
UP Women Safety: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एंटी रोमियो स्क्वॉड, महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती में 20% आरक्षण, और पिंक पेट्रोलिंग जैसे कड़े कदमों के जरिए अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है।
मिशन शक्ति, कन्या सुमंगला और लखपति दीदी जैसी योजनाओं से न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन रही हैं। थानों में त्वरित जांच, 15-दिवसीय डिजिटल समीक्षा और फॉरेंसिक लैब्स के माध्यम से दोषियों को सख्त सजा दिलाकर राज्य सरकार महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित कर रही है।
महिला सुरक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता की बात की जाए, तो वर्ष 2017 के बाद से प्रदेश में महिलाओं से जुड़े अपराधों के ग्राफ में उल्लेखनीय गिरावट देखी जा रही है। 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद राज्य में विकास और सुरक्षा का नया दौर शुरू हुआ। केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित नीतियों ने महिला सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली प्राथमिकता महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देना रहा है, ताकि वे निर्भीक होकर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ सकें। इसके लिए कई कड़े और प्रभावी कदम उठाए गए। एंटी रोमियो स्क्वॉड एवं महिला हेल्पलाइन 1090 की शुरुआत की गई। पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई। 2017 में जहां महिला पुलिसकर्मियों की संख्या लगभग 10,000 थी, वहीं आज यह बढ़कर 44,000 से अधिक हो चुकी है। इतना ही नहीं प्रदेश के थानों और जिलों में महिला बीट पुलिसिंग, पिंक पेट्रोलिंग और डिजिटल मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से शिकायतों का त्वरित और संवेदनशील निस्तारण किया जा रहा है।
क्या कहती हैं यूपी की प्रबुद्ध महिलाएं?
वेबदुनिया ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की महिला शिक्षिकाओं और विशेषज्ञों से सुरक्षा एवं बदलाव को लेकर खास बातचीत की। डॉ. अलका श्रीवास्तव ने कहा कि 2017 के बाद से महिलाओं में एक अलग आत्मविश्वास दिख रहा है। त्वरित पुलिस कार्रवाई और हेल्पलाइन नंबरों के प्रभावी संचालन से जो महिलाएं पहले घर तक सीमित थीं, वे अब बाहर खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं।
डॉ. सरिता द्विवेदी के मुताबिक अपराधों के ग्राफ में कमी आई है। हम खुद को सशक्त महसूस कर रहे हैं और निडर होकर सड़कों पर निकल रहे हैं। आज की महिला घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियों को बखूबी संभाल रही है। डॉ. रचना ने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका में हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का वातावरण है।
डॉ. अमिता सिंह ने कहा कि नारी आज सशक्त है, कमा भी रही है और प्रोफेशनल एजुकेशन में बेटियां हाई रैंक हासिल कर रही हैं। हालांकि, कानून को और सख्त करने और लगातार सुधार की जरूरत हमेशा बनी रहती है। प्रो. प्रिया कुमारी का मानना है कि शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अभी और सुधार की आवश्यकता है। वहीं डॉ. कविता का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर माताओं के मन में अभी भी चिंताएं बनी रहती हैं, जिस पर निरंतर काम होना चाहिए।
त्वरित जांच और सख्त सजा
महिला सुरक्षा के कड़े इंतजामों पर CO City (अयोध्या) श्रीयेश त्रिपाठी ने बताया कि महिला अपराध से जुड़े मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज करने के सख्त निर्देश हैं। दो माह के भीतर जांच (विवेचना) पूरी की जाती है। थानों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों का डेटा अलग रखा जाता है। इन केंद्रों की ऑनलाइन समीक्षा हर 15 दिन में सीनियर ADG महिला अधिकारी द्वारा की जाती है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रदेश के हर मंडल में FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) सेल का गठन किया है, जिससे जांच रिपोर्ट जल्दी मिलती है और अदालतों को निर्णय देने में विलंब नहीं होता। पुलिस की मजबूत पैरवी के चलते पिछले वर्षों में महिला अपराधों में आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की दर में तेजी आई है।


