Twisha Sharma Death Case: CBI की 636 पन्नों की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, रिटायर्ड जिला जज और बेटे को बनाया आरोपी

Twisha Sharma Death Case: CBI की 636 पन्नों की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, रिटायर्ड जिला जज और बेटे को बनाया आरोपी

twisha sharma

भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को 636 पन्नों की चार्ज शीट दाखिल कर दी। इस मामले में जांच एजेंसी ने रिटायर्ड जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया है। दोनों के खिलाफ बीएनएस और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

 

सीबीआई ने भोपाल जिला अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शोभना भलावे की अदालत में चालान पेश कर दिया। चालान में दर्ज तथ्यों और जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों व साक्ष्यों का अदालत अध्ययन कर रही है। वहीं, दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने भी चालान की प्रतियां और उसमें शामिल साक्ष्यों का परीक्षण शुरू कर दिया है। अब इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी।

 

रिटायर्ड जज और बेटे को बनाया आरोपी

जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने अब अदालत में चालान पेश किया है। इसमें पूर्व जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 85 और 108 के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत आरोप लगाए गए हैं। इन धाराओं के तहत दहेज से जुड़े अपराध, महिला के साथ क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित आरोपों की न्यायिक जांच होगी।

कौन थीं ट्विशा शर्मा?

मॉडल और पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली थीं। वह पढ़ाई-लिखाई में अच्छी होने के साथ-साथ ग्लैमर और क्रिएटिव फील्ड में भी काफी रुचि रखती थीं। 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए ट्विशा शर्मा की मुलाकात भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और बाद में परिवार की सहमति से दिसंबर 2025 में शादी हुई।

 

12 मई को फंदे पर मिली थी ट्विशा की लाश

12 मई को ट्विशा शर्मा की लाश फंदे पर मिली थी। घटना के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठे और पुलिस ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर मामला आगे बढ़ा। बाद में जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को मिली। सीबीआई ने मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज करने के साथ दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य जुटाए और उनकी कड़ियों को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।