क्या UGC नियमों को लेकर बैकफुट पर आई सरकार? जानिए सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र ने क्या कहा

क्या UGC नियमों को लेकर बैकफुट पर आई सरकार? जानिए सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र ने क्या कहा

Supreme Court UGC Rules Review

Supreme Court UGC Rules Review: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित ‘इक्विटी रेगुलेशंस’ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations) पर देशभर में हो रहे विरोध और सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद केंद्र सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि वह इन नियमों पर पुनर्विचार कर रही है। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि छात्रों के सभी वर्गों की आशंकाओं को दूर करने के लिए एक विशेष समीक्षा समिति का गठन किया जा रहा है।

 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने केंद्र सरकार और यूजीसी का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार इन नियमों पर फिर से विचार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह नियमों को जबरन लागू करने के पक्ष में नहीं है और सभी हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए नियमों की व्यापक समीक्षा करने जा रही है। ALSO READ: दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन, आरक्षण और UGC नियमों के विरोध में उतरे हजारों लोग

अदालत में प्रस्तुत मुख्य बिंदु

  • समीक्षा समिति का गठन : नियमों की भाषा, प्रावधानों और उनके संभावित प्रभाव की बारीकी से जांच करने के लिए एक विशेषज्ञ समीक्षा समिति गठित की जा रही है।
  • छात्रों की आशंकाओं का समाधान : नए नियमों से सामान्य वर्ग और अन्य छात्रों के बीच उत्पन्न हुई असुरक्षा व असंतोष की भावना को समाप्त करने के प्रयास किए जाएंगे।
  • संतुलित नीति का आश्वासन : सरकार का उद्देश्य ऐसा माहौल बनाना है जहां किसी भी छात्र के साथ भेदभाव न हो और न ही नियमों का गलत इस्तेमाल हो।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि शिक्षण संस्थानों में ऐसी नीतियां लागू की जानी चाहिए जो समाज को जोड़ने का काम करें, न कि उसे विभाजित करें। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन नियमों के अमल पर अंतरिम रोक लगा रखी थी। अदालत ने केंद्र सरकार के बयान को दर्ज करते हुए मामले की अगली सुनवाई को चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है, ताकि सरकार अपनी समीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ा सके।

क्या बैकफुट पर है केन्द्र सरकार?

विधिक और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार का यह कदम रणनीतिक सुधार है। शिक्षाविदों और छात्र संगठनों का तर्क था कि यूजीसी के नए ड्राफ्ट में झूठी शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधानों का अभाव था, जिससे परिसरों में जातिगत विभाजन और प्रशासनिक मनमानी बढ़ने का खतरा था।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहली नजर में नियमों को असंतुलित मानते हुए स्टे लगाए जाने के बाद सरकार के पास नियमों में संशोधन के अलावा विकल्प कम थे। दूसरी ओर, छात्रों और सामाजिक संगठनों के बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार ने जिद पर अड़ने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत समीक्षा का रास्ता चुना है ताकि एक न्यायसंगत और सर्वस्वीकार्य कानून बनाया जा सके।