एशियाड के लिए पाकिस्तान ने चुनी युवा टीम, साहिबजादा फरहान बने कप्तान

sahibzada farharn

पाकिस्तान ने जापान के आइची-नागोया में इस साल सितंबर-अक्टूबर में होने वाले 2026 एशियाई खेलों के लिए साहिबजादा फरहान को 15 सदस्यीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया है। पाकिस्तान की इन 15 सदस्यीय टीम में चार ऐसे खिलाड़ी आकिफ जावेद, अली रजा, माज सदाकत और साद मसूद है जिन्होंने अभी तक कोई भी अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच नहीं खेला है। वहीं अब्दुल समद को टीम का उपकप्तान की जिम्मेदारी गई है।

नोट करने वाली बात यह है कि टीम में सभी बड़े नामों को आराम दिया गया है। ना ही टीम में फखर जमान है, ना ही शाहीन अफरीदी और ना ही हारिस राऊफ। टीम एक युवा ईकाई के साथ एशियाड में जाने को तैयार है।

फरहान ने अब तक पाकिस्तान के लिए 46 अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच खेले हैं। वह पहली बार इस प्रारूप में टीम की अगुवाई करेंगे। इस बीच, समद को टी-20 में पांच बार कैप किया गया है, लेकिन पिछले साल मार्च से उन्होंने इस प्रारूप में उनका प्रतिनिधित्व नहीं किया है। अभी हाल ही में वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज का हिस्सा थे। उस्मान खान को टीम के प्राथमिक कीपर के रूप में चुना गया है। नियमित कप्तान सलमान अली आगा के साथ-साथ सफेद गेंद के स्टार बाबर आजम, शाहीन अफरीदी और शादाब खान सहित इस टीम का हिस्सा नहीं है।

Asian Games 2026 जापान के लिए पाकिस्तान टीम इस प्रकार है:- साहिबजादा फरहान (कप्तान), अब्दुल समद (उपकप्तान), अबरार अहमद, अहमद दानियाल, आकिफ जावेद, अली रजा, अराफात मिन्हास, हैदर अली, हसन नवाज, माज सदाकत, मोहम्मद सलमान मिर्जा, साद मसूद, सईम अयूब, सुफयान मोकिम और उस्मान खान (विकेटकीपर)

भारत पाक से कहीं ज्यादा सुरक्षित, लिट्टन दास ने बांग्लादेशी सरकार पर उठाए सवाल (Video)

टी-20 विश्वकप 2026 में बांग्लादेश भारत खेलने नहीं आई थी क्योंकि उनके राजनायिक संबंध में काफी कटुता थी। बांग्लादेश ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देकर भारत के टी-20 विश्वकप 2026 से नाम वापस ले लिया था। T20I कप्तान लिट्टन कुमार दास ने अपनी ही सरकार की आलोचना कर कहा कि भारत पाकिस्तान से सुरक्षा मुहैया करवाने में कहीं बेहतर है।

पाक के खिलाफ दूसरे टेस्ट में मैन ऑफ द मैच रहे लिट्टन दास ने यह बातें एक पॉडकास्ट में कहीं। उन्होंने बांग्लादेशी सरकार पर निशाना साधते हुए यह कहा कि , सरकार ने हमसे कहा कि वहां (भारत में) सुरक्षा नहीं है। हम तो पाकिस्तान में भी खेल चुके हैं। पाकिस्तान में तो हमारे होटल के कमरे के बाहर गार्ड बंदूक तानकर खड़े रहते थे। इससे ज्यादा और खतरनाक क्या हो सकता है। अगर पाकिस्तान में खेला जा सकता है तो भारत में क्यों नहीं।

भारत बांग्लादेश के भूराजनैतिक संबंधो के बीत लिट्टन दास का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।


इससे पहले पूर्व कप्तान शाकिब अल हसन ने भी इस साल की शुरुआत में भारत में हुए T20I विश्व कप से बांग्लादेश के बाहर रहने को एक ‘बड़ी गलती’ करार किया था। शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता से हटने के बाद से सुरक्षा कारणों और अपने खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों की वजह से अवामी लीग के सांसद शाकिब बांग्लादेश नहीं लौटे हैं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश ने अपने तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को IPL 2026 टीम कोलकाता नाइट राइडर्स से बाहर किए जाने के बाद टी20 विश्व कप के लिए भारत का दौरा नहीं किया था जिसकी मेजबानी भारत और श्रीलंका ने मिलकर की थी। जिसके बाद बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल किया गया था।हालांकि इसके पीछे मोहम्मद यूनूस सरकार में हिंदूओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सोशल मीडिया पर उठी आवाजें थी जो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अनसुना नहीं कर पाई।

