
इजरायल में अभी तक करीब 90 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। रुझानों के अनुसार, इजरायली संसद की 120 सीटों में से 53 पर बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन जीत दर्ज कर सकता है। इसके अलावा यशार पार्टी के अध्यक्ष गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाला गुट 48 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।
बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी ‘लिकुड’ ने अरब पार्टियों पर देश का चुनाव चुराने का आरोप लगाया है. इन अरब पार्टियों का आधार वे लोग हैं, जिनकी जड़ें फिलिस्तीनी हैं, लेकिन वे इजरायल के नागरिक हैं। अरब इजरायली देश की आबादी का 21% हैं और अब वही तय कर सकते हैं कि सरकार किसकी बनेगी।
नेतन्याहू के लिए यह बेहद मुश्किल स्थिति बन चुकी है। बुधवार को लिकुड पार्टी ने एक बयान में कहा कि चुनाव “आतंकवाद और यहूदी देश को खत्म करने का समर्थन करने वाली अरब पार्टियों ने चुराया है”। पार्टी ने उन पर “भ्रष्टाचार, धमकी, हिंसा, झूठ और वोटिंग बढ़ाने के लिए बैन सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल” का आरोप लगाया। पार्टी ने आगे कहा कि वह सबूत और गवाही अधिकारियों को सौंप रही है। पार्टी का आरोप है कि “हजारों लिफाफों में कैश और राम पार्टी के बैलेट भरे थे, पोलिंग बूथ के अधिकारियों को धमकाया और उनके साथ हिंसा की गई” और कई दूसरी गड़बड़ियां भी हुईं। लेकिन बड़ी बात यह है कि पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर कोई सबूत सामने नहीं रखा है।
ऐसे हालातों में इजरायल में केसे सरकार बनेगी, यह एक बडा सवाल बना हुआ है। जानते हैं क्या है वर्तमान स्थिति और किन किन परिस्थितियों में इजरायल में सरकार बनाने के क्या रास्ते नजर आ रहे हैं।
• बहुमत का आंकड़ा: इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 61 सीटों का है।
• नेतन्याहू का गठबंधन (दक्षिणपंथी व धार्मिक ब्लॉक): प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का ब्लॉक करीब 54 से 55 सीटों के आसपास आगे चल रहा है, जो बहुमत के आंकड़े से पीछे है। नेतन्याहू लगातार एक मजबूत दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सरकार बनाने की बात कह रहे हैं।
• विपक्षी ब्लॉक: पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी ब्लॉक (जिसमें यशार और अन्य मध्यमार्गी/विपक्षी दल शामिल हैं) लगभग 47 सीटों पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है। विपक्षी नेता नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं।
• किंगमेकर की भूमिका में अरब पार्टियां: इस चुनाव में जॉइंट लिस्ट और राम (Ra’am) जैसी अरब राजनीतिक पार्टियों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है और उनकी सीटें बढ़कर करीब 19 तक पहुंचती दिख रही हैं। अब यह चर्चा है कि सरकार बनाने में ये अरब पार्टियां ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, नेतन्याहू पारंपरिक रूप से अरब दलों के साथ सरकार बनाने के धुर विरोधी रहे हैं और विपक्ष में भी इनके समर्थन को लेकर मतभेद हैं।
• राष्ट्रीय एकता सरकार (Grand Coalition) की संभावना: एक विकल्प यह भी है कि नेतन्याहू की ‘लिकुड पार्टी’ और आइज़ेनकोट की ‘यशार पार्टी’ के बीच एक ‘ग्रैंड कोएलिशन’ (राष्ट्रीय एकता सरकार) बने, लेकिन आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू के नेतृत्व में काम करने या उन्हें प्रधानमंत्री बनाए रखने का कड़ा विरोध किया है।
• राष्ट्रपति की अपील और अंतिम नतीजे: इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी दलों से देश में फिर से चुनाव (री-इलेक्शन) की स्थिति से बचने के लिए खुले मन से बातचीत करने और सरकार बनाने की अपील की है।
सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी : अभी तक ये दोनों ही गठबंधन बहुमत के आंकड़े से दूर दिखाई दे रहे हैं। इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का होना जरूरी है। ऐसे में अरब पार्टियां किंग मेकर बनकर उभर सकती हैं। इस चुनाव में इजरायल की दो अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें मिलने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो यह रिकॉर्ड होगा। इससे पहले अरब पार्टियों ने अधिकतम 15 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
पीएम बनने के लिए क्या करेंगे नेतन्याहू : अगर बेंजामिन नेतन्याहू को फिर से इजरायल का प्रधानमंत्री बनना है, तो उन्हें अरब पार्टियों के साथ गठबंधन तो करना ही होगा। इजरायल के चुनाव में 90 प्रतिशत वोटों की गिनती हो चुकी है और एक बात साफ दिख रही है कि बहुमत के आंकड़े के पास न तो नेतन्याहू का गठबंधन है और न मुख्य प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट का विपक्षी गठबंधन। अरब पार्टियों के हाथ में सत्ता की चाबी है और परेशान नेतन्याहू की पार्टी आरोप लगा रही है कि चुनाव को उन अरब पार्टियों ने चुरा लिया है, जो आतंकवाद और यहूदी राज्य के विनाश का समर्थन करती हैं।
रिकॉर्ड नतीजे की तरफ दो अरब पार्टियां : इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा रात 11:35 बजे (स्थानीय समय) जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 90 प्रतिशत वोटों की गिनती हो चुकी है। नेतन्याहू समर्थक गुट के पास 53 सीटें हैं, जबकि विपक्षी गुट के पास 48 सीटें हैं। दो अरब पार्टियां 19 सीटों के रिकॉर्ड नतीजे की ओर बढ़ रही हैं। इजरायल की 120 सीटों वाली संसद में बहुमत का आंकड़ा 61 सीटों का है।
क्या इन 4 तरीकों से बन सकती है इजरायल में सरकार?
