
कहने को भारतीय जनता पार्टी बम बम है। चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव में भाजपा ने अकेले 13 सीटें जीती हैं। पर क्या उसने पिछली बार के मुकाबले अतिरिक्त सीटें जीती हैं? इस पैमाने पर देखें तो भाजपा को असल में जो हासिल है वह सिर्फ महाराष्ट्र की एक सीट का है। बाकी सीटें पहले से उसके पास ही थी। उत्तर प्रदेश में 2022 के चुनाव में भी भाजपा ने छह सीटें जीती थीं और इस बार छह सीट उसे मिली हैं। उलटा इस बार समाजवादी पार्टी को दो सीटों का फायदा हुआ है। पिछली बार सपा सिर्फ तीन सीटों पर जीती थी और दो सीटें निर्दलीय जीते थे। इस बार कोई निर्दलीय नहीं जीता। आमने सामने के मुकाबले में सपा ने भाजपा को लगभग बराबरी की टक्कर दी और पांच सीटें जीतीं।
ऐसे ही बिहार में पिछली बार भाजपा दो सीटें जीती थीं। इस बार उसे तीन सीट मिली है। सो, कह सकते हैं कि एक सीट का फायदा हुआ है। लेकिन यहां भी एक पेंच है। इस बार चुनाव से ठीक पहले एक निर्दलीय विधान पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे और वे भाजपा की टिकट से लड़े। इस तरह भाजपा तीन एमएलसी के साथ चुनाव में गई और उसे तीन सीटें मिलीं। उसने निर्दलीय एमएलसी वाली सीट जीत ली लेकिन 30 साल से जिस पटना स्नातक सीट से जीत रही थी वह सीट हार गई। इस तरह हिसाब बराबर हो गया। उसकी सहयोगी जनता दल यू के पास पिछली बार भी एक सीट थी और वह अपनी एक सीट बचाने में कामयाब रही। बाकी तीन सीटों पर वह हार गई। सो, बिहार में भी बराबरी का नतीजा रहा। एनडीए आठ सीटों में से चार सीटों पर जीता और चार सीटों पर हार गया।
कर्नाटक में भाजपा के पास पहले से तीन सीटें थीं और अपनी तीनों सीटें उसने बचा ली। इसलिए वहां लाभ हानि कुछ नहीं है। हां, भाजपा की सहयोगी जनता दल सेकुलर को एक सीट का फायदा हुआ। बेंगलुरू शिक्षक सीट पर पिछले पांच चुनाव से जीत रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता पुट्टन्ना को जनता दल सेकुलर के एपी रंगनाथ ने हरा दिया। यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका रहा। सो, उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक में भाजपा यथास्थिति बनाए रखने में कामयाब हुई। हालांकि यह भी एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि देश में विपक्ष उसके खिलाफ माहौल बनाए हुए और राहुल गांधी रोज दावा कर रहे हैं कि अब नरेंद्र मोदी के जाने का समय आ गया। बहरहाल, भाजपा को दो सीटों का फायदा महाराष्ट्र में हुआ है। वहां पिछली बार सभी पांच सीटों पर भाजपा उसकी सहयोगी पार्टियों की हार हुई थी। इस बार भाजपा को एक सीट मिली है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिव सेना भी एक सीट जीतने में कामयाब रही है। सो, कह सकते हैं कि 28 सीटों के चुनाव में भाजपा का शुद्ध मुनाफा महाराष्ट्र की एक सीट का है और उसकी सहयोगियों का शुद्ध मुनाफा दो सीट का है, एक महाराष्ट्र में और एक कर्नाटक में। इस तरह एनडीए का कुल फायदा तीन सीट का है।