Jharkhand के गाँव से Japan तक | Ashish Tani Purti Inspiring Story | U18 Men’s Asia Cup 2026

झारखंड के खूंटी से आने वाले आशीष तानी पूर्ति ने U18 Men’s Hockey Asia Cup में इतिहास रच दिया। सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 4 गोल और फाइनल में जापान के खिलाफ हैट्रिक लगाकर भारत को गोल्ड दिलाया।
जहाँ एक तरफ उनका परिवार आज भी एक छोटे से प्लास्टिक की चादरों से ढकी छत के नीचे रहता है और माता-पिता 20–30 रुपये कमाते हैं, वहीं आशीष ने अपनी मेहनत से पूरे देश को गर्व महसूस कराया।

Ashish Tani Purti 4 Goals vs Pakistan,
India vs Japan Final, Men’s Hockey Asia Cup Top Scorer

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कुरान ए पाक को चूमकर ईरान की टीम विश्वकप खेलने मैक्सिको हुई रवाना (Video)

कुरान ए पाक को चूमकर ईरान के फुटबॉल खिलाड़ी फीफा विश्वकप खेलने के लिए मेक्सिको रवाना हुए।  इस वाक्ये की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खासी वायरल हुई जब एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों ने विदेशी उड़ान शुरु करने से पहले ऐसा किया।

गौरतलब है कि उत्तरी अमेरिका में होने वाले विश्वकप में ईरान ने ठीक वैसे ही अपने लिए एक अगल मेजबान स्थल की मांग की जैसे पाकिस्तान ने भारत में हुए टी-20 विश्वकप के लिए की थी। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी युद्ध पूरी तरह नहीं थमा है। हालांकि टीम मेक्सिको से अमेरिका जाएगी, जहां उसे ग्रुप चरण के तीन मैच खेलने हैं।

टीम की इस विश्व कप में भागीदारी पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच राजनीतिक तनाव तथा इजराइल के साथ युद्ध जैसी स्थिति के कारण जटिल बनी हुई है। अमेरिका और इस्राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया जिसमें उसके शीर्ष नेता और कई आला अधिकारी मारे गए । ईरान ने जवाब में इस्राइल, अमेरिकी सेना और खाड़ी के अरब देशों को निशाना बनाया। इसने फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी कब्जा कर रखा है जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है।मामूली युद्धविराम के बावजूद ईरान और अमेरिका ने अभी तक स्थायी तौर पर युद्ध बंद नहीं किया है और हमले जारी हैं।

ईरान अपना पहला मैच 15 जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉस एंजिलिस में खेलेगा, इसके बाद छह दिन बाद बेल्जियम से भिड़ेगा। इसके बाद टीम 26 जून को सिएटल में मिस्र के खिलाफ खेलेगी।ईरान और अमेरिका की टीमें यदि अपने-अपने ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहती हैं, तो दोनों के बीच राउंड ऑफ 32 में मुकाबला भी संभव है।

फुटबॉल में ईरान जापान के बाद एशिया की दूसरी ताकतवर टीम है। यही कारण है विश्वकप से पहले टीम तुर्किए में अपने अभ्यास शिविर में करीब 15 दिनों तक पसीना बहा रही थी। टीम चाहेगी कि वह दुश्मन मुल्क में अपना लोहा मनवा के आए।

मंदिर में बिक रहीं ‘मेड इन पाकिस्तान’ चादरें? वीडियो वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच

महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवाड़ में मंदिर में मेड इन पाकिस्तान चादरें बेचे जाने के बाद पुलिस सतर्क हो गई है। एक महिला ने वायरल वीडियो में दावा किया है कि मंदिर से एक खरीदी गई एक चादर पर उसे मेड इन पाकिस्तान का स्टीकर लगा हुआ मिला।

FIFA WC में लगती है एशियाई टीमों को कोटा की बैसाखी, सिर्फ उलटफेर तक सीमित

दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी एशिया में रहती है, लेकिन इसके बावजूद वहां से एक ऐसी फुटबॉल टीम नहीं आ पाती जो फुटबॉल में धाक जमा सके। एशियाई स्तर पर बात होती है, तो उत्तर दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन.. पता नहीं कितने ही नाम सामने आते हैं। ऐसे देशों में फुटबॉल का जुनून भी है और रिवाज भी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी हवा गोल हो जाती है।

