टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में भोपाल में शिक्षकों का धरना, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में भोपाल में शिक्षकों का धरना, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

भोपाल। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में अब शिक्षकों ने आर-पार की लड़ाई का एलान  कर दिया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक आंदोलन में शामिल होने के लिए भोपाल पहुंचे हैं। मोर्चे का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों का ठोस निराकरण नहीं किया जाता, तब तक धरना और आंदोलन जारी रहेगा।

 

शिक्षकों ने आंदोलन के माध्यम से मुख्य रूप से तीन मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इनमें लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त करने, प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि की गणना करने और ई-अटेंडेंस व्यवस्था को स्वैच्छिक किए जाने की मांग शामिल है।

 

 टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग- आंदोलन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए। मोर्चे की मांग है कि  राज्य सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करे और उसे केंद्र सरकार को भेजे, ताकि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत मिल सके।

 

इसके साथ ही आंदोलनकारी शिक्षकों का तर्क है कि वर्षों से शासकीय शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के मामले में उनकी सेवा अवधि और अनुभव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों की ओर से लगातार अपनी मांग उठाई जा रही है।

 

नीलम पार्क में धरने पर बैठे शिक्षकों की दूसरी प्रमुख मांग सेवा गणना को लेकर है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का कहना है कि शिक्षक की सेवा अवधि की गणना उसकी प्रथम नियुक्ति की तारीख से की जानी चाहिए। इसी आधार पर वरिष्ठता निर्धारित करने की मांग की जा रही है।

 

 शिक्षकों का कहना है कि प्रथम नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना होने पर वरिष्ठता से जुड़े मामलों में स्पष्टता आएगी। मोर्चा इस मांग के लिए भी सरकार से ठोस निर्णय लेने की अपेक्षा कर रहा है।

 

शिक्षकों की तीसरी प्रमुख मांग ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि उनके नियमित शिक्षण कार्य के साथ विभागीय और अन्य शासकीय दायित्व भी होते हैं। ऐसे में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को अनिवार्य रखने के बजाय स्वैच्छिक किया जाना चाहिए।

 

 मोर्चे के अनुसार शिक्षकों को स्कूलों में शिक्षण कार्य के अलावा कई तरह के विभागीय और शासकीय कार्यों में भी लगाया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ई-अटेंडेंस को लेकर व्यावहारिक व्यवस्था लागू करने की मांग की जा रही है।

 

 नीलम पार्क में शुरू हुए धरने में प्रदेशभर के विभिन्न जिलों से शिक्षक शामिल हुए हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।