कब है सरदार पटेल जयंती? क्यों कहा जाता है उन्‍हें लौह पुरुष? जानें उनसे जुड़ी अनसुनी बातें

कब है सरदार पटेल जयंती? क्यों कहा जाता है उन्‍हें लौह पुरुष? जानें उनसे जुड़ी अनसुनी बातें

Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti

Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti 2026: भारत के इतिहास में सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम देश की एकता, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र निर्माण के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। आजादी के बाद जब भारत के सामने सैकड़ों रियासतों को एकजुट करने की चुनौती थी, तब सरदार पटेल ने देश के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी योगदान के कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है। उनकी जयंती पर देशभर में राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया जाता है और उनके जीवन, संघर्ष तथा विचारों को याद किया जाता है। 31 अक्टूबर, शनिवार 2026 को देशभर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती मनाई जाएगी। आइए जानते हैं सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़ी अनसुनी बातें…

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था।  इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में एकता दौड़ यानी ‘रन फॉर यूनिटी’, शपथ ग्रहण समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन किए जाते हैं। इनका उद्देश्य लोगों को देश की अखंडता, आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूक करना है।

 

क्यों कहा जाता है उन्हें लौह पुरुष?

भारत की आजादी और उसके बाद राष्ट्र निर्माण की कहानी सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान के बिना अधूरी है। देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी अलग-अलग रियासतों को एकजुट करके एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण करना।

 

इस ऐतिहासिक कार्य में सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ, दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व का परिचय दिया। यही वजह है कि उन्हें भारतीय इतिहास में ‘लौह पुरुष’ के नाम से विशेष पहचान मिली। इस दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में भी जाना जाता है। वर्ष 2014 में भारत सरकार ने 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी।

 

सरदार वल्लभभाई पटेल से जुड़े रोचक तथ्य

रियासतों के एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान

1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय देश के सामने अनेक राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां थीं। सरदार पटेल ने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी वीपी मेनन और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर रियासतों के शासकों से बातचीत की। इन प्रयासों के माध्यम से सैकड़ों रियासतों के भारत में विलय का रास्ता तैयार हुआ। 

 

कठिन परिस्थितियों में दृढ़ निर्णय

जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी रियासतों के एकीकरण के मामले काफी जटिल थे। सरदार पटेल ने इन परिस्थितियों में राष्ट्रीय हितों और भारत की क्षेत्रीय अखंडता को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का समर्थन

सरदार पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे। उन्होंने प्रशासनिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और अखिल भारतीय सेवाओं को बनाए रखने का समर्थन किया। उनका मानना था कि विशाल और विविधतापूर्ण देश को एकजुट रखने के लिए सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है।

 

वकालत से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का सफर

सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन संघर्ष, मेहनत और निरंतर आगे बढ़ने की कहानी है। शुरुआती जीवन में उन्होंने वकालत को अपना पेशा बनाया। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने कानूनी क्षेत्र में पहचान बनाई। उन्होंने इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई पूरी की और बैरिस्टर बने। उनका राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि व्यक्तिगत पेशेवर सफलता के बाद भी समाज और देश के लिए व्यापक जिम्मेदारियां निभाई जा सकती हैं।

 

बारडोली सत्याग्रह से कैसे मिली ‘सरदार’ की पहचान?

सरदार पटेल के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में वर्ष 1928 का बारडोली सत्याग्रह शामिल है। गुजरात के बारडोली क्षेत्र में किसानों ने लगान में वृद्धि के खिलाफ आंदोलन किया था। उस समय किसानों की आर्थिक स्थिति कठिन थी और वे बढ़े हुए कर का विरोध कर रहे थे। पटेल ने किसानों को संगठित किया और आंदोलन को अनुशासित ढंग से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

 

खेड़ा सत्याग्रह में किसानों का साथ

वर्ष 1918 का खेड़ा सत्याग्रह भी सरदार पटेल के सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। गुजरात के खेड़ा जिले में फसल खराब होने के कारण किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे थे। किसानों की मांग थी कि परिस्थितियों को देखते हुए उनसे लगान वसूलने में राहत दी जाए।

 

‘भारत रत्न’ से सम्मानित

सरदार पटेल को वर्ष 1991 में मरणोपरांत ‘भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। उनके राष्ट्रीय योगदान को मान्यता देने के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।