Tata Trust ने एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर उठाए सवाल, खारिज किया बोर्ड का फैसला, री-अपॉइंटमेंट को दी चुनौती

Tata Trust ने एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर उठाए सवाल, खारिज किया बोर्ड का फैसला, री-अपॉइंटमेंट को दी चुनौती

Tata Trusts raised questions regarding N Chandrasekaran's appointment

टाटा ग्रुप (Tata Group) में अंदरुनी विवाद गहरा गया है। Tata Trusts ने टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का खुलकर विरोध किया है। Tata Trusts ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी है। Tata Trusts ने आज कहा कि उनकी पुनर्नियुक्ति के समर्थन में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की जो व्याख्या दी जा रही है, वो सही नहीं है। Tata Trusts ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर दी जा रही दलीलों को भी खारिज किया है।

खबरों के अनुसार, Tata Trusts ने टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का खुलकर विरोध किया है। Tata Trusts ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी है। Tata Trusts ने आज कहा कि उनकी पुनर्नियुक्ति के समर्थन में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की जो व्याख्या दी जा रही है, वो सही नहीं है।

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Tata Trusts ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर दी जा रही दलीलों को भी खारिज किया है। Tata Trusts ने कहा कि 100 साल पुराने टाटा ग्रुप ढांचे को सिर्फ एक कमी दूर करने के लिए बदलना ठीक नहीं होगा। टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए दोबारा चैयरमेन के पद पर नियुक्त करने का प्रस्ताव पास किया था। कंपनी ने अंदरुनी कारोबार पर रोक लगाने के लिए कोड ऑफ कंडक्ट भी बना रखा है।

Tata Trusts के मुताबिक, इन सभी व्यवस्थाओं का जिक्र कंपनी की सालाना रिपोर्ट और कॉर्पोरेट गवर्नेंस रिपोर्ट में होता रहा है। ट्रस्ट ने कहा कि ये नियम मौजूदा विवाद शुरू होने से काफी पहले ही टाटा संस ने खुद अपनाए थे। Tata Trusts ने कहा कि पूरा मामला सिर्फ गवर्नेंस के नियमों तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट के मुताबिक, असली सवाल यह है कि टाटा ग्रुप के ढांचे में उन लोगों की आवाज कौन उठाएगा, जिनके लिए Tata Trusts 130 साल से ज्यादा समय से काम करता आया है।

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Tata Trusts का कहना है कि कंपनी के आर्टिकल्स के मुताबिक, इस नियुक्ति के लिए Tata Trusts के नामित निदेशकों का जरूरी समर्थन मिलना चाहिए। Tata Trusts का कहना है कि टाटा संस के नियमों के तहत ट्रस्ट के नामित डायरेक्टर्स को मिले Affirmative Voting Rights पूरी तरह वैध हैं, क्योंकि खुद टाटा संस ने पहले सुप्रीम कोर्ट में साइरस मिस्त्री विवाद के दौरान इन्हीं नियमों का जोरदार बचाव किया था।

उस समय सुप्रीम कोर्ट ने भी टाटा संस की दलील मानते हुए इन नियमों को सही ठहराया था। ऐसे में Tata Trusts का तर्क है कि जिस सुरक्षा और अधिकार को खुद टाटा संस ने देश की सबसे बड़ी अदालत में सही साबित कराया था, आज वह अपनी सुविधानुसार उसी नियम से पीछे नहीं हट सकती और न ही उसे नजरअंदाज कर सकती है।

Tata Trusts ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी कि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AOA) के तहत किसी भी प्रस्ताव के पास होने के लिए Tata Trusts की ओर से नामित डायरेक्टर्स का बहुलता में वोट होना आवश्यक है, जो कि इस प्रस्ताव को नहीं मिला।