चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंटेंट क्रिएटर कुशल लोढ़ा ने बताया है कि कैसे मुंबई में रहते हुए उन्होंने एक बार अपनी महीने की सैलरी का आधा हिस्सा किराए पर खर्च कर दिया था। उन्होंने बताया कि वे महीने के ₹1 लाख कमाते थे और लोअर परेल में घर के लिए ₹50,000 किराया देते थे।
लोढ़ा के लिए ज्यादा किराया सिर्फ रहने का खर्च नहीं था। उनका मानना था कि वे जिस इलाके में रहते थे, उसका उनकी सोच, लक्ष्यों और काम करने के तरीके पर सीधा असर पड़ता था। उन्होंने कहा कि यह फैसला सही था, भले ही उनके आस-पास के लोगों ने इस पर सवाल उठाए हों।
लोढ़ा 50,000 महीना किराया देते थे
लोढ़ा ने अपने X पोस्ट में कहा, “जब मैं महीने में ₹1 लाख कमाता था तो मैं लोअर परेल में रहने चला गया और ₹50,000 किराया देता था।” उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझना मुश्किल लगता था कि वह अपनी कमाई का इतना बड़ा हिस्सा किराए पर क्यों खर्च करना चाहते थे।
कुछ लोगों ने तो इस फैसले के लिए उन्हें “पागल” भी कहा। हालांकि लोढ़ा के मुताबिक लोअर परेल में रहने से उन्हें ऐसा माहौल मिला, जिसने उनके करियर और काम को देखने का नजरिया बदल दिया। उन्हें लगा कि उनके आस-पास के लोग, जीवनशैली और मौकों ने उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा- अपनी सैलरी का 50% किराए पर खर्च करने के लिए सबने मुझे पागल कहा। लेकिन उस माहौल ने मेरे सोचने और काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया।”
When I earned Rs. 1 lakh a month, I moved to Lower Parel and paid Rs. 50,000 in rent.
Everyone called me mad for spending 50% of my salary on rent.
But that environment completely changed the way I thought and worked.
Sometimes, the value of a place is not measured by its rent.
It is measured by the ambition it creates within you.
— Kushal Lodha (@kushallodha548) September 17, 2026
उन्होंने किराए को एक निवेश के तौर पर देखा
लोढ़ा ने कहा कि हर महीने जो रकम वह देते थे, उसे सिर्फ घर के किराए के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके लिए आस-पास का माहौल भी जरूरी था क्योंकि वह उनकी महत्वाकांक्षाओं पर असर डाल सकता था। कभी-कभी किसी जगह की कीमत उसके किराए से नहीं मापी जाती। यह उस महत्वाकांक्षा से मापी जाती है, जो वह आपके अंदर पैदा करती है। उनकी बातों से इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या किसी खास इलाके में रहने के लिए ज्यादा खर्च करने से ऐसे फायदे हो सकते हैं, जिन्हें पैसों में मापना मुश्किल हो।
यूजर्स ने माहौल की अहमियत पर चर्चा की
कई यूजर्स लोढ़ा की बात से सहमत थे और उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के आस-पास का माहौल उसकी तरक्की में भूमिका निभा सकता है। एक यूजर ने कहा कि महत्वाकांक्षी लोगों और नए मौकों के बीच रहने का ऐसा असर हो सकता है जिसे हमेशा आंकड़ों के जरिए नहीं दिखाया जा सकता।
यूजर्स ने माहौल की अहमियत पर चर्चा की
कई यूजर्स लोढ़ा की बात से सहमत थे और उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के आस-पास का माहौल उसकी तरक्की में भूमिका निभा सकता है। एक यूजर ने कहा कि महत्वाकांक्षी लोगों और नए मौकों के बीच रहने का ऐसा असर हो सकता है जिसे हमेशा आंकड़ों के जरिए नहीं दिखाया जा सकता।
एक यूजर ने कमेंट सेक्शन में कहा, “यह आपको जीवन की जो गुणवत्ता देता है, उसे असल में पैसों के रूप में नहीं मापा जा सकता। यह हमें कई ऐसी चीज़ें देता है जिन्हें मापा नहीं जा सकता। और हर चीज़ का विश्लेषण नहीं किया जाना चाहिए। जीवन में भावनात्मक फ़ैसलों की भी जरूरत होती है।”

