
भले भारतीय जनता पार्टी ने 28 में से 14 सीटें जीतीं और एनडीए को कुल 16 सीटें मिल गईं लेकिन इस चुनाव की एक खास बात यह रही कि भाजपा के लिए प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण सीटों पर विपक्षी पार्टियों ने कब्जा कर लिया। यह 2024 के लोकसभा चुनाव की तरह हो गया, जब समाजवादी पार्टी ने फैजाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा को हरा दिया था। यह अयोध्या की सीट है और वहां श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का उद्घाटन करके भाजपा चुनाव में गई थी। तभी वहां से जीते अवधेश प्रसाद को ट्रॉफी की तरह लेकर सपा और कांग्रेस के नेता घूम रहे थे। उसी तरह इस बार चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों में हुआ है।
भाजपा उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में दोनों सीटें हार गईं। हालांकि पिछली बार भी ये दोनों सीटें भाजपा हारी थी लेकिन इस बार की तरह आमने सामने का चुनाव नहीं था। वाराणसी शिक्षक और वाराणसी स्नातक दोनों सीटों पर सपा जीती है। लाल बिहारी यादव और आशुतोष सिन्हा ने जीत हासिल की है। प्रयागराज की सीट भी भाजपा हार गई है। आगरा की एक सीट भी वह हारी है, जिसमें मथुरा का इलाका आता है। लखनऊ स्नातक की सीट भी भाजपा हारी है।
ऐसे ही महाराष्ट्र की नागपुर सीट भारतीय जनता पार्टी हार गई है। सोचें, नागपुर में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का मुख्यालय है और भाजपा के दिग्गज नेता नितिन गडकरी वहां से सांसद हैं। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी नागपुर से आते हैं। वह इकलौती सीट है, जो कांग्रेस जीती है। इसका अलग महत्व हो गया है। इसी तरह बिहार की पटना शिक्षक सीट भाजपा हार गई है। पिछले 30 साल से भाजपा यह सीट जीत रही थी। यह नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि भाजपा को समर्थक मतदाताओं की बहुलता वाली इस सीट पर राजद ने भाजपा को हराया है।
इन सभी सीटों का प्रतीकात्मक महत्व कई कारणों से है। ये भाजपा का गढ़ हैं, ये स्थान धार्मिक आस्था से जुड़े हैं और साथ ही सभी बड़े नेताओं का कनेक्शन इन सीटों से है। वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का क्षेत्र है तो लखनऊ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। नागपुर नितिन ग़डकरी का क्षेत्र है तो पटना भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का क्षेत्र है। हाल ही में नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर भी भाजपा हार गई थी। उसके जख्म अभी भरे नहीं थे कि राजद ने पटना शिक्षक सीट पर हरा दिया।

