
देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण और त्योहारों के बीच संतुलन बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक स्पष्ट टिप्पणी की है। अदालत ने बुधवार को साफ किया कि उसका इरादा पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का नहीं है। हालांकि शीर्ष अदालत पटाखे जलाने की पूरी छूटी देने के पक्ष में भी नहीं है। ALSO READ: मोदी कैबिनेट के 3 बड़े फैसले: किसानों के लिए MSP में बढ़ोतरी, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और दिल्ली के लिए स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम को मंजूरी
कोर्ट ने कहा कि दिवाली का त्योहार लोगों की गहरी आस्था और भावनाओं से जुड़ा हुआ है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों को 24 घंटे पटाखे जलाने की खुली छूट नहीं दी जा सकती, क्योंकि लगातार होने वाली आतिशबाजी से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
संतुलन बनाने की कोशिश में अदालत
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि अदालत एक ऐसा व्यावहारिक समाधान तलाश रही है, जिसमें त्योहार का उल्लास भी बना रहे और पर्यावरण व स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं का भी खयाल रखा जाए। इसके तहत अदालत पटाखों के प्रकार और उन्हें चलाने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने पर विचार कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 15 अक्टूबर को होगी। ALSO READ: चुनाव आयोग का यू-टर्न: विरोध के बाद फॉर्म 6 से हटाई गई SIR की अनिवार्य घोषणा
CPCB को 15 अक्टूबर तक का समय?
यह मामला साल 2015 से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, जिसके तहत दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में अक्टूबर से जनवरी के बीच प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्देश दिए जाते रहे हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि बेरियम आधारित पटाखों के आउटडोर परीक्षण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
इस पर अदालत ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दे दिया है। रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट यह भी तय कर सकता है कि किन खास प्रकार के पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी जानी चाहिए।