पिछले विश्वकप में जापान ने जरुर जर्मनी और स्पेन को 2-1 से हराकर उलटफेर किया था लेकिन एशियाई टीम ज्यादातर मौकों पर उलटफेर करने पर ही सुर्खियों में आती है और फिर गुम हो जीता है। अगर कोटा ना होता शायद फीफा विश्वकप में एशिया से कोई भी टीम चयनित ना होती।

अगर 2002 में दक्षिण कोरिया के सेमीफाइनल में पहुंचने को अलग कर दिया जाए, तो एशियाई देशों ने आज तक वर्ल्ड कप में कोई कमाल नहीं किया हैआम तौर पर एशिया में फुटबॉल की नाकामी की तीन वजहें दी जाती हैं, दम खम की कमी, कुपोषण और ट्रेनिंग तथा रिवाज की कमी। लेकिन बारीकी से देखने पर इन तीनों दावों पर सवाल उठ सकते हैं। समूचा दक्षिण एशिया मजदूरी और कृषि पर आधारित इलाका है, जहां के लोग न सिर्फ अपने देशों में बल्कि विदेशों में भी कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते हैं। अगर गौर से देखा जाए, तो क्रिकेट भी कोई कम दम खम वाला खेल नहीं, जहां कई बार बल्लेबाजों को घंटों क्रीज पर रहना पड़ता है और इस दौरान मेहनत भरे शॉट भी खेलने पड़ते हैं।

क्रिकेट में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका का बोलबाला है। एशियाई फुटबॉल में बार बार कुपोषण को उभारा जाता है। वन गोल नाम की संस्था ने तो बाकायदा एशियाई फुटबॉल संगठनों के साथ मिलकर रिसर्च भी किए हैं और नतीजे निकाले हैं कि किस तरह वहां के बच्चों को विटामिन और दूसरी पोषक चीजें नहीं मिलतीं “और इस वजह से बच्चे अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ मुकाबला नहीं कर सकते”. इस दलील को सिर्फ चीन की मिसाल से काटा जा सकता है।

पिछली सदी तक चीन खेल की दुनिया का एक मामूली देश था, लेकिन पिछले एक दो दशक में यह इतनी तेजी से उभरा है कि ओलिंपिक में सीधे पहले दूसरे नंबर पर जा पहुंचा है। ओलिंपिक खेलों पर ध्यान देने के बाद से चीन में खेल का कायापलट हो चुका है। छोटे छोटे बच्चे तैराकी और दौड़ में नाम कमा रहे हैं।

ऐसे में ले देकर ट्रेनिंग और रिवाज पर ही ध्यान दिए जाने की जरूरत है। चीन ने हाल के दिनों में फुटबॉल पर पैसे लगाने की शुरुआत की है। ड्रोग्बा जैसे कुछ नामी खिलाड़ी चीनी प्रीमियर लीग में खेल चुके हैं, जबकि बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जा रहा है। भारत में फुटबॉल लीग की शुरुआत हुई है, जिसमें काफी पैसा लगाया जा रहा है।

युद्ध से जर्जर मध्यपूर्व में इसकी कमी दिखती है। हालांकि कतर और दुबई जैसे देशों में फुटबॉल को लेकर क्रेज उभर रहा है लेकिन क्रेज से ग्राउंड पर जीत तक के सफर में लंबा फासला होता है।वर्ल्ड कप में एशियाई देशों को शामिल करना मजबूरी है क्योंकि हर महाद्वीप के नाम पर कोटा बंधा है. वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा यूरोप से 13, दोनों अमेरिकी महाद्वीप और कैरिबियाई देशों को आठ, अफ्रीका को पांच और एशिया तथा ओसियाना को मिला कर पांच देश होते हैं. मेजबान को टूर्नामेंट में अपने आप जगह मिल जाती है।

जरूरत है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालमेल बिठाने की। आखिर जब लातिन अमेरिका और अफ्रीका के फुटबॉल खिलाड़ी यूरोप में खेल सकते हैं, तो फिर एशियाई खिलाड़ी क्यों नहीं। इसका मतलब यह कतई नहीं कि यूरोप में फुटबॉल खेलने वाला ही बड़ा स्टार होता है, बल्कि फुटबॉल को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की जरूरत है।

सरकारों को भी लगातार फुटबॉल पर ध्यान देने की जरूरत है, सिर्फ विश्व कप के दौरान नहीं। कतर को आठ साल में वर्ल्ड कप का आयोजन करना है और मेजबान होने के नाते वह अपने आप वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई कर जाएगा, लेकिन तब तक एशियाई फुटबॉल का कितना भला होता है, इसे लेकर बहुत ज्यादा शक नहीं होना चाहिए।

मौजूदा हालात ऐसी है कि फीफा रैंकिंग में सबसे ऊपर जो एशियाई देश है, वह है जापान, जो 18वें नंबर पर है और भारत की तो बात ही छोड़िए, जो 136वें नंबर पर है।

Famous works of Nehru: जवाहरलाल नेहरू के 5 ऐसे बड़े कार्य जो नहीं कर सकता था कोई दूसरा पीएम

Portrait of Indias first Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru with children

Pandit Nehru Achievements: पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। उन्होंने एक ऐसे समय में देश की कमान संभाली थी जब भारत सदियों की गुलामी, विभाजन की त्रासदी, भयंकर गरीबी और सांप्रदायिक दंगों से जूझ रहा था। उस दौर में देश को बिखरने से बचाना और एक आधुनिक राष्ट्र की नींव रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नेहरू के कई फैसले और कार्य ऐसे थे जिन्हें उनके कद, दूरदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय छवि के बिना कोई दूसरा प्रधानमंत्री शायद ही अमली जामा पहना पाता। 

 

1. विविध रियासतों का सफल विलय और 'लोकतांत्रिक' भारत का निर्माण

2. 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत

3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे 'आधुनिक भारत के मंदिरों' की स्थापना

4. 'इसरो' (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत

5. 'हिंदू कोड बिल' के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना

 

उनके 5 ऐसे ही बड़े कार्य निम्नलिखित हैं:

 

1. विविध रियासतों का सफल विलय और 'लोकतांत्रिक' भारत का निर्माण

विभाजन के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती 500 से अधिक स्वायत्त रियासतों (Princely States) को एक सूत्र में बांधना था। हालांकि जमीनी स्तर पर रियासतों के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है, लेकिन इसके पीछे नेहरू की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सोच की बड़ी भूमिका थी।

 

एकता और लोकतंत्र का समन्वय: कई नव-स्वतंत्र देशों में राजशाही खत्म होने के बाद सैन्य शासन या तानाशाही आ गई। लेकिन नेहरू ने सुनिश्चित किया कि सभी रियासतें न केवल भारत का हिस्सा बनें, बल्कि वहां के नागरिकों को भी समान लोकतांत्रिक अधिकार मिलें। उन्होंने भारत को एक 'हिंदू पाकिस्तान' बनने से रोका और बहुसंस्कृतिवाद को बढ़ावा दिया।

 

2. 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन' (NAM) की शुरुआत

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया दो महाशक्तियों- अमेरिका (पूंजीवादी ब्लॉक) और सोवियत संघ (साम्यवादी ब्लॉक) के बीच 'शीत युद्ध' (Cold War) में बंट चुकी थी। उस समय नए आजाद हुए देशों पर किसी एक पाले में जाने का भारी दबाव था।

 

स्वतंत्र विदेश नीति: नेहरू ने किसी भी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने मिस्र के नासिर और युगोस्लाविया के टीटो के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement – NAM) की नींव रखी।

 

ग्लोबल लीडरशिप: इसके जरिए उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक नैतिक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। इस नीति के कारण भारत को अमेरिका और सोवियत संघ दोनों से मदद मिली, जो उस समय किसी अन्य नेता के अंतरराष्ट्रीय रसूख के बिना असंभव था।

 

3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे 'आधुनिक भारत के मंदिरों' की स्थापना

नेहरू का मानना था कि जब तक भारत वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक उसकी आजादी अधूरी है। उन्होंने भारी उद्योगों, बांधों और शैक्षणिक संस्थानों को 'आधुनिक भारत के मंदिर' कहा था।

 

संस्थानों की दूरदर्शी नींव: नेहरू ने देश में IITs (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), IIMs (भारतीय प्रबंधन संस्थान), AIIMS, और IISER जैसे शीर्ष संस्थानों की स्थापना की।

 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper): उन्होंने देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और अनुसंधान में लगाया। आज भारत जो दुनिया का आईटी हब बना है और वैश्विक स्तर पर हमारे डॉक्टर्स-इंजीनियर्स का जो डंका बजता है, उसकी बुनियाद नेहरू ने ही रखी थी।

 

4. 'इसरो' (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत

आज भारत अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार है, लेकिन इसकी शुरुआत तब हुई थी जब भारत के पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं।

 

अंतरिक्ष और परमाणु विजन: नेहरू ने महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा आयोग (जो बाद में BARC बना) और विक्रम साराभाई के साथ मिलकर INCOSPAR (जो बाद में ISRO बना) की स्थापना की।

 

असंभव को संभव बनाना: उस दौर में जब देश में भुखमरी की स्थिति थी, तब अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम पर पैसा खर्च करने के फैसले की भारी आलोचना हो सकती थी। लेकिन नेहरू के अडिग विश्वास के कारण ये संस्थान राजनीति से दूर रहकर देश को आत्मनिर्भर बनाने में सफल रहे।

 

5. 'हिंदू कोड बिल' के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना

आजादी के समय भारतीय समाज अत्यधिक रूढ़िवादी था और महिलाओं के पास पैतृक संपत्ति, तलाक या गोद लेने जैसे बुनियादी कानूनी अधिकार नहीं थे। नेहरू भारत को सामाजिक रूप से भी आधुनिक बनाना चाहते थे।

 

भारी विरोध के बावजूद सुधार: नेहरू ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ मिलकर 'हिंदू कोड बिल' (Hindu Code Bill) को संसद में पेश किया। इस बिल का खुद कांग्रेस के अंदर के वरिष्ठ नेताओं और सनातन रूढ़िवादी संगठनों ने उग्र विरोध किया था।

 

महिला सशक्तिकरण की नींव: नेहरू ने अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी और इस बिल को अलग-अलग हिस्सों में (हिंदू विवाह अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम आदि) पारित कराया। इसके जरिए हिंदू महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, एक विवाह का नियम और तलाक का अधिकार मिला। उस दौर में ऐसा क्रांतिकारी सामाजिक सुधार करना किसी भी अन्य प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं थी।

 

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मिचेल मार्श की चोट के बाद पाकिस्तान के खिलाफ यह विकेटकीपर करेगा कप्तानी

ऑस्ट्रेलिया इस सप्ताहांत से शुरू होने वाली पाकिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज़ के लिए अपने चौथे कप्तान को मैदान में उतारेगा, क्योंकि मिच मार्श दौरे से बाहर होने वाले ताज़ा सीनियर खिलाड़ी बन गए हैं। जोश इंगलिस तीन मैचों की इस सीरीज़ में ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी करेंगे, क्योंकि पता चला है कि मार्श को इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के दौरान टखने में चोट लग गई थी।

50 ओवर के कप्तान पैट कमिंस और उनके उप-कप्तान ट्रैविस हेड – जिन्होंने टी20 में चार बार ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी की है – दोनों ही आईपीएल प्लेऑफ़ के कारण इस दौरे पर मौजूद नहीं हैं, क्योंकि आईपीएल के मैच इस्लामाबाद और लाहौर में होने वाले मैचों के साथ ही पड़ रहे हैं। ऐसे में कप्तानी की बागडोर इंगलिस के हाथों में आ गई है।

दिलचस्प बात यह है कि इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने नवंबर 2024 में भी एक बार यह भूमिका निभाई थी – तब भी पाकिस्तान के खिलाफ ही, और तब भी जब टीम के कई मुख्य खिलाड़ी अनुपस्थित थे। मार्श, जिनकी जगह वनडे टीम में अभी तक किसी और को नहीं लिया गया है, पिछले हफ़्ते लखनऊ सुपर जायंट्स का आईपीएल का आखिरी मैच न खेल पाने के बाद घर लौट आए हैं।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के एक प्रवक्ता ने कहा, “मार्श… आगे की जांच और इलाज के लिए अगले आदेश तक पर्थ में ही रहेंगे।” “बांग्लादेश के ‘व्हाइट बॉल’ (सीमित ओवरों के) दौरे के लिए उनकी उपलब्धता पर उचित समय पर फैसला लिया जाएगा।” कमिंस के साथ-साथ जोश हेज़लवुड और मिचेल स्टार्क भी पाकिस्तान और बांग्लादेश, दोनों ही दौरों से बाहर रहेंगे। आईपीएल खत्म होने के बाद ट्रैविस हेड बांग्लादेश में टीम के साथ जुड़ेंगे।

