BADMINTION ASIA CHAMPIONSHIPS : 61 साल बाद फाइनल में पहुंचा भारत, आयुष शेट्टी ने जीता ऐतिहासिक सिल्वर

Asia Championships Final : भारतीय युवा शटलर आयुष शेट्टी (Ayush Shetty) ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। 20 साल के इस खिलाड़ी ने मेंस सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। हालांकि फाइनल में उन्हें चीन के वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी शी यू की के खिलाफ 8-21, 10-21 से हार का सामना करना पड़ा।

 

 

61 साल बाद भारतीय खिलाड़ी फाइनल में

 

आयुष शेट्टी से पहले आखिरी बार 1965 में कोई भारतीय खिलाड़ी इस टूर्नामेंट के मेंस सिंगल्स फाइनल में पहुंचा था। उस समय दिनेश खन्ना ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था।

अब 61 साल बाद आयुष ने फाइनल में जगह बनाकर इस लंबे इंतजार को खत्म किया।

 

सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय शटलर

 

इस हार के बावजूद आयुष शेट्टी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले भारत को इस कैटेगरी में सिर्फ 1965 में दिनेश खन्ना के रूप में गोल्ड मिला था।

 

 भारत का 19वां मेडल

 

1962 से खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में यह भारत का कुल 19वां मेडल है।

भारत ने अब तक:

 

  • 2 गोल्ड
  • 1 सिल्वर (आयुष शेट्टी)
  • 16 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं

मेंस सिंगल्स में 1965 में दिनेश खन्ना ने गोल्ड जीता था, जबकि 2023 में सात्विक-चिराग की जोड़ी ने मेंस डबल्स में गोल्ड अपने नाम किया था।

 

 

पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन

 

आयुष शेट्टी का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा। उन्होंने कई बड़े खिलाड़ियों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया।

 

  • वर्ल्ड नंबर 1
  • वर्ल्ड नंबर 4
  • वर्ल्ड नंबर 7

 

जैसे टॉप खिलाड़ियों को हराकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की। सेमीफाइनल में उन्होंने डिफेंडिंग चैंपियन कुन्लावत वितिदसर्न को हराकर फाइनल में जगह बनाई।

हार से सीखेंगे आयुष

 

फाइनल के बाद आयुष ने माना कि वह अपने प्रदर्शन से थोड़ा निराश हैं, लेकिन उन्होंने इसे सीखने का मौका बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी फिटनेस, ताकत और गेम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा हफ्ता उनके करियर के लिए शानदार रहा और वह अपने प्रदर्शन से खुश हैं।

 

 भविष्य का बड़ा सितारा

 

आयुष शेट्टी ने इस टूर्नामेंट में साबित कर दिया कि वह भारतीय बैडमिंटन के उभरते हुए सितारे हैं। 61 साल बाद फाइनल तक पहुंचना और सिल्वर जीतना एक बड़ी उपलब्धि है। अगर वह इसी तरह मेहनत करते रहे, तो आने वाले समय में भारत के लिए गोल्ड मेडल भी जीत सकते हैं। आयुष शेट्टी ने भले ही फाइनल नहीं जीता, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से दिखा दिया कि भारतीय बैडमिंटन का भविष्य मजबूत हाथों में है।

फाइनल में उलटफेर नहीं कर पाए आयुष, चीनी खिलाड़ी से सीधे सेटों में हारे

दुनिया के दूसरे नंबर के पुरुष सिंगल्स खिलाड़ी शि यू की ने यहां खेली जा रही बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 के फाइनल में रविवार को “जायंट किलर” आयुष शेट्टी की जीत का सिलसिला रोक दिया। चीनी खिलाड़ी ने 20 साल के आयुष शेट्टी पर 21-8, 21-10 से शानदार जीत दर्ज की।

2025 पेरिस वर्ल्ड चैंपियनशिप के गोल्ड मेडलिस्ट यूकी ने शुरू से ही मैच पर कंट्रोल कर लिया, उन्होंने पहला गेम 21-8 के स्कोर के साथ शानदार अंदाज में जीता। तीन बार के ऑल इंग्लैंड ओपन चैंपियन ने अपने स्मैश अच्छे से लगाए, जिससे आयुष की डिफेंसिव कमजोरी सामने आ गई और उन्हें नेट्स पर आने से रोक दिया।

आयुष ने गेम 2 में अच्छी शुरुआत की, 6-2 की बढ़त बनाई, लेकिन फिर यू की ने शानदार वापसी करते हुए लगातार 6 पॉइंट लिए, दूसरे गेम के ब्रेक पर स्कोर यू की के पक्ष में 11-8 था। इसके बाद सब यू की ही रहा क्योंकि दुनिया के 25वें नंबर के आयुष के पास यूकी के शॉट्स का कोई जवाब नहीं था, जो एक जैसे सटीक और दमदार थे।

13 स्वर्ण पदक जीतकर युवा भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने दक्षिण एशियाई चैंपियनशिप में बनाया दबदबा

भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ियों ने शनिवार को यहां दक्षिण एशियाई युवा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में अलग-अलग वर्ग में 13 स्वर्ण पदक जीतकर अपना क्षेत्रीय दबदबा साबित कर दिया।

यह टूर्नामेंट एशियाई युवा चैंपियनशिप के लिए क्वालीफायर भी है। भारत के प्रियनुज भट्टाचार्य ने अंडर-19 लड़कों के एकल फाइनल में हमवतन पुनीत बिस्वास को 3-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

युगल में एमआर बालमुरुगन और मेहान सेंथिल ने पहले गेम में पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए बांग्लादेश के अबुल हसीब और नफीज इकबाल को हराकर खिताब अपने नाम किया। अंडर-15 लड़कों के वर्ग में आदित्य दास ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में हमवतन खिलाड़ी अक्षय किरिकारा को हराया।

युगल का खिताब भी भारत के ही पास रहा जिसमें ऋषान चट्टोपाध्याय और आकाश राजवेलु ने नेपाल के खिलाफ पांच गेम तक चले कड़े मुकाबले में जीत हासिल की।

लड़कियों के वर्ग में जेनिफर वर्गीज ने एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए अंडर-19 फाइनल में हमवतन अनन्या मुरलीधरन को हराया जबकि अंकोलिका चक्रवर्ती ने आहोना रे को पछाड़कर अंडर-15 का खिताब जीता।भारत ने लड़कियों के युगल के दोनों वर्ग में भी क्लीन स्वीप किया। मिश्रित युगल में भी भारत का दबदबा रहा।

जोनाथन क्रिस्टी को हराकर भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने किया बड़ा उलटफेर

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने शुक्रवार को बड़ा उलटफेर करते हुए दुनिया के चौथे नंबर के खिलाड़ी जोनाथन को हराकर बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बना ली।

आज यहां टॉप-4 में जगह बनाने के साथ ही आयुष शेट्टी 2018 में एच.एस. प्रणय के बाद इस कॉन्टिनेंटल टूर्नामेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एकल बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए हैं। यह 2023 में चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी के पुरुष डबल्स गोल्ड मेडल के बाद बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में भारत का पहला मेडल भी होगा।

पुरुष एकल बैडमिंटन रैंकिंग में 25वें स्थान पर मौजूद आयुष शेट्टी ने क्वार्टर-फ़ाइनल में इंडोनेशिया के ओलंपियन और तीसरी वरीयता प्राप्त जोनाथन क्रिस्टी को 23-21, 21-17 से हराया।

पहला गेम बेहद कड़ा रहा, जिसमें कोई भी खिलाड़ी निर्णायक बढ़त नहीं बना पाया। पूर्व एशियाई चैंपियन जोनाथन क्रिस्टी 11-10 की मामूली बढ़त के साथ मिड-गेम ब्रेक में गए। जोनाथन क्रिस्टी 18-15 की बढ़त बनाकर मैच पर नियंत्रण बनाते दिख रहे थे और उन्हें गेम पॉइंट भी मिल गया था, लेकिन आयुष शेट्टी ने जोरदार वापसी की और मैच को टाई-ब्रेक में ले जाकर पहला गेम जीत लिया।

