SEBI की बड़ी योजना, इन 7 प्रस्तावों से बदल जाएगा शेयर मार्केट!

मार्केट रेगुलेटर SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) शेयर बाजार में धोखाधड़ी रोकने, स्टॉक ब्रोकरों पर निगरानी बढ़ाने और निवेशकों के लिए निवेश की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए नए नियमों पर काम कर रहा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडेय ने शनिवार को कहा कि ट्रेडिंग टर्मिनल्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक फ्रेमवर्क पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्टॉकब्रोकर्स के साइज, क्लाइंट एक्सपोजर और टेक्नोलॉजी पर निर्भरता के आधार पर उनके लिए अलग-अलग स्तर की कंप्लॉयंस जरूरतों पर भी विचार हो रहा है। उन्होंने ये बातें ANMI (एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंजेज मेंबर्स ऑफ इंडिया) के 16वें इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कंवेंशन को संबोधित करते हुए कही।

सेबी का यह प्रस्तावित फ्रेमवर्क ऐसे समय में आया है, जब प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग टर्मिनल्स के गलत इस्तेमाल की बात सामने आ रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ब्रोकिंग फर्म्स अपने अकाउंट्स के जरिए इंडिविजुअल ट्रे़डर्स को ट्रेडिंग करने की सुविधा देते थे और इसके बदले में फीस लेते थे या मुनाफा साझा करते थे। इसमें मार्जिन और डिस्क्लोजर्स पर नियामकीय जरूरतों को दरकिनार किया जाता था।

किन प्रस्तावों पर SEBI कर रहा विचार

सेबी जिन प्रस्तावों पर विचार कर रहा है, उनमें तो एक ट्रेडिंग टर्मिनलों को उनके मीडिया एक्सेस कंट्रोल (MAC) एड्रेस और स्टैटिक IP एड्रेस से जोड़ना है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ट्रेड कहां से किए जा रहे हैं और ट्रेडिंग टर्मिनलों का इस्तेमाल कौन कर रहा है।

सेबी बाजार में लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी के लिए शॉर्ट सेलिंग और SLB (सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग) से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रहा है।

कॉरपोरेट बॉन्ड की सेकेंडरी मार्केट में ट्रेडिंग बढ़ाने के लिए मार्केट मेकिंग का ढांचा तैयार किया जा रहा है। सेबी के डीमैट 2.0 अभियान के अगले चरण में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड की सेकेंडरी मार्केट में ट्रेडिंग की योजना भी शामिल है।

टेंडर ऑफर, शेयर बायबैक और ऑफर फॉर सेल (OFS) से जुड़ी कंप्लॉयंस कॉस्ट कम करने के लिए भी काम किया जा रहा है।

कॉमन रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म का विस्तार डिपॉजिटरी तक किया जाएगा। इससे एक ही बार जानकारी देने पर वह स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरी, दोनों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।

ऑटोमेटेड गिव-अप और टेक-अप फैसिलिटी का विस्तार कैश सेगमेंट में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) जैसे कस्टोडियल क्लाइंट्स तक बढ़ाने की योजना है। इससे कस्टोडियन से कंफर्मेशन का इंतजार करते समय क्लाइंट्स के फंड गैर-जरूरी रूप से ब्लॉक रहने की दिक्कत कम हो सकती है।

एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सैंडबॉक्स पर विचार हो रहा है, जहां नए टूल्स को सुरक्षित तरीके से टेस्ट किया जा सकेगा।

एनआरआई समेत ग्लोबल इंवेस्टर्स के लिए भारतीय बाज़ारों में निवेश करना आसान बनाने पर काम हो रहा है। इसके लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग, आसान केवाईसी प्रोसेस और कम कागजी कार्रवाई जैसे कदम उठाए जाएंगे, साथ ही जरूरी सुरक्षा उपाय भी बरकरार रखे जाएंगे।

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