
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत को बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के आह्वान से उनका कोई लेना-देना नहीं था। 16 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद जारी किए गए एक नोटिस को चुनौती देते हुए बोरा ने तर्क दिया कि उन्होंने न तो कोई अपराध किया है और न ही ऐसा कुछ किया है जिससे शांति भंग होने की आशंका हो।
नेहा बोरा को यह नोटिस 18 अक्टूबर को मिला, जो कि निवारक हिरासत (Preventive Detention) से उनकी रिहाई के एक दिन बाद जारी किया गया था। उन्हें 16 अक्टूबर को CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में भाग लेने के लिए मंडी हाउस की ओर बढ़ते समय हिरासत में लिया गया था।
पुलिस द्वारा जारी नोटिस में जंतर-मंतर के आसपास बार-बार होने वाले विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया गया है, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई (रद्द) किया जा चुका है। नोटिस में यह आरोप भी लगाया गया है कि धारा 144/निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद बोरा ने लोगों को कनॉट प्लेस में एकत्र होने के लिए उकसाया था।


