दिवाली (Diwali) का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में खरीदारी बढ़ने लगी है। लोग मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के साथ घर के लिए दूसरी जरूरी चीजें भी खरीद रहे हैं। लेकिन इस बार त्योहार की खरीदारी लोगों की जेब पर भारी पड़ सकती है। कई खाद्य चीजों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई में रुकावट, सामान लाने का बढ़ता खर्च और त्योहारों की मांग इसके बड़े कारण हैं। वहीं, चावल की कीमतों में भी पिछले कुछ महीनों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। इसका असर आम लोगों के बजट पर पड़ रहा है।
ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ने की ये रही वजह
शिवाजीनगर के रसेल मार्केट के व्यापारियों के मुताबिक, पश्चिमी एशिया में लड़ाई और सऊदी अरब पर हमलों के कारण ड्राई फ्रूट्स की सप्लाई कम हो गई है। अब जहाजों को दूसरे रास्तों से भेजना पड़ रहा है, जिससे सामान लाने का खर्च बढ़ गया है। रुपये की कीमत गिरने और दिवाली पर मांग बढ़ने से भी ड्राई फ्रूट्स महंगे हो गए हैं। इनके दाम कितने बढ़े हैं, देखें:
• पिस्ता: पहले 1,800 रुपये प्रति किलो था, अब 2,800 रुपये प्रति किलो मिल रहा है।
• काजू: कीमत 800 रुपये से बढ़कर 950 रुपये प्रति किलो हो गई है।
• शिपिंग खर्च: 20 फुट के कंटेनर का किराया करीब 1,500 डॉलर से बढ़कर 4,000 डॉलर हो गया है।
व्यापारियों के मुताबिक, ईरान और अफगानिस्तान से बादाम, अंजीर और पिस्ता पहले सऊदी अरब के रास्ते भारत आते थे। अब जहाजों को दूसरे रास्तों से भेजा जा रहा है, जिससे माल लाने का खर्च बढ़ गया है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो दिसंबर तक भी कीमतें कम होने की उम्मीद नहीं है।
गोवा और केरल में काजू का उत्पादन करीब 12 प्रतिशत घट गया है। इससे बाजार में काजू की सप्लाई कम हो गई है। वहीं, दिवाली से पहले कंपनियां बड़ी संख्या में ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट बॉक्स खरीद रही हैं। इससे बादाम, पिस्ता और किशमिश की मांग भी बढ़ गई है। ड्राई फ्रूट्स महंगे होने के कारण लोग अब दूसरी चीजें खरीद रहे हैं। इनमें कद्दू के बीज, चिया सीड्स, सूरजमुखी के बीज और मखाने शामिल हैं। इनकी मांग बढ़ने से इनके दाम भी बढ़ने लगे हैं।
किचन के राशन पर भी पड़ी महंगाई की मार
ड्राई फ्रूट्स के साथ हल्दी और चावल की कीमतें भी बढ़ने की आशंका है। कम बारिश, फसलों में बीमारियों और खेती की बढ़ती लागत के कारण हल्दी की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं, चावल की कुछ किस्मों के दाम 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। जून में इसकी औसत कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलो थी। व्यापारियों के मुताबिक, कम धान उत्पादन और कर्नाटक समेत दूसरे राज्यों से सप्लाई घटने के कारण पिछले चार महीनों में सोना मसूरी सहित कई किस्में 30 से 40 रुपये प्रति किलो महंगी हुई हैं।
व्यापारी खुशाल राज का कहना है कि मिलों में पर्याप्त धान नहीं मिल रहा है, जिसके कारण चावल की सभी किस्मों के दाम बढ़ गए हैं। महंगाई का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिख रहा है और लोग पहले के मुकाबले कम मात्रा में चावल खरीद रहे हैं।

