
भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर राफेल मरीन लड़ाकू विमान ने पहली ही कोशिश में सफल लैंडिंग की है। यह उपलब्धि गोवा में चल रहे परीक्षणों के दौरान 29 अक्टूबर 2026 को हासिल की गई। भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को इस सफल लैंडिंग का वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X पर साझा किया।
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नौसेना ने वीडियो के साथ लिखा कि राफेल मरीन विमान ने 29 अक्टूबर को स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर अपनी पहली कोशिश में सफल लैंडिंग की। ये परीक्षण भारतीय नौसेना में इस विमान को ऑपरेशनल करने की दिशा में शुरुआती कदम हैं।
इन परीक्षणों का उद्देश्य फ्रांस में बने राफेल मरीन विमानों को INS विक्रांत से संचालित करने के लिए जरूरी तकनीकी बदलावों की पुष्टि करना है। भारतीय नौसेना ने 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अनुबंध किया है। इनकी डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक होने की उम्मीद है।
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क्यों अहम है राफेल मरीन की यह सफल लैंडिंग?
राफेल मरीन की सफल लैंडिंग इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस विमान को मूल रूप से CATOBAR प्रणाली वाले विमानवाहक पोतों से संचालन के लिए डिजाइन किया गया था। वहीं, भारत का INS विक्रांत STOBAR प्रणाली का इस्तेमाल करता है।
CATOBAR यानी कैटापल्ट असिस्टेड टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी प्रणाली में विमान को कैटापल्ट की मदद से उड़ान भराई जाती है और लैंडिंग के दौरान अरेस्टर वायर की सहायता से रोका जाता है।
इसके उलट STOBAR यानी शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी प्रणाली में लड़ाकू विमान विमानवाहक पोत के आगे बने स्की-जंप रैंप की मदद से उड़ान भरते हैं। लैंडिंग के समय विमान के अरेस्टर हुक के जरिए डेक पर लगे तारों को पकड़कर उसे रोका जाता है। इसलिए INS विक्रांत पर राफेल मरीन का सफल परीक्षण यह सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है कि विमान भारतीय विमानवाहक पोत की तकनीकी व्यवस्था के अनुरूप काम कर सके।
A Rafale Marine aircraft successfully landed onboard #IndianNavy’s indigenous Aircraft Carrier #INSVikrant on its maiden attempt on 29 Oct 26. The ongoing trials mark the first steps towards operationalisation of the aircraft in the #IndianNavy. https://t.co/gIZ0h3nl80
— SpokespersonNavy (@indiannavy) October 30, 2026
क्या है राफेल मरीन फाइटर जेट की खासियत?
राफेल मरीन, जिसे राफेल M भी कहा जाता है, फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी Dassault Aviation ने फ्रांसीसी नौसेना के लिए विकसित किया है। यह दो इंजन वाला मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे विमानवाहक पोत से संचालित किया जा सकता है। यह विमान कई तरह के सैन्य अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इनमें हवाई सुरक्षा, निगरानी, दुश्मन के ठिकानों पर दूर से हमला और समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाना शामिल है।
राफेल मरीन में Safran के दो M88 इंजन लगे हैं। इसकी अधिकतम गति Mach 1.8 यानी करीब 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। विमान में विमानवाहक पोत पर उतरने के लिए अरेस्टर हुक के साथ आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी मौजूद हैं।
हथियारों की क्षमता: राफेल मरीन में Meteor और MICA एयर-टू-एयर मिसाइलें, SCALP क्रूज मिसाइल और AM39 Exocet एंटी-शिप मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं।