नेतन्याहू लीड वाली राष्ट्रीय एकता सरकार : सवाल है कि क्या नेतन्याहू अपने प्रतिद्वंद्वी आइसेनकोट को अपने साथ एक राष्ट्रीय एकता सरकार में शामिल होने के लिए मना पाएंगे? राष्ट्रीय एकता सरकार मतलब जब देश में बड़ा संकट हो, तो सभी बड़ी पार्टियां अपना झगड़ा छोड़कर मिल-जुलकर सरकार बना लेती हैं। लेकिन ऐसा करने के लिए आइसेनकोट को अपने मुख्य एजेंडे को छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने खुद को नेतन्याहू के एकमात्र विकल्प के रूप में पेश किया है और उनका पूरा चुनाव अभियान ही नेतन्याहू को सत्ता से हटाने पर केंद्रित रहा है। हाल ही में उन्होंने अपने चुनाव अभियान मुख्यालय में मंच से नेतन्याहू से कहा कि वे आज ही राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा करें। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा कि इजरायल के लोग नेतन्याहू की झूठ की संस्कृति, समाज में बंटवारा पैदा करने और उकसावे की राजनीति से तंग आ चुके हैं।
अगर आइसेनकोट अरब पार्टियों से हाथ मिला लें : अगर ऐसा होता है तो ऐतिहासिक होगा। यह इजरायली राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव होगा। अब तक केवल एक स्वतंत्र अरब पार्टी ही औपचारिक रूप से किसी गठबंधन का हिस्सा रही है 2021 में और वह भी ज्यादा दिन नहीं चली। एक बात और कि आइसेनकोट और उनके गुट की अन्य सभी यहूदी पार्टियों (एक को छोड़कर) ने पहले ही अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने से इनकार कर दिया है। लेकिन फिलहाल, विपक्ष के पास बहुमत हासिल करने का यही एकमात्र रास्ता है। अरब पार्टी ‘राआम’ के अभी लगभग 7 सीटें जीतने का अनुमान है। उसने कहा है कि वह विपक्षी सरकार में शामिल होगी। जबकि दूसरी अरब पार्टी जॉइंट लिस्ट, जिसके 12 सीटें जीतने का अनुमान है, उसने कहा है कि वह बाहर से समर्थन देगी।
विपक्षी गठबंधन को तोड़ दें नेतन्याहू : क्या नेतन्याहू आइसेनकोट के गुट की दक्षिणपंथी पार्टियों को तोड़कर अपनी सरकार में ला सकते हैं? बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए दो नाम सबसे आगे हैं- बेयाचद गठबंधन के नेता नफ्ताली बेनेट और इजरायल बेइतेनु पार्टी के नेता अविग्दोर लिबरमैन. दोनों ही सुरक्षा के मुद्दे पर कट्टर दक्षिणपंथी हैं और कई मामलों में नेतन्याहू से मिलते-जुलते हैं।
क्या एक नया चुनाव होगा : अगर ऊपर बताई गई स्थितियों में से किसी पर भी सहमति नहीं बन पाती है, तो इसका नतीजा नए चुनाव होंगे। कई लोग इसे नेतन्याहू की एक तरह की जीत मानेंगे, क्योंकि नए चुनाव होने तक वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे और उन्हें शायद यह भी लगता हो कि इन चुनावों में उनके जीतने के बेहतर मौके हैं। बता दें कि सैनिकों, राजनयिकों और अस्पताल में भर्ती मरीजों जैसे समूहों के 430,000 से 480,000 ‘एब्सेंटी बैलेट’ की गिनती अभी बाकी है, इसलिए चुनाव के अंतिम नतीजे आने में एक-दो दिन और लग सकते हैं। इनके नतीजे पक्के होने के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग सभी राजनीतिक गुटों से बातचीत करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसके सफल होने की सबसे अधिक संभावना है- इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग सकते हैं। अगर कोई गुट बहुमत नहीं जुटा पाता, तो आखिर में एक और चुनाव कराना पड़ सकता है।


