Jagan Mohan Reddy : BJP से मोहभंग या INDIA गठबंधन की ओर कदम? क्या 2029 से पहले बदल सकती है YSRCP की रणनीति

Jagan Mohan Reddy : BJP से मोहभंग या INDIA गठबंधन की ओर कदम? क्या 2029 से पहले बदल सकती है YSRCP की रणनीति

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आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के प्रमुख वाईएस जगनमोहन रेड्डी के हालिया बयान ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलों को हवा दे दी है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जगनमोहन रेड्डी कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन की ओर रुख करने का संकेत दे रहे हैं या फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रति नरम रुख रखने वाली अपनी छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

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जगनमोहन रेड्डी सत्ता में रहते हुए संसद में कई अहम विधेयकों पर केंद्र की BJP-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन देते रहे। हालांकि उनकी पार्टी अब तक किसी भी गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुई है। ऐसे में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून का समर्थन करने को अपनी ‘गलती’ बताने वाले उनके बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल

YSRCP प्रमुख ने हाल ही में कहा कि उनकी पार्टी को उस प्रक्रिया का समर्थन करने पर अफसोस है। इसके तहत केंद्र में सत्तारूढ़ दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के चयन में प्रभावी भूमिका निभाता है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति सत्तारूढ़ दल द्वारा नहीं की जानी चाहिए। जगन मोहन रेड्डी के मुताबिक, चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होने चाहिए तथा तीनों को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।

 

उनके इस बयान के समय और राजनीतिक संदर्भ को लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि YSRCP ने कांग्रेस या INDIA गठबंधन के साथ जाने का फैसला कर लिया है। फिलहाल यह राजनीतिक संभावनाओं और अटकलों का विषय है।

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2019 से 2024 तक NDA सरकार के कई विधेयकों का किया समर्थन

जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के सांसदों ने 2019 से 2024 के बीच लोकसभा और राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर केंद्र की मोदी सरकार का समर्थन किया था। यह समर्थन मुद्दों के आधार पर दिया गया था, न कि किसी औपचारिक गठबंधन के तहत, लेकिन 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले BJP ने YSRCP के बजाय जगन के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के साथ गठबंधन किया। BJP और TDP ने आंध्र प्रदेश में जनसेना पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और शानदार प्रदर्शन किया।

2024 के चुनाव में YSRCP को बड़ा झटका

आंध्र प्रदेश विधानसभा की 175 सीटों में से TDP, BJP और जनसेना गठबंधन ने कुल 164 सीटें जीतीं। वहीं, लोकसभा की 25 सीटों में से इस गठबंधन को 21 सीटों पर जीत मिली। इसके उलट, जगन मोहन रेड्डी की YSRCP विधानसभा में सिर्फ 11 सीटों पर सिमट गई। लोकसभा चुनाव में पार्टी को चार सीटें मिलीं। इस नतीजे ने राज्य की राजनीति में YSRCP की स्थिति को बड़ा झटका दिया।
 

BJP से दूरी के बाद भी जगन को थी समर्थन की उम्मीद

चुनावी हार और BJP के TDP के साथ जाने के बावजूद जगन मोहन रेड्डी ने केंद्र की NDA सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन देने की बात कही थी। उस समय YSRCP के पास कुल 15 सांसद थे—लोकसभा में चार और राज्यसभा में 11। केंद्र में बहुमत के लिए सहयोगियों पर निर्भर NDA सरकार के लिए ऐसे सांसदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता था।

 

जगन ने राष्ट्रीय और राज्य के हित से जुड़े मुद्दों पर अपनी पार्टी के सांसदों की ओर से समर्थन देने की बात कही थी। हालांकि, केंद्र में BJP की राजनीतिक रणनीति में चंद्रबाबू नायडू की TDP की अहम भूमिका रही। ऐसे में YSRCP के लिए BJP के साथ राजनीतिक तालमेल बढ़ाने की गुंजाइश सीमित दिखाई दी।

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क्या 2029 के चुनाव से पहले बदलेगी जगन की रणनीति?

करीब ढाई साल बाद जगन मोहन रेड्डी के हालिया बयान को उनकी भविष्य की राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वह अपनी अब तक की स्वतंत्र राजनीति की रणनीति पर दोबारा विचार कर रहे हैं और 2029 के चुनाव से पहले नए राजनीतिक विकल्प तलाश सकते हैं।  अभी तक कांग्रेस या YSRCP की ओर से किसी संभावित गठबंधन को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि जगन मोहन रेड्डी INDIA गठबंधन में शामिल होने जा रहे हैं। आने वाले समय में उनके बयानों, संसदीय रुख और कांग्रेस के साथ संभावित संवाद पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।