दूसरा गेम भी उतना ही कड़ा रहा। आयुष शेट्टी 11-9 की मामूली बढ़त के साथ ब्रेक में गए, जिसके बाद उन्होंने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत की और जीत हासिल करके सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। दोनों खिलाड़ियों के बीच यह पहली भिड़ंत थी, जिसमें आयुष शेट्टी ने जोनाथन क्रिस्टी के ख़िलाफ़ अपनी पहली जीत दर्ज की।

इससे पहले टूर्नामेंट में, आयुष शेट्टी ने पहले राउंड में दुनिया के सातवें नंबर के खिलाड़ी और मौजूदा एशियाई खेलों के चैंपियन ली शी फ़ेंग को चौंका दिया था। इसके बाद उन्होंने चीनी ताइपे के ची यू जेन को हराकर क्वार्टर-फ़ाइनल में जगह बनाई थी।

सेमीफाइनल में, आयुष शेट्टी का मुक़ाबला थाईलैंड के पेरिस 2024 रजत पदक विजेता कुनलावुत विटिडसर्न और चीन की एशियाई खेलों की गोल्ड मेडल विजेता पुरुष टीम के सदस्य वेंग होंगयांग के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा।

चीन के विश्व नंबर 7 के खिलाड़ी को सीधे सेटों में हराकर इस युवा भारतीय ने किया उलटफेर

भारत के उभरते बैडमिंटन स्टार आयुष शेट्टी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए, वर्ल्ड नंबर 7 और हांगकांग ओपन 2025 के चैंपियन चीन के ली शी फेंग को सीधे गेम्स में 21-13, 21-16 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।

दोनों गेम्स में पूर्व वर्ल्ड नंबर 3 ली की मजबूत शुरुआत के बावजूद, इस युवा भारतीय खिलाड़ी ने बाद के चरणों में अपना दबदबा बनाया और प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। पहले गेम में, आयुष ने शुरुआत में ही वापसी करते हुए स्कोर 4-4 से बराबर कर दिया, जबकि 7-7 तक ली को थोड़ी बढ़त हासिल थी। वहां से, यूएस ओपन 2025 के चैंपियन ने मैच पर पूरी तरह से नियंत्रण बना लिया और घरेलू पसंदीदा खिलाड़ी को पछाड़ते हुए पहला गेम 21-13 से अपने नाम कर लिया।

दूसरा गेम भी लगभग इसी पैटर्न पर चला, जिसमें ली ने शुरुआत में दबाव बनाया और मध्य चरण तक बढ़त बनाए रखी। हालांकि, आयुष ने 13-13 के स्कोर पर अपनी रणनीति बदलते हुए कई बार स्कोर बराबर किया। इस युवा खिलाड़ी ने लगातार छह अंक हासिल करते हुए बढ़त बना ली और 51 मिनट में 21-16 के स्कोर के साथ मैच अपने नाम कर लिया। अब अगले मुकाबले में आयुष का सामना चीनी ताइपे के ची यू जेन से होगा।

संग्राम सिंह अर्जेंटीना की धरती पर MMA फाइट जीतने वाले पहले भारतीय बने

जब रविवार की रात को पूरा भारत सो रहा था, तब एमएमए का आइकन संग्राम सिंह ब्यूनस आयर्स में इतिहास रच रहा था। उन्हें अर्जेंटीना में MMA Fight जीतने वाले पहले भारतीय होने का गौरव हासिल हुआ। उम्र में 16 साल छोटे फ्रांस के फाइटर फ्लोरियन काउडियर को उन्होंने यहां बयूनस आयर्स के खचाखच भरे टिगरे स्पोर्ट्स क्लब स्टेडियम में महज एक मिनट 45 सेकंड में धराशायी कर दिया। तिबस्ली (georgia) और एम्स्टर्डम (नीदरलैंड) में जीत के बाद उन्होंने एमएमए में जीत की हैट्रिक भी पूरी कर ली। इस फाइट में उन्हें कुश्ती के दांव पेंचों का काफी फायदा हुआ।

जीत के बाद रिंग पर दिए उनके एक बयान से पूरा एमएमए एरिना तालियों के शोर से गूंज उठा। दोहरे कॉमनवेल्थ हैवीवेट चैम्पियन संग्राम सिंह ने कहा कि मेरे लिए जीत-हार कोई मायने नहीं रखती। मैं या तो जीतता हूं या सीखता हूं। मैं अक्सर कहता हूं कि पैशन की कोई उम्र नहीं होती। जैसा कि प्रधानमंत्रीजी अक्सर कहते हैं कि ऊंचे सपने देखो और उनको साकार करने में जुट जाओ।

मेरा भी अर्जेंटीना में फाइट जीतने पर पहले भारतीय बनने का सपना साकार हुआ। उन्होंने आयोजकों के साथ ही अपने कोच भूपेश का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह पिछले 25 साल से उनके साथ हैं। वह भी मुझे कामयाबी दिलाने में दिन-रात जुटे रहे। उन्होंने कहा कि जीत के बाद उन्हें देश विदेश से बधाई संदेशों का तांता लग गया। संग्राम सिंह प्रोफेशनल कुश्ती में वर्ल्ड हैवीवेट चैम्पियन भी रह चुके हैं।

खेल मंत्रालय की फिट इंडिया मूवमेंट के ब्रैंड एम्बेसडर संग्राम सिंह ने कहा कि इस बार हालात उनके लिए काफी मुश्किल थे। कॉम्पीटिशन से दो दिन पहले उनका वजन निर्धारित सीमा से 600 ग्राम अधिक था। दिन भर उन्होंने अपने कोच के साथ कड़ी मेहनत की। खूब पसीना बहाया। दिन भर में आधा गिलास पानी पीया। संग्राम सिंह 83 किलो वजन में उतरे जहां दो किलो की छूट थी। संग्राम सिंह ने कहा कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से बड़ा दबाव महसूस कर रहे थे।

इस अवसर पर मौजूद भारतीय राजदूत और उनके बेटे ने भी इस जीत के बाद बेहद भावुक होकर उन्हें बधाई दी। उस समय पूरा स्टेडियम शोर से गूंज उठा था। स्टेडियम के एक कोने से भारत माता की जय के भी नारे लग रहे थे। संग्राम ने कहा कि मुझे भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि पूरा स्टेडियम मेरी फाइट के दौरान मुझे ही क्यों चीयर-अप कर रहा है।

बिना हाथ पांव के पायल ने शीतल को हराकर उलटफेर करते हुए स्वर्ण जीता, भारत बैंकॉक पैरा तीरंदाजी में शीर्ष पर

दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा चुकी युवा तीरंदाज पायल नाग ने यहां विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में बड़ा उलटफेर करते हुए हमवतन और दुनिया की नंबर एक तीरंदाज शीतल देवी को हराकर स्वर्ण पदक जीता और भारत के शानदार प्रदर्शन की अगुआई की जिसमें देश ने कुल सात स्वर्ण पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

अठारह साल की उभरती हुई तीरंदाज पायल ने कंपाउंड महिला वर्ग के फाइनल में 139-136 से जीत हासिल की। ​​भारत के लिए अभियान यादगार रहा जिसमें देश ने पांच रजत और चार कांस्य पदक सहित कुल 16 पदक जीते।

पायल की यह एक साल से थोड़े ज्यादा समय में शीतल पर दूसरी जीत थी। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2025 में जयपुर में हुए पैरा राष्ट्रीय खेलों में भी शीतल को हराया था।

दुबई 2025 एशियाई युवा पैरा खेलों में पदार्पण करने के बाद पायल अपने दूसरे ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही थीं। उन्होंने दबाव के बावजूद जबरदस्त संयम दिखाते हुए अपने से ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी को मात दी।  पायल ने एक परफेक्ट ‘10’ के साथ शुरुआत की और पहला दौर 27-25 से अपने नाम किया। इसके बाद शीतल ने वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।

दूसरे दौर के बाद स्कोर 54-54 से बराबर था। तीसरे दौर में पायल ने अपने खेल का स्तर और ऊंचा करते हुए दो बार ‘9’ और एक बार ‘10’ का निशाना लगाते हुए 82-80 की बढ़त बना ली।

इसके बाद उन्होंने आखिरी दौर में दो बार ‘10’ का सटीक निशाना लगाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

शीतल के बचपन के कोच कुलदीप वेदवान से प्रशिक्षण लेने वाली पायल की अब तक की यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं रही है।

ओडिशा के बोलांगीर जिले के एक प्रवासी मजदूर की बेटी पायल ने 2015 में ईंट-भट्ठे पर बिजली के एक नंगे तार के संपर्क में आने के बाद अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा दिए थे।

उन्होंने 2023-24 के दौरान कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर में शीतल के साथ ही ट्रेनिंग की थी। इसके बाद शीतल सोनीपत चली गई थीं।

बिना हाथों वाली शीतल भारत की सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली पैरा तीरंदाज बन गई हैं। उन्होंने 2022 में एशियाई पैरा खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते और पेरिस 2024 में मिश्रित टीम कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक पदक विजेता बन गईं।

 पायल ने 2025 में राष्ट्रीय पदार्पण करने के बाद से काफी प्रगति की है। जयपुर में शीतल को हराने के अलावा उन्होंने खेलो इंडिया पैरा खेलों में रजत पदक जीता और इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता। राष्ट्रीय चैंपियनशिप के क्वालीफायर में वह शीतल से पीछे रही थीं।

भारत के लिए तोमन कुमार और भावना ने भी अपनी स्पर्धाओं में पहला स्थान हासिल किया।

तोमन ने कंपाउंड पुरुषों के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोनाथन मिल्ने को 146-142 से हराया जबकि भावना ने रिकर्व महिलाओं के फाइनल में थाईलैंड की फत्थराफोन पट्टावेओ को 6-0 से मात दी।

दो बार के पैरालंपिक पदक विजेता हरविंदर सिंह को रिकर्व फाइनल में इंडोनेशिया के खोलिडिन से 3-7 से हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

वहीं स्वाति चौधरी ने भी रजत पदक जीता। उन्हें डब्ल्यू1 महिलाओं के स्वर्ण पदक मैच में दक्षिण कोरिया की ओके ग्यूम किम से 3-7 से हार का सामना करना पड़ा।

इससे पहले श्याम सुंदर स्वामी ने अपने सीनियर साथी खिलाड़ी और पेरिस पैरालंपिक के पदक विजेता राकेश कुमार को कड़े मुकाबले वाले प्लेऑफ में हराकर कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा के कांस्य पदक मैच में स्वामी प्लेऑफ में 10-9 से विजयी रहे। इससे पहले दोनों खिलाड़ियों ने समान 143 अंक बनाए थे और इसलिए टाईब्रेक का सहारा लेना पड़ा।पेरिस पैरालंपिक्स में मिश्रित टीम के कांस्य पदक विजेता राकेश ने टाईब्रेक में हार के कारण चौथे स्थान पर रहकर अपना अभियान समाप्त किया।

महिला वर्ग की व्यक्तिगत स्पर्धा में अंजुम तनवार भी दक्षिण कोरिया की प्रतिद्वंदी के खिलाफ कांस्य पदक मैच में 2-6 से हारने के बाद चौथे स्थान पर रहीं।बैंकॉक में हाल में इसी स्थान पर खेले गए एशिया कप के पहले चरण में भारत ने दो स्वर्ण, चार रजत और चार कांस्य सहित 10 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था।

Khelo India में दूधवाले ने जीता स्वर्ण पदक, उठ गया था पिता का साया

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन ने बड़े भाई के साथ घर-घर जाकर दूध पहुंचाने के साथ कुश्ती का अभ्यास करते हुए अपने सपने को जिंदा रखा।

जम्मू के जोरावर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय हमाम के लिए जिंदगी और खेल हमेशा साथ-साथ चले हैं। पांच साल पहले पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके और उनके बड़े भाई के कंधों पर आ गई। दोनों ने मिलकर दूध बेचकर घर चलाया और इसी के साथ हमाम ने अपने कुश्ती के सपने को जिंदा रखा।

