Nida Khan Bail: पुणे के TCS धर्मांतरण केस में अब एक नया मोड़ सामने आया है। नासिक की एक अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 6 जुलाई को कंपनी की पूर्व कर्मचारी निदा खान को जमानत दे दी। सुनवाई करते हुए जज ने कहा कि किसी भी बच्चे को जेल में पैदा होने के दर्द और समाज की बदनामी का सामना नहीं करना चाहिए। जज ने इसकी तुलना भगवान कृष्ण के जेल में जन्म लेने से की।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ? News18 ने इस मामले की जानकारी दी।
कोर्ट का फैसला और भगवान कृष्ण का जिक्र
जमानत देते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश केदार जोशी ने मानवीय आधारों पर जोर दिया:
- खान अभी पांच महीने की गर्भवती हैं।
- कोर्ट ने माना कि जेल के अंदर बच्चे को जन्म देने का दर्द और सामाजिक बदनामी किसी भी महिला के लिए असहनीय होती है।
- जज ने साफ तौर पर कहा, “किसी को भी उस सदमे या सामाजिक बदनामी को नहीं झेलना चाहिए जो जेल में बच्चे के जन्म से जुड़ी होती है, जैसा कि भगवान कृष्ण के मामले में हुआ था।” उन्होंने अजन्मे बच्चे की भलाई के लिए अपने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए यह बात कही।
क्या है मामला?
बता दें कि नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की एक BPO यूनिट से जुड़े आरोपों के बाद, 7 मई 2026 को निदा खान को गिरफ्तार किया गया था।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि निदा खान और अन्य लोगों ने एक महिला सहकर्मी को निशाना बनाया। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक बातें कहीं, उसे बुर्का दिया और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और कार्यस्थल पर उत्पीड़न की कोशिश के तहत उसे इस्लामी रीति-रिवाजों की ट्रेनिंग दी।
इस सार्वजनिक विवाद के बाद, TCS ने जबरदस्ती और उत्पीड़न के मामलों में जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी का हवाला देते हुए निदा खान को नौकरी से निकाल दिया।
निदा खान: जमानत की शर्तें
नासिक कोर्ट ने शुरू में उन्हें ₹75,000 के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे बाद में बदलकर ₹50,000 की प्रोविजनल कैश सिक्योरिटी कर दिया गया। हालांकि, इस राहत के साथ कुछ सख्त कानूनी शर्तें भी जुड़ी हैं, जैसे:
- शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क करने पर पूरी तरह रोक।
- पीड़ित के काम करने की जगह या घर के आस-पास के इलाके में जाने पर रोक।
- कोर्ट की साफ मंजूरी के बिना देश छोड़ने पर रोक।
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