National Conference में बढ़ी बगावत, 10 विधायकों की फिर बैठक, उमर अब्दुल्ला के सामने नई चुनौती

National Conference में बढ़ी बगावत, 10 विधायकों की फिर बैठक, उमर अब्दुल्ला के सामने नई चुनौती

क्या जम्मू कश्मीर की राजनीति एक और बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है? सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के भीतर हो रहे नए घटनाक्रम बताते हैं कि पार्टी के सामने खड़ा राजनीतिक संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। खबरों के अनुसार, कल रात श्रीनगर में नेकां के लगभग 10 नाराज विधायकों ने बंद कमरे में एक और बैठक की। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर बढ़ रहे असंतोष को शांत करने की कोशिशें अभी तक बेनतीजा रही हैं।

 

सूत्रों के मुताबिक यह बैठक हैदरपोरा में टगमर्ग के विधायक पीरजादा फारूक अहमद शाह के आवास पर हुई। विधायकों ने अपनी पुरानी मांगों पर चर्चा की और पार्टी नेतृत्व पर सुधारात्मक कदम उठाने के लिए दबाव बनाने की साझा रणनीति बनाई। बैठक में शामिल होने वालों में नजीर अहमद गुरेजी, मुबारक गुल, कैसर जमशेद लोन और बशीर अहमद वीरी के नाम सामने आए हैं।

 

यह बैठक 30 अक्टूबर को 18 विधायकों की उस मुलाकात के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने सरकार के कामकाज, कैबिनेट के गठन और पार्टी के मामलों में गैर-चुने हुए लोगों के कथित दखल पर सवाल उठाए थे। करीब 19 विधायकों ने संगठन और सरकार में बदलाव की मांग करने वाले एक प्रस्ताव का भी समर्थन किया था।

 

27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद यह संकट और गहरा गया, जब नेकां के चार विधायकों को मंत्री बनाया गया। बताया जा रहा है कि कई वरिष्ठ नेता, जो मंत्री बनने की उम्मीद कर रहे थे, खुद को दरकिनार महसूस कर रहे हैं।

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इससे भी बड़ी बात यह है कि श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने 3 नवंबर को नेकां और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वे अनुच्छेद 370 को बहाल करने के अपने वादे से पीछे हट गए हैं। उनका पार्टी छोड़ना एक बड़ा राजनीतिक झटका है।

 

जानकारी के लिए 90 सीटों वाली विधानसभा में नेकां के 42 सदस्य हैं और वह आठ अन्य विधायकों के समर्थन से सरकार चला रही है। हालांकि बागी विधायकों ने अभी तक औपचारिक रूप से पार्टी से अलग होने की घोषणा नहीं की है, लेकिन बार-बार हो रही बैठकें, रुहुल्लाह का इस्तीफा और मुबारक गुल की संभावित घोषणा ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व को भारी दबाव में डाल दिया है।

 

अब सवाल यह नहीं है कि नेकां के भीतर मतभेद हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या फारूक और उमर अब्दुल्ला इन मतभेदों को संगठन और राजनीति में टूट-फूट का रूप लेने से रोक सकते हैं।

 

रुहुल्लाह की खोज में 5000% से अधिक की वृद्धि हुई

श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह के बारे में खोज में रुचि पिछले सप्ताह की तुलना में 5000 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है। गूगल ट्रेंड्स के अनुसार, जम्मू कश्मीर में इस राजनेता से संबंधित खोजों के लिए अग्रणी क्षेत्र के रूप में उभरा है। यह उछाल रुहुल्लाह द्वारा 3 नवंबर को नेशनल कांफ्रेंस से अलग होने और लोकसभा सीट से इस्तीफा देने की घोषणा से पहले आया था।

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इस घोषणा ने पार्टी नेतृत्व के साथ उनके लंबे समय से चल रहे टकराव को चरम पर पहुंचा दिया था। भारत के लिए गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों से पता चलता है कि सर्च में रुचि में 5000 प्रतिशत से अधिक की जबरदस्त वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा पिछले सप्ताह और पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में है।