
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के वरिष्ठ अधिकारी संजय दुबे ने कमाल कर दिया है। उन्होंने करोड़ों रुपए के घोटाले का पर्दाफाश करते हुए 300 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिराई है। उनकी इस कार्रवाई से मध्यप्रदेश शासन को बड़ी राहत मिली है। संजय दुबे का कहना है कि उनका उद्देश्य गुड गवर्नेंस की स्थापना के साथ-साथ आम जनता को राहत देना है। वे लापरवाही और अनियमितता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। बता दें, मोहन सरकार का लक्ष्य ही लक्ष्य गुड गवर्नेंस है। राज्य सरकार जन-कल्याण के लिए हर क्षण प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि वर्तमान में आईएएस संजय दुबे नगरीय शासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) हैं। उन्होंने नगरीय निकायों में की जा रही लापरवाही और अनियमितता को लेकर मीडिया से कहा कि नगरिया निकायों में अनियमितता के मामले में 7 अधिकारियों-कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। इन अधिकारियों-कर्मचारियों से 3-4 करोड़ रुपए की वसूली भी की चुकी है। हमने गलत दरों पर सामान उपलब्ध कराने वाले 80 से ज्यादा ठेकेदारों-सप्लायर्स के विरुद्ध कार्रवाई की।
जारी रहेगी कार्रवाई की प्रक्रिया
एसीएस संजय दुबे ने कहा कि कार्रवाई की यह प्रक्रिया पहले भी जारी थी, निरंतर भी जारी है। आज की तारीख में अलग-अलग स्तर के 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें से 135 चीफ म्यूनिसिपल (सीएमओ) स्तर के अधिकारी हैं। इनमें से कुछ लोगों से वसूली की कार्रवाई की गई, कुछ की वेतन वृद्धि रोक दी गई है, कुछ लोगों को डिमोट किया गया और कुछ को बर्खास्त किया गया है। जिसकी जितनी बड़ी अनियमितता, जितनी ज्यादा लापरवाही, उसके विरुद्ध उसी तरह की कार्रवाई की गई।
पूरा ध्यान गुड गवर्नेंस पर
गौरतलब है कि मोहन सरकार का मूल मंत्र सुशासन और लक्ष्य जनकल्याण है। राज्य सरकार का प्रयास है कि शासन की हर नीति, योजना और निर्णय का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। पारदर्शी प्रशासन, जवाबदेह व्यवस्था, समयबद्ध सेवाएं और जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण सुशासन के प्रमुख आधार हैं। सरकार विकास को केवल योजनाओं तक सीमित न रखते हुए उसे आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार हर क्षण प्रदेशवासियों की सेवा, सुविधा और समृद्धि के लिए कार्य कर रही है, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और मध्यप्रदेश सुशासन एवं जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर सके।


