजामिन नेतन्याहू की अगुवाई वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत (नेसेट में 61 सीटें) नहीं मिला है। अगर ट्रंप इजराइल की घरेलू राजनीति में दखल देकर दूसरी पार्टियों के साथ डील नहीं कराते हैं, तो नेतन्याहू की पीएम कुर्सी छिन सकती है और उन पर चल रही जांच के कारण उन्हें जेल तक जाना पड़ सकता है। इसी डर से नेतन्याहू रोज राष्ट्रपति ट्रंप को फोन कर रहे हैं और युद्ध के मुहाने पर खड़े मध्य पूर्व में अमेरिका को सीधे झोंकना चाहते हैं।

मध्य ईरान के पिकाक्स पर्वत पर हमले का प्लान?

कार्लसन के दावे के मुताबिक, संभावित परमाणु हमले का निशाना मध्य ईरान का पिकाक्स (Pickaxe) पर्वत हो सकता है। इजराइली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने इस पर्वत के अंदर 300 फीट गहराई में ग्रेनाइट की सुरंगें बनाकर अपना गुप्त न्यूक्लियर प्रोग्राम छिपा रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 300 फीट मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों को चीरकर ईरान के बंकरों को तबाह करने की क्षमता किसी भी पारंपरिक अमेरिकी हथियार में नहीं है। ऐसे में इन गुप्त सुरंगों को नष्ट करने का एकमात्र सैन्य विकल्प ‘परमाणु हथियार’ ही बचता है। ALSO READ: ब्राजील में ट्रंप समर्थित बोल्सोनारो की हार US मिडटर्म चुनाव में कितना बड़ा झटका? भारत पर क्या पड़ेगा असर, समझें पूरा गणित

7 नवंबर को हो सकता है अंतिम फैसला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख ब्रैड कूपर, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने ईरान पर हमले के कई सैन्य विकल्प पेश किए हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ भी इस रणनीति में नेतन्याहू के रुख का समर्थन कर रहे हैं।

 

हालांकि, व्हाइट हाउस के भीतर इस पर दो राय हैं। डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल इस चरम कदम को उठाने से संकोच कर रहे हैं। वे अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की बात सुन रहे हैं, जिनका मानना है कि ईरान के साथ बातचीत के जरिए समझौता किया जा सकता है। कार्लसन के अनुसार, ट्रंप 7 नवंबर तक यह बड़ा फैसला ले सकते हैं कि ईरान के खिलाफ परमाणु विकल्प का इस्तेमाल किया जाए या नहीं।

भारत-पाकिस्तान पर भी असर!

टकर कार्लसन ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला करता है, तो यह आधुनिक इतिहास में अपनी तरह की पहली खौफनाक मिसाल होगी। रूसी अधिकारियों ने कथित तौर पर संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका परमाणु हथियार चलाता है, तो रूस को भी यूक्रेन पर ऐसे ही हमले की खुली छूट मिल जाएगी। ALSO READ: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोले- ईरान के साथ नहीं चल रही बातचीत, जल्द होने वाला है कुछ बड़ा

 

कार्लसन ने कहा कि अमेरिका के इस कदम के बाद भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया (सोल) जैसे देश भी अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु विकल्पों पर विचार करने को मजबूर होंगे। यह स्थिति सीधे तौर पर ‘तीसरे विश्व युद्ध’ (World War 3) की शुरुआत होगी, जो बहुत छोटा लेकिन दुनिया के लिए अंतिम साबित हो सकता है।

अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन से इसका संबंध?

इसका सीधा और गहरा संबंध अमेरिका की आंतरिक राजनीति और मिडटर्म इलेक्शंस से जोड़ा जा सकता है। अमेरिकी इतिहास में यह देखा गया है कि जब भी किसी राष्ट्रपति की घरेलू नीतियां या मिडटर्म चुनावों की राह कठिन होती है, तो वे विदेश नीति में एक “वॉर प्रेसिडेंट” (War President) की छवि बनाकर देश को अपने पीछे लामबंद करने की कोशिश करता है। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि यह खबर 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन से ठीक पहले आई है। 

 

अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के बड़े डोनर्स और प्रभावशाली इजराइल समर्थित लॉबी का समर्थन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। नेतन्याहू को खुश रखना और ईरान के प्रति सख्त रवैया अपनाना डोनाल्ड ट्रंप के लिए अपनी पार्टी के कोर वोटर और फंडर्स को एकजुट रखने का जरिया बन सकता है।

उपराष्ट्रपति वेंस नहीं चाहते जंग

हालांकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का युद्ध से बचने और समझौते पर जोर देना यह दिखाता है कि प्रशासन का एक धड़ा जानता है कि विनाशकारी युद्ध में उलझना अमेरिकी मतदाताओं को नाराज भी कर सकता है। हालांकि अमेरिकी सेना या इजराइल सरकार की ओर से ईरान पर परमाणु हमले या अगली सैन्य कार्रवाई को लेकर आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसमें भी कोई संदेह नहीं कि मिडटर्म इलेक्शन (3 नवंबर, 2026) के बाद ट्रंप कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं।