झटका नहीं हलाल का तरीका!

यह बहुत दिलचस्प तुलना है। भाजपा के कई नेता इन शब्दों में बड़ी दिलचस्पी लेते हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तो अभियान चला रहे हैं कि हिंदुओं को झटका मीट ही खाना चाहिए। यह सबको पता है कि मुस्लिम समाज हलाल को लेकर कितना सजग रहता है। अब तो हर प्रोडक्ट के लिए हलाल सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जा रहा है। बहरहाल, इन शब्दों का इस्तेमाल यहां किसी उत्पाद के लिए नहीं हो रहा है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से जैसे एक एक करके मंत्रियों की विदाई हो रही है उस संदर्भ में किया जा रहा है। भाजपा के ही एक नेता ने इन शब्दों का जिक्र करते हुए अभी के हालात की तुलना सितंबर 2022 में नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए कैबिनेट फेरबदल से की। उस समय एक झटके में मोदी ने कई वरिष्ठ नेताओं को सरकार से बाहर कर दिया था।

गौरतलब है कि सितंबर 2022 में मोदी ने ऐसे ऐसे मंत्रियों को हटाया था, जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं रहा था। प्रकाश जावडेकर, रविशंकर प्रसाद, संतोष गंगवार, डॉक्टर हर्षवर्धन जैसे एक दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं को एक झटके में सरकार से हटा दिया गया था। भाजपा नेताओं का कहना था कि वह झटका प्रक्रिया थी। इस बार हलाल की प्रक्रिया से जगह खाली की जा रही है। एक एक करके मंत्री हटाए जा रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान हटाए गए तो पंजाब विधानसभा चुनाव के हवाले रवनीत सिंह बिट्टू हटाए गए। केरल में कांग्रेस की हार के बाद जॉर्ज कुरियन को हटाया गया। इसके बाद दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी व हर्ष मल्होत्रा को उत्तर प्रदेश व दिल्ली का अध्यक्ष बनाया गया। उनकी जगह खाली होगी। पीयूष गोयल कोषाध्यक्ष बनाए गए। बीएल वर्मा को राज्यसभा नहीं भेजा गया है। हो सकता है कि वे विधानसभा का चुनाव लड़ें। तो उनकी भी सीट खाली होगी। पहले से भी कई सीटें खाली हैं। इस समय सरकार में 12 सीटों की वैकेंसी है।