महादेव ऐप केस में बड़ा एक्शन, मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाई CBI, क्या है महादेव सट्टेबाजी कांड?

महादेव ऐप केस में बड़ा एक्शन, मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाई CBI, क्या है महादेव सट्टेबाजी कांड?

Saurabh Chandrakar

महादेव एप सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े एक मामले में सीबीआई और अन्य जांच एजेंसी को बड़ी सफलता मिली है। मुख्य आरोपी और ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यार्पित किया गया है। बता दें कि महादेव ऐप के अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाया गया है। ओमान से उसे प्रत्यार्पित किया गया। यह बड़ी सफलता सीबीआई समेत अन्य जांच एजेंसी को मिली है।

इंटरपोल की तरफ से जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर को हिरासत में लिया था। उस पर सीबीआई और ईडी के एक मामले में तलाश थी। उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वहीं ईडी के मामले में अभियोजन शिकायत दर्ज की जा चुकी है।

क्‍या खुलासा हुआ सीबीआई जांच में : बता दें कि सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक भारत की सबसे बड़ी कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट्स में एक था। यह पूरे देश में फ्रेंचाइजी पैनलों और ब्रांच का एक नेटवर्क था, जिसके जरिए संचालित होता था। इस मामले को छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई की टीम ने हाथ में लिया था। जांच में यह भी पता चला है कि इसे भारत से रेगुलेट किया जा रहा था।

सट्टेबाजी के खेल में शामिल था शामिल सिंडिकेट : यह सिंडिकेट कथित तौर पर क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों और अन्य अवैध सट्टेबाजी का गोरखधंधा चला रहा था। इससे होने वाली कमाई को म्यूल बैंक अकाउंट, कई लेन-देन और हवाला चैनलों के जरिए इधर, उधर किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस कमाई का हिस्सा कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों को प्रोटेक्शन मनी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

चंद्राकर को भारत लाई सीबीआई : ओमान की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की एक टीम मस्कट गई थी, जो चंद्राकर को भारत वापस ले आई है। उसका मेडिकल चेकअप कराया जाएगा और फिर ट्रांजिट रिमांड पर लेने के बाद उसे रायपुर ले जाया जाएगा।

क्या है महादेव ऐप सट्टेबाजी मामला?
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर CBI ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था। इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था। ये पैनल लोगों को अपने साथ जोड़ते थे और उनसे सट्टे की रकम जमा कराते थे।

हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम : CBI की जांच में पता चला कि अवैध सट्टेबाजी से हासिल रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था। कई स्तरों पर लेनदेन के बाद इस पैसे को हवाला नेटवर्क के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस अवैध कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि देने में भी इस्तेमाल किया गया, ताकि सट्टेबाजी का नेटवर्क बिना किसी बाधा के चलता रहे।

CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं के अलावा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। सौरभ चंद्राकर को इन आरोपपत्रों में प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया है। वहीं, ED भारत और विदेशों में उसकी कई संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।

मेडिकल जांच के बाद रायपुर ले जाएगी CBI : भारत पहुंचने के बाद सौरभ चंद्राकर की मेडिकल जांच कराई जाएगी। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड हासिल कर उसे रायपुर ले जाया जाएगा। CBI के अनुसार, उसे कल रायपुर में CBI के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया जाएगा। CBI ने इस प्रत्यर्पण में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है। एजेंसी ने इसे विदेशों से संचालित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ भारत की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।