दुर्गा पूजा के मौके पर जोरदार कमाई करना चाहते हैं? तो ये हैं आपके लिए 5 बेस्ट ऑप्शंस

दुर्गा पूजा आने में कुछ ही दिन बाकी हैं। इसके बाद भी कई त्योहार आएंगे। यह समय कमाई का बड़ा मौका होता है। खासकर महिलाएं कई चीजें घर पर बनाकर त्योहारों के दौरान लगने वाले मेले में बेच सकती हैं। इससे कुछ ही समय में उन्हें अच्छी कमाई हो सकती है। अगर आप इस मौके का फायदा उठाना चाहते हैं तो अभी से तैयारी शुरू कर देनी होगी।

इन चीजों की रहती है भारी डिमांड

रांची की उद्यमी पूनम बताती है कि त्योहारों के दौरान खासकर डिज़ाइनर बैग, सैंडल, डिजाइनर सलवार सूट, साड़ियों, घर को सजाने के डेकोरेटिव आइटम्स की अच्छी मांग होती है। त्योहारों के दौरान कई जगह एग्जिबिशन लगते हैं। इन एग्जिबिशन के जरिए अच्छी खासी कमाई की जा सकती है। अगर घर में आप चीजें बनाने में दिलचस्पी नहीं रखते तो आप होलसेल मार्केट से लाकर उन्हें एग्जिबिशन में बेच सकते हैं।

स्टाइलिस्ट ब्लाउज की भी अच्छी मांग

पिछले कई सालों से एग्जिबिशन में स्टॉल लगाने वाली उषा बताती हैं कि वह खासतौर पर डिजाइनर ब्लाउज बनाती हैं। यह बॉलीवुड स्टाइल का होता है। दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट स्टाइल वाली इन ब्लाउज की अच्छी डिमांड होती है। ग्राहक खासकर दीपिका पादुकोण की मोती स्पेशल ब्लाउज तो आलिया भट्ट की ऑफ शोल्डर ब्लाउज में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। ऐसी ब्लाउज की कीमत ₹5000 तक होती है। कई महिलाएं पहले से ऑर्डर देती हैं।

बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती

उषा बताती है कि इसके लिए आपको कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। वह घर में डिजाइन बनाती हैं और मास्टर के पास जाती हैं। लेकिन मास्टर हाई क्वालिटी का होना चाहिए। फैब्रिक की जांच परख, मोती या फिर जो भी आप लगा रहे हैं उसकी क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए। वह कहती हैं कि यह सब आपको खुद देखना होता है, क्योंकि, क्वालिटी से कोई समझौता नहीं करना चाहता।

कलेक्शन रिपीट नहीं होना चाहिए

उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखना जरूरी है कि कलेक्शन रिपीट नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रांची के जेसीआई एक्सपो मेले में उन्होंने एक दिन में 10 डिजाइनर ब्लाउज बेची हैं। इससे अच्छी कमाई हो जाती है। उन्होंने कहा कि डिजाइनर कुर्ती, डिजाइनर सलवार सूट इन सब चीजों का स्पेशल कलेक्शन वाला स्टॉल भी लगाया जा सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि आपका कलेक्शन यूनिक होना चाहिए तभी मार्केट में वह चल पाएगा।

(रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट)