₹2,543 करोड़ की ब्लॉक डील के बाद 6% तक टूटा ₹42 शेयर, प्रमोटर बेच सकते हैं हिस्सेदारी

Sagility Ltd का शेयर शुक्रवार, 30 अक्टूबर को 6% तक टूट गया। बाजार खुलने के कुछ ही मिनट बाद कंपनी के शेयरों में एक बड़ा सौदा हुआ, जिसमें 59.3 करोड़ शेयरों ने हाथ बदले। ये सौदा ₹2,543 करोड़ का रहा। CNBC-TV18 ने एक दिन पहले, गुरुवार को ही खबर दी थी कि कंपनी के प्रमोटर Sagility B.V. अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। डील के बाद शेयर 5.1% नीचे ₹42.36 पर ट्रेड कर रहा है।

59.3 करोड़ शेयरों का सौदा

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस एक सौदे में Sagility के 59.3 करोड़ शेयर एक हाथ से दूसरे हाथ गए। कंपनी के कुल बकाया शेयरों के हिसाब से देखें तो ये उसकी 12.7% इक्विटी के बराबर है। यानी कंपनी के हर 100 शेयरों में से 12 से ज्यादा शेयर एक ही झटके में बिक गए।

ये शेयर ₹43 प्रति शेयर के औसत भाव पर बिके। इस भाव से पूरे सौदे की कीमत ₹2,543 करोड़ बैठती है। इतनी बड़ी मात्रा में शेयर एक साथ बाजार में आते ही शेयर पर दबाव बना और भाव 6% तक फिसल गया।

Sagility B.V. के बेचने की संभावना

इस सौदे में बेचने वाला कौन है, ये अभी आधिकारिक तौर पर साफ नहीं है। लेकिन CNBC-TV18 ने गुरुवार को रिपोर्ट किया था कि Sagility B.V. इस सौदे में बेचने वाला हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक Sagility B.V. कंपनी में 12% तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में था, जिसकी कीमत करीब ₹2,377 करोड़ आंकी गई थी।

शुक्रवार को जो सौदा हुआ, वो इस रिपोर्ट से थोड़ा बड़ा निकला। रिपोर्ट में 12% तक हिस्सेदारी की बात थी, जबकि सौदे में 12.7% इक्विटी के बराबर शेयर बदले। रिपोर्ट में डील का साइज करीब ₹2,377 करोड़ बताया गया था, जबकि असल सौदा ₹2,543 करोड़ का रहा।

₹42.45 का ऑफर प्राइस और 365 दिन का लॉक-अप

इस डील के लिए ऑफर प्राइस ₹42.45 प्रति शेयर रखा गया था। ये भाव गुरुवार के बंद भाव से करीब 5% के डिस्काउंट पर था। ब्लॉक डील में अक्सर खरीदारों को लुभाने के लिए बाजार भाव से थोड़ा सस्ता भाव रखा जाता है, ताकि इतनी बड़ी मात्रा एक साथ बिक सके।

डील के साथ एक शर्त भी जुड़ी है। अब बेचने वाले पर आगे किसी भी हिस्सेदारी की बिक्री को लेकर 365 दिन का लॉक-अप रहेगा। आसान शब्दों में, बेचने वाला अगले 365 दिन तक कंपनी में और हिस्सेदारी नहीं बेच पाएगा। बाजार के लिए इसका मतलब ये है कि कम से कम अगले एक साल तक इसी बेचने वाले की तरफ से शेयरों की नई बिकवाली नहीं आएगी।

50% से नीचे आ सकती है प्रमोटर की हिस्सेदारी

सितंबर तिमाही के अंत में Sagility B.V. के पास कंपनी में 50.95% हिस्सेदारी थी। यानी कंपनी के आधे से ज्यादा शेयर उसी के पास थे। अगर इस सौदे में वाकई Sagility B.V. ही बेचने वाला है, तो डील के बाद उसकी हिस्सेदारी 50% से नीचे आ जाएगी।

50% का आंकड़ा इसलिए अहम है, क्योंकि इससे ऊपर रहने का मतलब कंपनी में आधे से ज्यादा का मालिकाना हक होता है। इस डील के बाद ये हिस्सेदारी उस निशान से नीचे खिसक जाएगी।

FPI और रिटेल निवेशकों की कितनी हिस्सेदारी

कंपनी के पब्लिक शेयरहोल्डर्स में म्यूचुअल फंड्स के पास 15.1% हिस्सेदारी है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा ICICI Prudential MF का है, जिसके पास 3.39% हिस्सेदारी है। इसके बाद Kotak MF के पास 1.86%, Canara Robeco MF के पास 1.78% और Axis MF के पास 1.53% हिस्सेदारी है। म्यूचुअल फंड्स के अलावा Axis Max Life Insurance के पास भी कंपनी में 2.74% हिस्सेदारी है।

सितंबर तिमाही के अंत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के पास Sagility में 10.38% हिस्सेदारी थी। वहीं ₹2 लाख तक की ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल वाले छोटे रिटेल शेयरहोल्डर्स की संख्या 5 लाख से ज्यादा है, और इनके पास कुल मिलाकर कंपनी की 7.64% हिस्सेदारी है। शेयर में आई इस गिरावट का सीधा असर इन 5 लाख से ज्यादा छोटे निवेशकों की जेब पर भी पड़ा है।

1 साल में 22% टूटा Sagility का शेयर

ब्लॉक डील के बाद Sagility का शेयर शुक्रवार को 5.1% की गिरावट के साथ ₹42.36 पर ट्रेड कर रहा है। ये भाव डील के ₹42.45 के ऑफर प्राइस और ₹43 के औसत भाव, दोनों से नीचे है।

शेयर के लिए ये गिरावट नई नहीं है। इस साल अब तक Sagility का शेयर 18.95% तक गिर चुका है। अगर पिछले 1 साल का हिसाब देखें, तो शेयर 22% टूटा है। यानी जिसने 1 साल पहले इस शेयर में ₹10,000 लगाए होते, उसकी रकम अब ₹7,800 के आसपास रह गई होती।

Diwali Stock Picks: अक्टूबर की आखिरी तारीख को मिला दीपावली गिफ्ट, 7 शेयरों पर ब्रोकरेज का दांव, जानिए कहां होगी सबसे ज्यादा कमाई

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।