Mann Ki Baat के 12 साल, PM मोदी ने बताया कार्यक्रम को तीर्थयात्रा जैसा अनुभव, जनता को लेकर क्या बोले

Mann Ki Baat के 12 साल, PM मोदी ने बताया कार्यक्रम को तीर्थयात्रा जैसा अनुभव, जनता को लेकर क्या बोले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 12 साल के सफर को याद किया। उन्होंने इस कार्यक्रम को आम नागरिकों के योगदान को पहचानने का अवसर बताया और कहा कि इसका अनुभव किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं रहा है।

 

‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने श्रोताओं के निरंतर समर्थन और स्नेह के लिए उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि श्रोता इस सफर का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और उनसे उन्हें लगातार प्रेरणा मिलती रही है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत को याद करते हुए बताया कि ‘मन की बात’ का पहला प्रसारण 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के अवसर पर हुआ था। उनके मुताबिक, इस कार्यक्रम ने देशभर के लोगों की मेहनत, साहस, समर्पण और सेवा भावना को सामने लाने के लिए एक मंच उपलब्ध कराया है।

 

भारत की सदियों पुरानी तीर्थयात्रा परंपरा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें समाज और राष्ट्र के लिए काम करने वाले नागरिकों के प्रयासों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि जनसेवा में जुटे लोग स्वयं दूसरों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में ‘मन की बात’ ने ऐसे व्यक्तियों और समुदायों के योगदान को सामने लाने का काम किया है, जिनके प्रयास अक्सर लोगों की नजरों से दूर रह जाते हैं। कार्यक्रम के जरिए समाजसेवा, समर्पण और सामुदायिक पहल से जुड़ी उनकी कहानियां देशभर के श्रोताओं तक पहुंची हैं।

 

पीएम मोदी ने कार्यक्रम को देश के परिवारों से जुड़ने का माध्यम भी बताया। उन्होंने कहा कि कई श्रोताओं ने उन्हें बताया है कि ‘मन की बात’ सुनते समय उन्हें प्रधानमंत्री के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस होता है। उन्होंने श्रोताओं से मिलने वाले स्नेह और अपनत्व को अनमोल बताया।

 

वर्ष 2014 में शुरू हुआ ‘मन की बात’ आकाशवाणी यानी ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित होता है। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों के नागरिकों, सामाजिक पहलों और समुदायों के प्रयासों से जुड़ी कहानियां साझा की जाती रही हैं, ताकि उनके काम और अनुभवों को व्यापक पहचान मिल सके।