कौन हैं वो जज, जिन्होंने अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी को दी क्लीन चिट?

कौन हैं वो जज, जिन्होंने अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी को दी क्लीन चिट?

shubham verma

सुल्तानपुर जि‍ला कोर्ट ने 2018 के अमित शाह मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया है। न्यायाधीश शुभम वर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विपक्ष के नेता के बयान मानहानिकारक नहीं थे। इस केस के बाद उन जज की चर्चा हो रही है, जिन्‍होंने राहुल को लेकर यह फैसला सुनाया, जानते हैं कौन हैं वो जज और क्‍यों हो रही है उनकी चर्चा।

सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दिए बयान मामले में कोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया है। उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर के जिला न्यायालय ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता को 2018 के मानहानि मामले में क्लीन चिट दी है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (विशेष मजिस्ट्रेट) शुभम वर्मा ने उत्तर प्रदेश के विशेष सांसद-विधायक न्यायालय में यह फैसला सुनाया और न्यायालय ने साफ कहा कि 2018 में राहुल गांधी द्वारा अमित शाह के बारे में दिए गए बयान मानहानिकारक प्रकृति के नहीं थे।

इस फैसले के सामने आते ही जहां कांग्रेस नेताओं ने न्यायालय पर भरोसा होने की बात कही, वहीं सोशल मीडिया पर लोग भी जज के बारे में जानने को उत्सुक दिखाई दिए, जिन्होंने यह फैसला सुनाया।

कौन हैं न्यायाधीश शुभम वर्मा: न्यायाधीश शुभम वर्मा अतिरिक्त सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) और अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हैं। वे सुल्तानपुर में विशेष सांसद-विधायक न्यायालय की अध्यक्षता करते हैं। वर्मा पहली बार 27 फरवरी 2015 को न्यायिक सेवा में नियुक्त किए गए थे, उसके बाद उन्हें प्रमोशन के बाद 7 जनवरी 2019 को सिविल जज/सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) और श्रेणी-1 अधिकारी का दर्जा मिला।

अपने करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सेवा की है। इनमें बस्ती, मऊ, गाजियाबाद और सुल्तानपुर शामिल हैं। फिलहाल वे सुल्तानपुर जिला न्यायालय में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (विशेष मजिस्ट्रेट) के पद पर तैनात हैं। शुभम वर्मा देवरिया जिले के मूल निवासी हैं और रविंद्र वर्मा के पुत्र हैं। उनकी सेवानिवृत्ति 31 जुलाई 2048 को निर्धारित है। हालांकि इसमें अभी 22 साल का समय है। न्यायाधीश वर्मा के पास कई पोस्टग्रेजुशन तक की डिग्रियां हैं। उन्होंने 2007 में बीए पास करने के बाद 2010 में एलएलबी की और 2021 में एलएलएम की डिग्री हासिल की। उन्होंने एलएलबी के बाद ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और जज के पद पर नियुक्त हुए। जबकि पोस्ट ग्रेजुएशन जज बनने के बाद किया है।

क्या था पूरा मामला : बता दें कि राहुल गांधी बनाम अमित शाह का ये मामला 2018 का है। स्थानीय भाजपा नेता और सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। मामला राहुल गांधी के उस भाषण से जुड़ा है जो उन्होंने 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले बेंगलुरु में चुनाव प्रचार के दौरान दिया था। उस भाषण में उन्होंने अमित शाह को सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले से जोड़ा था। जबकि अमित शाह को 2014 में ही विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले से बरी कर दिया था। मानहानि मुकदमे के दर्ज होने के बाद राहुल गांधी को 27 नवंबर 2023 को अदालत में पेश होने का समन जारी किया गया। इसके बाद वे अदालत में पेश हुए और जमानत हासिल की। हालांकि मुकदमे के दौरान राहुल गांधी ने आरोपों से इनकार किया। राहुल गांधी ने कहा कि यह शिकायत राजनीतिक द्वेष और बदले की भावना से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए दायर की गई थी।