
इजरायल में चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब 10 नवंबर तक फैसला हो जाएगा कि देश का अगला पीएम कौन होगा। जानिए किसकी सरकार बनने के मिल रहे हैं संकेत और क्या है समीकरण?
बता दें कि इजरायल के कड़े मुकाबले वाले संसदीय चुनावों में सभी वोटों की गिनती पूरी हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ‘नेसेट’ (इजरायली संसद) में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उनके पास सत्ता में एक और कार्यकाल हासिल करने के लिए जरूरी सीटों की संख्या नहीं है। नतीजों के बाद अब गठबंधन बनाने के लिए जटिल बातचीत का दौर शुरू होगा, जिसमें अरब पार्टियां ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती हैं। वहीं, विपक्ष के नेता गादी आइसेनकोट के सामने कुछ मुश्किल राजनीतिक फैसले लेने की चुनौती है।
सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली संभावनाओं में से एक है- अरब राजनीतिक दलों के समर्थन से आइसेनकोट के नेतृत्व में एक वैकल्पिक सरकार का गठन। मंगलवार शाम को, जब मतदान चल रहा था, हिब्रू यूनिवर्सिटी के ‘अकॉर्ड सेंटर’ ने एक सर्वे जारी किया। इससे कुछ संकेत मिलते हैं कि विपक्षी दलों के समर्थक इस संभावना को किस नजरिए से देखते हैं।
सर्वे के समीकरण क्या कहते हैं : द जेरूसलम पोस्ट’ के अनुसार, विपक्ष से जुड़ी चार मुख्य पार्टियों, आइसेनकोट की ‘यशार’, बेनेट की ‘ब्याचाद’, यायर गोलान की ‘डेमोक्रेट्स’ और एविग्डोर लिबरमैन की ‘यिसरायल बेतेनु’ – के 61 प्रतिशत समर्थकों ने आइसेनकोट के नेतृत्व वाली संभावित गठबंधन सरकार में मंसूर अब्बास की ‘राआम’ पार्टी को शामिल करने का समर्थन किया।
सर्वे में शामिल लोगों के सामने रखे गए विभिन्न गठबंधन विकल्पों में से, इस प्रस्ताव को सबसे ज्यादा समर्थन मिला।
20 प्रतिशत लोगों ने नए सिरे से चुनाव कराने का विकल्प चुना।
12 प्रतिशत ने नेतन्याहू के साथ रोटेशन (बारी-बारी से चलने वाली) सरकार का समर्थन किया।
केवल 7 प्रतिशत लोग अति-रूढ़िवादी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) पार्टियों के साथ गठबंधन के पक्ष में थे।
सर्वे से पता चलता है कि विपक्षी मतदाताओं का एक वर्ग किसी अरब पार्टी के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हो सकता है, अगर इससे नेतन्याहू की प्रधानमंत्री पद की पारी खत्म होती हो।
संसदीय आंकड़ों के लिहाज से भी यह प्रस्ताव आकर्षक लगता है। विपक्ष की 48 सीटों के साथ ‘राआम’ की 8 और ‘जॉइंट लिस्ट’ की 11 सीटों को मिला दें, तो आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गुट के पास कुल 67 सीटें हो जाएंगी, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर ही एक व्यावहारिक गठबंधन बन जाएगा, ऐसा मान लेना सही नहीं होगा।