आखिरकार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में यह संघर्ष रंग लाया, जहां हमाम ने पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके 14 साल के कुश्ती करियर का पहला राष्ट्रीय स्तर का स्वर्ण पदक है।

पदक जीतने के बाद हमाम ने SAI Media से कहा, “मेरे बड़े भाई भी पहलवान थे और राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। पिता के निधन के बाद सारी जिम्मेदारी हम पर आ गई। मेरे भाई को कुश्ती छोड़नी पड़ी और उन्होंने दूध बेचना शुरू कर दिया। मैं भी उनके साथ दूध देने जाता था क्योंकि परिवार चलाना जरूरी था।

लेकिन मेरे भाई ने मुझे हमेशा कुश्ती जारी रखने के लिए प्रेरित किया और मुझे दंगलों में लेकर जाते थे। हमाम ने बताया कि उनके पिता की छोड़ी हुई भैंसें ही परिवार की आजीविका का साधन बनीं। मेरे भाई ने दूध बेचकर घर चलाया और मैं उनकी मदद करता था। लेकिन जब मैंने मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा, तो इस खेल से मुझे लगाव हो गया।”

सीमित संसाधनों के बावजूद हमाम ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। वे अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करते हैं और मैट पर ट्रेनिंग के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर जम्मू तक का सफर तय करते हैं। वह भी अपने काम की जिम्मेदारियों के साथ।

उन्होंने कहा, “साई सेंटर जम्मू में है और हम निचले इलाके में रहते हैं, इसलिए वहां नियमित रूप से जाना मुश्किल होता है। हम आमतौर पर प्रतियोगिताओं के दौरान ही वहां जाते हैं, वरना गांव के अखाड़ों में ही अभ्यास करते हैं। मेरे पास कोई व्यक्तिगत कोच नहीं है। अखाड़े में सीनियर पहलवान हमें मार्गदर्शन देते हैं। जब हम मैट पर अभ्यास करते हैं, तब वहां कोच होते हैं। गांवों में हमें शहरों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। अगर बेहतर सुविधाएं मिलें, तो हमारे क्षेत्र के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीत सकते हैं।”

हमाम के लिए यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है।
उन्होंने अंत में कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लगा। यहां की सुविधाएं बहुत अच्छी थीं। हम एक पिछड़े इलाके से आते हैं, जहां कुश्ती के लिए ज्यादा समर्थन नहीं है, इसलिए हमें दूर-दूर तक जाना पड़ता है। यह पहली बार है जब हमारे लिए इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित की गई है। अगर ऐसे और आयोजन होते रहें, तो हम और पदक जीत सकते हैं।”

भारत की नागरिकता लेने वाले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी के बल पर हॉंगकॉंग के खिलाफ मिली जीत

भारतीय पुरुष राष्ट्रीय टीम ने कोच्चि में अपनी पहली जीत दर्ज करते हुए AFC एशियन कप सऊदी अरब 2027 क्वालीफायर (Final Round) अभियान का शानदार अंत किया। मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारत ने हांगकांग को 2-1 से हराया।

डेब्यू कर रहे रयान विलियम्स और लेफ्ट-बैक आकाश मिश्रा के गोलों ने ब्लू टाइगर्स को इस क्वालीफाइंग अभियान की पहली जीत दिलाई। भारत ने अपने अभियान का समापन पांच अंकों (एक जीत, दो ड्रॉ और तीन हार) के साथ किया, जबकि सिंगापुर 14 अंकों के साथ ग्रुप में शीर्ष पर रहते हुए एशियन कप के लिए क्वालीफाई कर गया।

मुख्य कोच खालिद जमील ने रयान विलियम्स को डेब्यू का मौका दिया, जबकि बिजॉय वर्गीज ने भी सब्स्टीट्यूट के तौर पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।

भारत ने मैच की शानदार शुरुआत की। चौथे ही मिनट में रयान विलियम्स ने अपने डेब्यू को यादगार बनाते हुए गोल दागा। अभिषेक सिंह टेकचाम के पास पर मनवीर सिंह ने गेंद को विलियम्स के लिए सेट किया, जिन्होंने आसान फिनिश के साथ भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। यह भारत के लिए किसी डेब्यू खिलाड़ी द्वारा किया गया सबसे तेज गोल भी रहा।

