
US Midterm Elections 2026: अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भूमिका लगातार निर्णायक होती जा रही है। मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले सामने आए ‘इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड्स सर्वे’ (IAAS) ने रिपब्लिकन पार्टी और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता बढ़ा दी है। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और यूगोव के संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार, करीब 62 फीसदी भारतीय-अमेरिकी मतदाता प्रतिनिधि सभा और सीनेट चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों को वोट देने की योजना बना रहे हैं।
यह आंकड़ा डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और नेतृत्व से भारतीय समुदाय के बढ़ते मोहभंग को साफ दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि आज (3 नवंबर, 2026) को अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के लिए वोटिंग हो रही है। ईरान के साथ जंग में उलझे ट्रंप हर हाल में इस चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं। यदि वे चुनाव हार जाते हैं तो उनके पास बहुमत नहीं रहेगा और सत्ता पर उनकी पकड़ ढीली पड़ जाएगी। हालांकि इसका सकारात्मक पक्ष यह होगा कि चुनावी हार से उनकी मनमानी पर भी रोक लग जाएगी।
अमेरिका में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों पर हो रहे मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) देश की भावी राजनीतिक दिशा तय करने वाले हैं। इन चुनावों में प्रवासी भारतीय मतदाताओं का झुकाव एक बार फिर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर मजबूती से देखने को मिल रहा है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान फर्म ‘यूगोव’ (YouGov) द्वारा कराए गए प्रतिष्ठित ‘इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड्स सर्वे’ (IAAS) के नए आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
डेमोक्रेट्स को मिली 43 फीसदी अंक की बढ़त
सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक, मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार रिपब्लिकन उम्मीदवारों से कुल 43 प्रतिशत अंक आगे चल रहे हैं। 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी नागरिकों ने बताया कि वे डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने जा रहे हैं, जबकि महज 19 प्रतिशत मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन किया है। सीनेट की सीटों के लिए भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को भारतीय-अमेरिकी समुदाय का जोरदार समर्थन हासिल है।
ट्रंप से क्यों मोहभंग?
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय-अमेरिकी मतदाता पारंपरिक रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आव्रजन (Immigration) नीतियों और नागरिक अधिकारों के मुद्दों पर डेमोक्रेटिक पार्टी के रुख को अधिक व्यावहारिक मानते हैं। सर्वे के निष्कर्षों में कहा गया है कि यह रुझान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकताओं और उनकी आक्रामक शैली से भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक बड़े वर्ग के दूर होने का संकेत है। आव्रजन नीतियों में अनिश्चितता, वीजा नियमों पर कड़ा रुख और सामाजिक ध्रुवीकरण ऐसे प्रमुख कारक रहे हैं, जिन्होंने भारतीय मूल के मतदाताओं को रिपब्लिकन पार्टी के प्रति आशंकित किया है।
परिणाम का क्या होगा ट्रंप पर असर?
ऐतिहासिक रुझानों, मौजूदा पोलिंग डेटा और पूर्वानुमान मॉडलों (Decision Desk HQ / Nate Silver) के विश्लेषण के अनुसार, 2026 के मध्यावधि चुनाव में संसद के दोनों सदनों में सत्ता संतुलन बदलने के मजबूत संकेत हैं। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत पाने की अत्यधिक संभावना (80%+ संभावना) है। दरअसल, अमेरिकी राजनीति में यह एक ऐतिहासिक पैटर्न रहा है कि सत्तारूढ़ पार्टी को मध्यावधि चुनाव में निचले सदन (House) में सीटें गंवानी पड़ती हैं। ट्रंप प्रशासन की आंतरिक नीतियों, अर्थव्यवस्था और भारतीय-अमेरिकियों जैसे प्रमुख जनसांख्यिकीय समूहों के डेमोक्रेट्स की ओर झुकने के कारण प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी आसानी से 218 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है।
हालांकि सीनेट में बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल सकता है। सीनेट का गणित राज्यों के भूगोल पर निर्भर करता है। कई प्रमुख बैटलग्राउंड राज्यों (जैसे जॉर्जिया, मिशिगन, ओहायो और टेक्सस) में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच मुकाबला काफी तगड़ा है। हालांकि, भारतीय-अमेरिकी और स्वतंत्र मतदाताओं का डेमोक्रेट्स की तरफ रुझान कई कड़े मुकाबलों वाली सीटों को डेमोक्रेट्स के पक्ष में मोड़ सकता है।
यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा पर अपना नियंत्रण बना लेती है या दोनों सदनों को जीत लेती है, तो डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के शेष दो वर्षों में उनके विधायी एजेंडे, बजट प्रस्तावों और प्रशासनिक नीतियों पर बड़ा अंकुश लग जाएगा। कांग्रेस की जांच समितियां सक्रिय हो जाएंगी, जिससे ट्रंप प्रशासन की राह आसान नहीं रहेगी। यदि ट्रंप की पार्टी को हार मिलती है तो ईरान युद्ध को लेकर भी उन्हें अपनी नीतियां बदलनी पड़ सकती हैं।


