Video: भारतीयों की सेविंग्स की आदत के पीछे क्या है असली वजह, यूरोप में 10 साल रहे शख्स ने बताए 4 बड़े कारण

भारत में बचत करना सिर्फ एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि जिंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है। ज्यादातर परिवार बचपन से ही बच्चों को पैसे संभालकर खर्च करने और भविष्य के लिए बचत करने की सीख देते हैं। नौकरी लगने के बाद भी लोगों की पहली प्राथमिकता अक्सर सेविंग्स बढ़ाना और आने वाले समय के लिए आर्थिक सुरक्षा तैयार करना होती है। वहीं, यूरोप के कई देशों में रहने वाले लोगों की जीवनशैली इससे काफी अलग नजर आती है। वहां लोग भविष्य की चिंता के बजाय वर्तमान में खुलकर खर्च करते हुए दिखाई देते हैं।

आखिर दोनों जगहों की सोच में इतना बड़ा अंतर क्यों है? क्या इसकी वजह सिर्फ लोगों की मानसिकता है या इसके पीछे कोई और कारण भी छिपा है? इसी सवाल का जवाब यूरोप में लंबे समय से रह रहे एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने अपने अनुभव के आधार पर दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है।

  1. इलाज का खर्च सबसे बड़ी चिंता

मुकुल के मुताबिक, यूरोप में लोग टैक्स और सोशल सिक्योरिटी के जरिए हेल्थकेयर का लाभ लेते हैं। किसी बड़ी मेडिकल इमरजेंसी में उन्हें इलाज के खर्च की ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ती।

वहीं भारत में कई परिवारों को अस्पताल का खर्च खुद उठाना पड़ता है। यही वजह है कि लोग मेडिकल इमरजेंसी के लिए पहले से पैसे बचाकर रखते हैं।

  1. बच्चों की पढ़ाई पर होता है भारी खर्च

उन्होंने बताया कि यूरोप के कई देशों में सरकारी स्कूलों में अच्छी और मुफ्त या बेहद कम खर्च वाली शिक्षा मिल जाती है। जहां भारत में बड़ी संख्या में माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं, जहां फीस और दूसरे खर्च काफी ज्यादा होते हैं। इसलिए बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले से बचत करना जरूरी माना जाता है।

  1. रिटायरमेंट के लिए खुद बनाना पड़ता है सहारा

मुकुल का कहना है कि यूरोप में सोशल सिक्योरिटी और पेंशन जैसी सुविधाएं लोगों को भविष्य को लेकर कुछ राहत देती हैं।

जबकि भारत में अधिकतर लोग अपनी रिटायरमेंट के लिए खुद ही पैसा जोड़ते हैं। नौकरी के दौरान लगातार बचत करने की यही एक बड़ी वजह है।

  1. शादियों पर होता है लाखों का खर्च

उन्होंने ये भी कहा कि भारत में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि बड़ा पारिवारिक आयोजन होती है। कई परिवार शादी पर अपनी सालों की बचत खर्च कर देते हैं।

यूरोप में आमतौर पर शादियां काफी सादगी से होती हैं, इसलिए वहां लोगों पर ऐसा आर्थिक दबाव कम होता है।

लोगों ने क्या कहा?

वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इस पर लोगों ने अलग-अलग राय दी।

एक यूजर ने लिखा, “आपकी बातें हमेशा जानकारी बढ़ाने वाली होती हैं।”

दूसरे यूजर ने कहा, “भारत में सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि माता-पिता और पूरे परिवार की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। खासकर 90 के दशक की पीढ़ी पर ये दबाव ज्यादा है।”

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “आपके सभी पॉइंट सही हैं।”

वहीं एक यूजर का कहना था कि भारत की बड़ी आबादी भी इसकी एक अहम वजह है, क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या को सभी तरह की सरकारी सुविधाएं देना आसान नहीं है।

बचत की आदत के पीछे सिर्फ सोच नहीं, व्यवस्था भी

मुकुल आनंद का मानना है कि भारत और यूरोप के लोगों की बचत की आदत में सबसे बड़ा फर्क उनके देश की व्यवस्था से आता है। जहां यूरोप में कई जरूरी खर्चों का बोझ सरकार और सोशल सिक्योरिटी सिस्टम संभाल लेते हैं, वहीं भारत में लोगों को अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए खुद पहले से आर्थिक तैयारी करनी पड़ती है।

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Cockroaches removal tips: मानसून में कॉकरोच का आतंक खत्म करेंगे ये 5 घरेलू उपाय, किचन रहेगा साफ

बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक तो लाता है, लेकिन नमी बढ़ते ही घरों में कॉकरोच और दूसरे कीड़े-मकौड़ों की परेशानी भी बढ़ जाती है। खासकर किचन में इनका दिखना चिंता की वजह बन जाता है, क्योंकि ये खाने-पीने की चीजों को दूषित कर सकते हैं। ऐसे में हर बार केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। घर में मौजूद कुछ आसान चीजों की मदद से भी कॉकरोच को दूर रखा जा सकता है। अगर आप भी मानसून में इस समस्या से परेशान हैं, तो कुछ सरल घरेलू उपाय अपनाकर किचन को साफ-सुथरा और कॉकरोच मुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं कॉकरोच?

मानसून के दौरान नालियों, सीलन और नमी की वजह से कॉकरोच तेजी से घरों में घुसने लगते हैं। खासकर किचन में खाना और पानी आसानी से मिलने के कारण ये सबसे ज्यादा वहीं दिखाई देते हैं।

आटा और बोरिक पाउडर का आसान उपाय

एक कटोरी आटे में 2 चम्मच चीनी, 1 चम्मच हल्दी और 2 चम्मच बोरिक पाउडर मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे किचन के कोनों, स्लैब के किनारों, दीवारों की दरारों और उन जगहों पर लगाएं, जहां से कॉकरोच आते हैं। इसकी गंध और मिश्रण कॉकरोच को दूर रखने में मदद कर सकता है।

नीम का स्प्रे करेगा कमाल

नीम का तेल या नीम का पानी एक स्प्रे बोतल में भर लें और किचन समेत घर के कोनों में छिड़काव करें। नीम की तेज खुशबू और प्राकृतिक गुण कॉकरोच के साथ कई दूसरे कीड़ों को भी दूर रखने में मदद करते हैं।

तेजपत्ता भी है असरदार

कुछ तेजपत्तों को पीसकर गर्म पानी में मिला लें। इस मिश्रण को ठंडा होने के बाद घर के उन हिस्सों में स्प्रे करें, जहां कॉकरोच ज्यादा नजर आते हैं। तेजपत्ते की महक इन्हें दूर रखने का प्राकृतिक तरीका मानी जाती है।

लौंग की खुशबू से भागेंगे कॉकरोच

लौंग को हल्का पीसकर किचन और घर के कोनों में छिड़क दें। इसकी तेज सुगंध कॉकरोच को पसंद नहीं होती, इसलिए वे इन जगहों से दूर रहने लगते हैं। इससे अन्य छोटे कीड़े-मकौड़ों की समस्या भी कम हो सकती है।

साफ-सफाई है सबसे बड़ा बचाव

अगर आप चाहते हैं कि कॉकरोच बार-बार घर में न आएं, तो किचन को हमेशा साफ रखें। रातभर जूठे बर्तन सिंक में न छोड़ें, खाने की चीजों को ढककर रखें और डस्टबिन को नियमित रूप से खाली व साफ करें। छोटी-छोटी सफाई की आदतें कॉकरोच की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

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