
Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti: देश में हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) मनाया जाता है। यह दिन देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है। सरदार पटेल को भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। आजादी के बाद जब देश सैकड़ों रियासतों में बंटा हुआ था, तब उन्हें एक संघ में शामिल करने और एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आइए विस्तार से जानते हैं सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?
राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने का उद्देश्य केवल सरदार पटेल को याद करना नहीं है, बल्कि देश की विविधता के बीच एकता, आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय अखंडता के महत्व को भी समझना है। इसी दिन वर्ष 1875 में सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ था।
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भारत सरकार ने वर्ष 2014 में उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद से देशभर में हर साल यह दिवस आयोजित किया जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, इस दिवस का उद्देश्य देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता को बनाए रखने तथा उन्हें मजबूत करने के प्रति संकल्प दोहराना है।
राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने के पीछे सबसे बड़ी वजह आजादी के बाद भारत के एकीकरण में सरदार पटेल का योगदान है। 15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश का राजनीतिक नक्शा आज जैसा नहीं था। ब्रिटिश भारत के प्रांतों के अलावा देश में 560 से अधिक रियासतें थीं।
उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे। उन्होंने वी.पी. मेनन और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर रियासतों के शासकों से बातचीत की। समझाइश, कूटनीति और आवश्यक प्रशासनिक कदमों के माध्यम से रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
सरदार पटेल को क्यों कहा जाता है भारत का लौह पुरुष?
सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, साहसिक निर्णय क्षमता और मजबूत नेतृत्व के कारण ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों और आम लोगों को संगठित किया। आजादी के बाद उन्होंने अलग-अलग रियासतों को एक राष्ट्र के रूप में जोड़ने के कठिन काम में अहम भूमिका निभाई।
उनकी कार्यशैली में दृढ़ता के साथ व्यावहारिकता भी दिखाई देती थी। वे जानते थे कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश को एकजुट रखने के लिए राजनीतिक एकता के साथ प्रशासनिक मजबूती और आपसी सहयोग भी जरूरी है। यही वजह है कि उन्हें आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले नेताओं में गिना जाता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस का क्या महत्व है?
भारत अनेक भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों, परंपराओं और क्षेत्रीय पहचानों वाला देश है। यहां विविधता के बावजूद एक साझा राष्ट्रीय पहचान और संवैधानिक व्यवस्था सभी नागरिकों को जोड़ती है। राष्ट्रीय एकता दिवस इसी भावना को मजबूत करने का अवसर देता है।