इसके अलावा, ढाका में होने वाले तीन वनडे मैचों के लिए कूपर कोनोली, ज़ेवियर बार्टलेट और बेन ड्वारशुइस के रूप में कुछ और खिलाड़ी भी टीम में शामिल होंगे। इन तीनों को शुरू में टीम से बाहर रखा गया था, क्योंकि यह माना जा रहा था कि उनकी आईपीएल टीम – पंजाब किंग्स – IPL प्लेऑफ़ में जगह बना लेगी। इस घटनाक्रम ने ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं के सामने उन लॉजिस्टिक (प्रबंधकीय) मुश्किलों को उजागर कर दिया है, जो इस सीरीज़ के कारण पैदा हुई हैं – यह सीरीज़ आईपीएल फ़ाइनल से ठीक एक दिन पहले शुरू हो रही है, और मार्श की चोट ने उनकी मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं। मार्श की अनुपस्थिति से इस बात की संभावना बढ़ गई है कि युवा खिलाड़ी ओली पीक पाकिस्तान के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू कर सकते हैं।

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ वनडे सीरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया की टीम: जोश इंगलिस (कप्तान), एलेक्स कैरी, नाथन एलिस, कैमरन ग्रीन, मैथ्यू कुहनेमैन, मार्नस लाबुशेन, रिले मेरेडिथ, ओलिवर पीक, मैथ्यू रेनशॉ, तनवीर संघा, लियाम स्कॉट, मैट शॉर्ट, बिली स्टेनलेक, एडम जम्पा।

पाकिस्तान की टीम: शाहीन शाह अफ़रीदी (कप्तान), सलमान अली आगा (उप-कप्तान), अब्दुल समद, अबरार अहमद, अहमद दानियाल, अराफ़ात मिन्हास, बाबर आजम, हारिस रऊफ, माज सदाकत, मुहम्मद ग़ाज़ी ग़ोरी, नसीम शाह, रोहेल नज़ीर, साहिबज़ादा फ़रहान, शादाब ख़ान, शमील हुसैन, सुफ़ियान मुक़ीम।

3 गोलों से पाकिस्तान को रौंदकर भारत पहुंचा सेमीफाइनल में (Video)

राउंडग्लास पंजाब एफसी एकेडमी के एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की अंडर-20 पुरुष नेशनल टीम को मालदीव में सैफ अंडर-20 चैंपियनशिप में पाकिस्तान पर 3-0 से शानदार जीत दिलाई। माले के नेशनल फुटबॉल स्टेडियम में हुए इस रोमांचक मुकाबले में ब्लू कोल्ट्स ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की और साथ ही पाकिस्तान को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

भारतीय टीम ने शानदार शुरुआत की, जिसमें एकेडमी के टैलेंट ने शुरुआती गोल करने में अहम भूमिका निभाई और आखिर में मैच में किए गए हर गोल का हिसाब रखा। सिर्फ तीसरे मिनट में, गुरनाज सिंह ने शानदार विजन दिखाया, और एक परफेक्ट वेट वाली थ्रू बॉल को बॉक्स में डाल दिया। विशाल यादव, जो पंजाब एफसी के लिए इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में डेब्यू करने वाले तीसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं, ने भारी दबाव में एरियल पास को शानदार तरीके से कंट्रोल किया और पास के पोस्ट पर पाकिस्तान के गोलकीपर को छकाते हुए भारत को शुरुआती 1-0 की बढ़त दिला दी।

पहले हाफ में पाकिस्तान ने बराबरी के कई मौके बनाए, लेकिन इंडियन डिफेंस और गोलकीपर सूरज अहीबाम डटे रहे और ज़रूरी बचाव करते हुए क्लीन शीट बनाए रखी। हालांकि, दूसरा हाफ पूरी तरह से ओमांग डोडम के नाम रहा, जिन्होंने शानदार दो गोल करके जीत पक्की की और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जिससे यह पक्का हुआ कि इंडिया के तीनों गोल पंजाब एफसी एकेडमी के खिलाड़ियों ने किए। डोडम, जो इंडिया की पिछली सैफ टाइटल जीतने वाली टीम के अकेले लौटने वाले सदस्य थे, ने पिछले साल की अपनी ज़बरदस्त अटैकिंग फॉर्म जारी रखी।