बढ़त लेने के बाद भारत ने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और आत्मविश्वास के साथ गेंद पर कब्जा रखते हुए खेल की गति तय की। मनवीर सिंह ने लालियानजुआला छांगते के लिए एक शानदार क्रॉस भी दिया, लेकिन हांगकांग के डिफेंडर ने खतरे को टाल दिया।

भारतीय डिफेंस ने हांगकांग को ज्यादा मौके नहीं दिए, और हर हमले को मजबूती से रोका। वहीं, भारत काउंटर अटैक में लगातार खतरनाक दिखा। 25वें मिनट में अपुइया (लालेंगमाविया) ने भी दूरी से शॉट लिया, जो थोड़ा सा बाहर निकल गया।

दूसरे हाफ की शुरुआत भी भारत ने शानदार तरीके से की। 50वें मिनट में राहुल भेके के लंबे थ्रो के बाद बॉक्स में अफरातफरी मची, जहां आकाश मिश्रा ने तेजी दिखाते हुए नजदीकी कोण से गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय गोल था।हालांकि, 65वें मिनट में हांगकांग ने वापसी की। ब्राउनश्टाइन बराक के पास पर एवर्टन कैमार्गो ने शानदार फिनिश करते हुए अंतर को कम कर दिया।

इसके बाद भारत ने खेल पर पकड़ बनाए रखी, जबकि कोच खालिद जमील ने रयान विलियम्स और अनवर अली की जगह आशीक कुरुनियान और जैकसन सिंह को उतारा। आशीक ने आते ही आक्रमण में नई ऊर्जा भर दी और लगातार मौके बनाए।हांगकांग ने भी अंत में दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन गुरप्रीत सिंह संधू और भारतीय डिफेंस ने मजबूती से स्थिति संभाली।

90वें मिनट में बिजॉय वर्गीज को डेब्यू का मौका मिला और उन्होंने इंजरी टाइम में एक महत्वपूर्ण स्लाइडिंग टैकल कर गोल का खतरा टाल दिया।अंत में भारत ने 22,690 दर्शकों के सामने 2-1 की कड़ी जीत दर्ज की और कोच्चि में पहली जीत के साथ अपने अभियान का सकारात्मक अंत किया।

तृणमूल से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए ओलंपिक पदक विजेता टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस

भारत के लिए पहला एकल ओलंपिक पदक जीतने वाले टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने आज दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली। साल 2021 में लिएंडर पेस ने सत्ताधारी तृणमूल कॉंग्रेस की सदस्यता ली थी। हालांकि अब वह पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचार करने के लिए उत्सुक हैं।

तीन दशक तक चले अपने करियर में पेस युगल रैंकिंग में शीर्ष पर भी रहे और इस दौरान उन्होंने 18 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते। इनमें आठ युगल और 10 मिश्रित युगल खिताब शामिल हैं। वह इन दोनों वर्गों में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले तीन खिलाड़ियों में शामिल हैं।

टेनिस में सर्वाधिक मिश्रित युगल ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का रिकॉर्ड संयुक्त रूप से पेस और उनकी पूर्व जोड़ीदार मार्टिना नवरातिलोवा के नाम पर दर्ज है।

पेस 462 सप्ताह तक एटीपी युगल रैंकिंग में शीर्ष 10 में शामिल रहे। इनमें से 37 सप्ताह वह नंबर एक पर काबिज रहे। उन्होंने अपने करियर में एटीपी टूर में कुल 55 युगल खिताब जीते।

पेस ने 30 वर्ष तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने डेविस कप में रिकॉर्ड 45 मैच जीते हैं। इसके अलावा उन्होंने 1996 में अटलांटा ओलंपिक खेलों में एकल में कांस्य पदक जीता था।विश्व के पूर्व नंबर एक युगल खिलाड़ी लिएंडर पेस अंतरराष्ट्रीय टेनिस हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले पहले एशियाई पुरुष भी हैं।