Electric Scooter : पुरानी इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार खरीदने से पहले जरूर जांचें ये 6 चीजें, वरना लग सकता है बड़ा झटका

Electric Scooter : पुरानी इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार खरीदने से पहले जरूर जांचें ये 6 चीजें, वरना लग सकता है बड़ा झटका

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पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में नई इलेक्ट्रिक कार, बाइक या स्कूटर खरीदने के बजाय सेकंड हैंड EV खरीदना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे न केवल नई गाड़ी की शुरुआती कीमत का बोझ कम होता है, बल्कि पहले मालिक के इस्तेमाल के बाद वाहन की कीमत में आई गिरावट का फायदा भी खरीदार को मिल सकता है।

 

हालांकि, पुराना इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय जांच का तरीका पेट्रोल या डीजल वाहन से बिल्कुल अलग होता है। इसमें इंजन ऑयल, स्पार्क प्लग, क्लच प्लेट या इंजन की स्थिति देखने के बजाय बैटरी की सेहत, चार्जिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सॉफ्टवेयर पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। इलेक्ट्रिक वाहन में बैटरी सबसे महंगा हिस्सा होती है। इसलिए सेकंड हैंड EV खरीदने से पहले उसकी बैटरी की क्षमता, बची हुई वारंटी और वास्तविक ड्राइविंग रेंज की जांच करना जरूरी है। 

इसलिए पुराना EV खरीदते समय इन बातों की जांच जरूर करें:

– ऐप और ओनरशिप ट्रांसफर: पुराने मालिक से उसका अकाउंट वाहन से अनलिंक करवाएं और मोबाइल ऐप का एक्सेस अपने नाम पर ट्रांसफर कराएं।

– OTA अपडेट: वाहन के सॉफ्टवेयर में कोई लंबित अपडेट या एरर तो नहीं है, इसकी जांच करें।

– डिजिटल फीचर्स: रिमोट लॉक-अनलॉक, बैटरी स्टेटस, लोकेशन और अन्य कनेक्टेड सुविधाएं ठीक से काम कर रही हैं या नहीं, यह भी देखें।

सेकंड हैंड इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले चेकलिस्ट

वाहन का प्रकार किन चीजों की जांच जरूरी खरीदने से पहले क्या देखें

इलेक्ट्रिक कार बैटरी SOH, चार्जिंग पोर्ट, ब्रेक डिस्क अच्छी बैटरी हेल्थ, साफ RC और सही ब्रेक

इलेक्ट्रिक बाइक बेल्ट या चेन ड्राइव, BMS, चार्जिंग पोर्ट स्मूद पावर डिलीवरी और बची हुई वारंटी

इलेक्ट्रिक स्कूटर ऐप में SOH, ओरिजिनल चार्जर, बैटरी सही चार्जर और बैटरी में सूजन या नुकसान न हो। 

आइए जानते हैं पुरानी इलेक्ट्रिक कार, बाइक या स्कूटर खरीदने से पहले किन 6 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

 

 

सेकंड हैंड EV खरीदते समय केवल कम कीमत देखकर फैसला न करें। वाहन की बैटरी की जांच अधिकृत सर्विस सेंटर से करवाएं और उसकी लिखित रिपोर्ट लें। टेस्ट ड्राइव के दौरान रेंज, ब्रेक, सस्पेंशन और चार्जिंग की जांच करें।

1. सबसे पहले जांचें बैटरी की सेहत (Battery State of Health)

किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन का सबसे महंगा हिस्सा उसकी ट्रैक्शन बैटरी होती है। इसकी कीमत वाहन की कुल कीमत का लगभग 30 से 50 फीसदी तक हो सकती है। समय के साथ लिथियम-आयन बैटरी की क्षमता कम होती जाती है, जिससे एक बार चार्ज करने पर मिलने वाली रेंज भी घट सकती है। इसलिए सेकंड हैंड इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले उसकी बैटरी की स्टेट ऑफ हेल्थ (SOH) जरूर जांचें। इससे पता चलता है कि बैटरी अपनी मूल क्षमता के मुकाबले अब कितनी प्रभावी रह गई है।

2. बैटरी और वाहन की वारंटी की करें जांच

पुराना इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते समय उसकी बची हुई वारंटी आपके लिए बड़ी सुरक्षा हो सकती है। बैटरी बदलने या मरम्मत कराने का खर्च काफी अधिक हो सकता है। इसलिए यह पता करना जरूरी है कि वाहन की बैटरी और अन्य प्रमुख हिस्सों पर कंपनी की वारंटी अभी लागू है या नहीं।

 

वारंटी जांचते समय इन बातों का रखें ध्यान:

– इलेक्ट्रिक कार: कई कंपनियां बैटरी पर 8 साल या 1.60 लाख किलोमीटर तक की वारंटी देती हैं। कुछ कंपनियों की वारंटी में बैटरी की क्षमता 70 फीसदी तक बने रहने की शर्त भी शामिल होती है। हालांकि, नियम हर कंपनी और मॉडल में अलग हो सकते हैं।

– इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर: टू-व्हीलर कंपनियां आमतौर पर बैटरी पर 3 से 5 साल या निर्धारित किलोमीटर तक की वारंटी देती हैं। यह जरूर पूछें कि क्या वारंटी दूसरे मालिक के नाम पर ट्रांसफर हो सकती है।

– वारंटी शुरू होने की तारीख: वाहन के निर्माण वर्ष के बजाय उसकी पहली बिक्री या डिलीवरी की तारीख जांचें। वारंटी की गणना आमतौर पर इसी तारीख से होती है।

– वाहन में बदलाव: अगर बैटरी पैक में अनधिकृत बदलाव, लोकल वायरिंग या कंपनी की अनुमति के बिना कोई तकनीकी मॉडिफिकेशन किया गया है, तो वारंटी प्रभावित हो सकती है। 4. ब्रेक, टायर और सस्पेंशन की स्थिति जरूर देखें

इलेक्ट्रिक वाहन में इंजन की जगह इलेक्ट्रिक मोटर होती है, जो तुरंत टॉर्क देती है। इसके अलावा बैटरी पैक के कारण इनका वजन भी ज्यादा हो सकता है। इससे टायर, ब्रेक और सस्पेंशन पर अलग तरह का असर पड़ता है।

 

इन हिस्सों की जांच करना न भूलें 

– ब्रेक डिस्क और ब्रेक शू: इलेक्ट्रिक वाहन में रीजनरेटिव ब्रेकिंग के कारण सामान्य ब्रेक का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इससे कार की ब्रेक डिस्क पर जंग लगने या कैलिपर जाम होने की आशंका रहती है। इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक में ब्रेक शू, ड्रम ब्रेक और ब्रेक लीवर की स्थिति जांचें।

– टायर: इलेक्ट्रिक मोटर का तुरंत मिलने वाला टॉर्क टायरों को तेजी से घिस सकता है। टायर के दोनों किनारों पर असमान घिसावट देखें। इससे सस्पेंशन या अलाइनमेंट की समस्या का संकेत भी मिल सकता है।

– सस्पेंशन: गाड़ी चलाकर देखें कि खराब सड़क पर ज्यादा आवाज, झटके या असामान्य कंपन तो नहीं हो रहा।

– 12V बैटरी: कई इलेक्ट्रिक कारों और बड़ी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों में मुख्य बैटरी के अलावा छोटी 12V बैटरी भी होती है। यह वाहन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को चालू करने में मदद करती है। इसके खराब होने पर मुख्य बैटरी चार्ज होने के बावजूद वाहन स्टार्ट नहीं हो सकता।

 

5. RC, इंश्योरेंस और जरूरी दस्तावेजों की करें जांच

सेकंड हैंड इलेक्ट्रिक कार या टू-व्हीलर खरीदने से पहले उसके सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच करना बेहद जरूरी है। केवल विक्रेता की बात पर भरोसा करके भुगतान न करें।

 

दस्तावेजों की जांच के लिए जरूरी चेकलिस्ट:

– RC और मालिक का नाम: वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल Parivahan या VAHAN पर जांचें। RC में दर्ज मालिक का नाम विक्रेता के पहचान पत्र से मिलाएं।

– ट्रैफिक चालान: वाहन पर कोई बकाया चालान या जुर्माना तो नहीं है, इसकी जानकारी लें।

– बैंक लोन और NOC: यदि वाहन पर पहले बैंक लोन लिया गया था, तो लोन चुकाने के बाद बैंक से NOC लें। हाइपोथिकेशन हटाने के लिए जरूरत के अनुसार Form 35 की प्रक्रिया भी पूरी कराएं।

– इंश्योरेंस: पॉलिसी की वैधता, बीमा कवरेज और बैटरी से जुड़े नुकसान की शर्तें जांचें। यह भी देखें कि इलेक्ट्रिकल खराबी, आग या चार्जर चोरी जैसे मामलों में क्या-क्या कवर मिलता है।

– इंश्योरेंस ट्रांसफर: वाहन का मालिकाना हक बदलने के बाद बीमा पॉलिसी भी अपने नाम पर ट्रांसफर कराएं।

6. सॉफ्टवेयर और मोबाइल ऐप का एक्सेस भी जांचें

आज के इलेक्ट्रिक वाहन केवल बैटरी और मोटर से नहीं चलते, बल्कि उनमें कई कनेक्टेड और सॉफ्टवेयर आधारित फीचर्स भी होते हैं। मोबाइल ऐप से वाहन की लोकेशन, बैटरी स्टेटस, रिमोट लॉक-अनलॉक और नेविगेशन जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।