64वें मिनट में, डोडम ने अपनी टाइमिंग से इंडिया की बढ़त दोगुनी कर दी, सब्स्टीट्यूट ऋषि के क्रॉसफील्ड डायगनल पास पर पहली बार में ही शानदार हेडर मारकर गोल कर दिया। इसके बाद डोडम ने गेम के आखिरी मिनटों में शानदार इंडिविजुअल और टीम परफॉर्मेंस दी। 84वें मिनट में टीम के साथी प्रशान जाजो के बॉक्स के अंदर गिरने के बाद, डोडम ने 88वें मिनट में मिली पेनल्टी को टॉप कॉर्नर में बदलकर स्कोर 3-0 कर दिया।

दो गोल करने वालों के अलावा, इंडियन अंडर-20 टीम में पंजाब एफसी एकेडमी के चार और खिलाड़ी हैं, जो इस बात पर ज़ोर देते हैं कि क्लब के पास देश के सबसे अच्छे यूथ सिस्टम में से एक है। यह छह मेंबर, विशाल, दोदुम, करिश सोरम, उषाम सिंह थोंगम्बा, ऋषिकांत मेइतेई लैशराम और अनिकेत यादव, पंजाब एफसी टीम का कोर हिस्सा थे, जिसने हाल ही में एआईएफएफ अंडर-17 यूथ लीग जीती थी।

इस शानदार जीत के साथ, इंडियन टीम आराम से नॉकआउट स्टेज में पहुँच गई। ब्लू कोल्ट्स अब 28 मार्च को बांग्लादेश से भिड़ेंगे और अपने ग्रुप-स्टेज कैंपेन को खत्म करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया में पाक हॉकी टीम की फजीहत? कप्तान बोले- होटल नहीं मिला, खिलाड़ियों ने मांजे बर्तन

pakistan hockey team in australia

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान पाकिस्तानी हॉकी टीम के साथ कथित बदइंतजामी का मामला सामने आया है। कप्तान शकील इमाद बट ने आरोप लगाया कि होटल बुकिंग नहीं होने से खिलाड़ियों को सड़कों पर भटकना पड़ा और खुद खाना बनाकर बर्तन धोने पड़े। वहीं टीम प्रबंधन ने आरोपों को खारिज किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पाकिस्तानी कप्तान का दावा

पाकिस्तान हॉकी टीम के कप्तान शकील इमाद बट ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में होटल में बुकिंग नहीं होने के कारण सड़कों पर भटकी पाकिस्तानी हॉकी टीम। मैच खेलने जाने से पहले बर्तन भी धोने पड़े। दूसरी ओर हॉकी टीम के कोच ने प्रबंधन पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए जांच की मांग की है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने दिए मामले की जांच के आदेश।

 

टीम के कप्तान इमाद बट ने ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद लाहौर हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए पाकिस्तान हॉकी महासंघ के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वह मौजूदा टीम प्रबंधन के साथ आगे नहीं बढ़ सकते।

 

खेल बोर्ड और हॉकी महासंघ में कौन सही?

उन्होंने कहा कि जब मैंने इस बारे में पाकिस्तान खेल बोर्ड से बात की, तो उन्होंने कहा कि टीम के ऑस्ट्रेलिया रवाना होने से पहले हमने पाकिस्तान हॉकी महासंघ को जरूरी धनराशि उपलब्ध करा दी थी। जब मैंने टीम प्रबंधन से बात की, तो उन्होंने कहा कि खेल बोर्ड ने पर्याप्त और पूरे पैसे उपलब्ध नहीं कराए हैं।

 

कप्तान ने क्यों खड़े किए हाथ?

बट ने कहा कि 5 दिनों में विश्व कप क्वॉलीफाइंग राउंड शुरू होने वाला है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ और राष्ट्रीय टीम दोनों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है। अब हमारे पास बहुत कम समय है, इसलिए हम मौजूदा टीम प्रबंधन के साथ आगे नहीं बढ़ सकते।

 

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से ऑस्ट्रेलिया में खेल रही पाकिस्तानी हॉकी टीम के खिलाड़ियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें खिलाड़ी अपना खाना पकाते और बर्तन साफ करते दिखाई दे रहे हैं। कई तस्वीरों में वे बैग के साथ सड़क किनारे बैठे हुए भी नजर आ रहे हैं।

edited by : Nrapendra Gupta