केसर की खेती आमतौर पर कश्मीर के ठंडे इलाकों में होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि अब केरल में भी इसकी खेती की जा रही है। केरल के त्रिशूर में रहने वाले एक व्यक्ति ने खास तकनीक की मदद से अपने घर के अंदर ही केसर उगाना शुरू किया है। केशर उगाने के लिए वह AI की मदद से टेम्परेचर, ह्यूमिडिटी और लाइटिंग को कंट्रोल करते हैं, जिससे केसर के पौधों को सही माहौल मिल सके। कश्मीर घूमने के दौरान केरल के जेम्स कप्पानी को केसर की खेती करने का विचार आया था। शुरुआत में उसने इसे एक प्रयोग के तौर पर शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे ये काम कारोबार में बदल गया। अब वह उगाए गए केसर को 650 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेच रहा है। आइए जानते हैं क्या है उनकी कहानी
कैसे आया केसर की खेती करने का विचार
30Stades की रिपोर्ट के अनुसार, जेम्स कप्पानी को केसर उगाने का विचार साल 2022 में आया था। उस समय वह काम के सिलसिले में कश्मीर के पंपोर गए थे। नवंबर के महीने में वहां बैंगनी फूलों से भरे खेत देखकर वह काफी प्रभावित हुए। जब उन्होंने स्थानीय लोगों से इन फूलों के बारे में पूछा, तो उन्हें पता चला कि ये केसर के फूल हैं। इन फूलों के अंदर मौजूद लाल रंग के रेशों से ही केसर तैयार किया जाता है। इसके बाद उनके मन में खुद केसर की खेती करने का विचार आया।
सब्जियां विदेश भेजने की थी योजना
उन्होंने बताया, “मैंने तुरंत सोचना शुरू कर दिया कि क्या मैं इसे केरल में अपने घर पर उगा सकता हूं। साल 2022 में सऊदी अरब से लौटने के बाद मैं अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहता था। इससे पहले मैंने वहां मिलिट्री विभाग में 20 साल तक काम किया था।” केसर की खेती से पहले कप्पानी ने केरल से सब्जियां विदेश भेजने का कारोबार शुरू करने की योजना बनाई थी। लेकिन स्थानीय बाजार में पर्याप्त सब्जियां नहीं मिलने के कारण उन्हें मुंबई और तमिलनाडु से सामान मंगवाना पड़ा। इससे उन्होंने अपनी योजना बदलने का फैसला किया।
पहली बार में मिली असफलता
कप्पानी ने कश्मीर से एक किलो केसर के कंद खरीदे और उनकी खेती शुरू की, लेकिन सही जानकारी नहीं होने की वजह से उनका पहला प्रयास सफल नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने केसर की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई। रिसर्च के दौरान कप्पानी को पता चला कि केरल जैसे गर्म मौसम वाले इलाके में केसर उगाने के लिए घर के अंदर ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जहां तापमान, नमी और रोशनी को जरूरत के अनुसार कन्ट्रोल किया जा सके।
कैसे शुरू की केसर की खेती
साल 2025 में जेम्स ने त्रिशूर में अपने घर की छत पर 150 वर्ग फीट की जगह में केसर की खेती शुरू की। इसके लिए उन्होंने खास तरह का सेटअप तैयार किया, जिसमें तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए चिलर, ह्यूमिडिफायर और डीह्यूमिडिफायर लगाए। पौधों को सही रोशनी देने के लिए ग्रो लाइट्स का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने खेती के लिए एरोपोनिक्स तकनीक अपनाई, जिसमें पौधों की जड़ों तक पानी और जरूरी पोषक तत्वों को हल्की फुहार के जरिए पहुंचाया जाता है।
30Stades के मुताबिक, जेम्स के बेटों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक ऐसा सिस्टम बनाया है, जो अपने आप रोशनी, तापमान और नमी को नियंत्रित करता है। इससे खेती में बार-बार हाथ से काम करने की जरूरत नहीं पड़ती। परिवार के लोग सिर्फ केसर की फसल काटने और उसे तैयार करने के लिए कमरे में जाते हैं।
650 रुपये प्रति ग्राम बेचा केसर
खेती की पूरी व्यवस्था तैयार होने के बाद कप्पानी ने कश्मीर के पंपोर से 150 किलो केसर के कंद खरीदे। इसके लिए उन्होंने प्रति किलो 2,500 से 3,000 रुपये खर्च किए और इन कंदों को 180 वर्टिकल ट्रे में लगाया। पहली बार में उन्हें करीब 400 ग्राम केसर मिला, जिसे उन्होंने अपने ब्रांड के नाम से 650 रुपये प्रति ग्राम की कीमत पर बेचा। अब 2026 में उन्होंने दोबारा केसर उगाने की प्रक्रिया शुरू की है और इस बार उन्हें करीब 500 ग्राम फसल मिलने की उम्मीद है।
विदेश में भी बेचने का मिल सकता है मौका
कप्पानी ने अपना केसर फार्म तैयार करने के लिए पुणे, बेंगलुरु और कोच्चि से जरूरी सामान मंगवाया और स्थानीय चीजों का भी इस्तेमाल किया। वह केसर के फूलों से बची पंखुड़ियों को भी बेकार नहीं जाने देते, बल्कि उनसे बेबी ऑयल, नहाने का साबुन और केसर वाला शहद जैसे उत्पाद बनाते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त कमाई होती है। उनके मुताबिक इस तरीके से एक ही फसल से कई तरह के उत्पाद तैयार करके कमाई के अलग-अलग रास्ते बनाए जा सकते हैं। कप्पानी अपने बनाए उत्पादों को इंटरनेट के जरिए और दुकानों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। इसके अलावा, उनके कारोबार ने रूस में अपने उत्पाद बेचने को लेकर एक समझौता भी किया है। इस पहल से उनके ब्रांड को भारत के बाहर भी पहचान मिलने और विदेशी बाजारों में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
लोगों को दे रहें सलाह
अब कप्पानी अपने केसर फार्म को बढ़ाने के साथ-साथ दूसरे लोगों को भी इस खेती से जोड़ना चाहते हैं। इसके लिए वह इच्छुक लोगों को केसर उगाने की ट्रेनिंग देते हैं और ऑटोमेटिक तरीके से चलने वाली यूनिट लगाने में उनकी मदद करते हैं। उनके मुताबिक, 250 वर्ग फुट जगह में ऐसी यूनिट तैयार करने पर करीब 15 लाख रुपये का खर्च आ सकता है। इसमें 240 से 300 तक वर्टिकल ट्रे लगाई जा सकती हैं और इस व्यवस्था से लगभग एक किलो केसर का उत्पादन किया जा सकता है।

