स्वच्छता ही सेवा: सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से सीखी सतत जीवनशैली

स्वच्छता ही सेवा: सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से सीखी सतत जीवनशैली

Padma Shri Dr. Janak Palta McGilligan

इंदौर। स्वच्छता ही सेवा (स्वच्छोत्सव) 2026 के अंतर्गत ICAR–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (NSRI), इंदौर के एक दल ने 20 सितंबर 2026 को इंदौर के ग्राम सनावदिया स्थित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट का भ्रमण किया। इस दौरान दल ने केंद्र की निदेशक एवं पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से संवाद किया और वहां संचालित विभिन्न पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों का अवलोकन किया।

 

कृषि सूक्ष्मजीव विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ. हेमंत माहेश्वरी के साथ तकनीकी अधिकारी राकेश चंद्र शाक्य, रिशप और दीपक उपाध्याय ने केंद्र में सौर ड्रायर, सौर ऊर्जा आधारित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, विद्युत उत्पादन इकाई और पवनचक्की के संचालन एवं उपयोगिता की जानकारी प्राप्त की।

 

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के साथ चार दशकों से अधिक समय से किए जा रहे अपने सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यों की प्रेरणादायी यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि 16 वर्ष की आयु में ओपन-हार्ट सर्जरी के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।

 

उन्होंने अपने जीवन-दर्शन को साझा करते हुए कहा, “हम कैसे मरेंगे, यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हम कैसे जिएंगे, यह हमारे हाथ में है। समस्त प्राणियों के साथ सद्भावना से जीकर विश्व के कल्याण के लिए कार्य करना ही जीवन का उद्देश्य है।”

Padma Shri Dr. Janak Palta McGilligan

डॉ. मगिलिगन ने ग्रामीण एवं जनजातीय महिलाओं के सशक्तीकरण, आजीविका विकास, क्षमता निर्माण और हरित तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बरली डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट फॉर रूरल वुमेन की स्थापना की। संस्थान द्वारा सौर ऊर्जा आधारित खाद्य प्रसंस्करण, सौर सुखाने की तकनीक, पर्यावरण-अनुकूल कृषि, स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत सामुदायिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।

 

बरली संस्थान द्वारा मध्य प्रदेश की पहली सौर रसोई भी स्थापित की गई है, जिसमें प्रतिदिन लगभग 150 लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है।

 

डॉ. मगिलिगन ने बताया कि उन्होंने अलीराजपुर, झाबुआ और धार जिलों के 302 गांवों में स्वच्छता एवं आजीविका से संबंधित प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों में योगदान दिया है। वहीं, जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के माध्यम से अब तक 1,87,000 लोगों का मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण किया जा चुका है।

 

उन्होंने रियो डी जेनेरियो में आयोजित विश्व पृथ्वी शिखर सम्मेलन (World Earth Summit) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों को भी प्रस्तुत किया है।

 

डॉ. मगिलिगन ने कहा कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत और भौतिक साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीरो-वेस्ट, केमिकल-फ्री और प्लास्टिक-फ्री जीवनशैली, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग तथा प्रकृति संरक्षण से जुड़ी एक व्यापक अवधारणा है।

 

इस अवसर पर नोएडा से विशेष अतिथि श्रीमती आर्यमा सान्याल (सेवानिवृत्त एयरपोर्ट डायरेक्टर), चंडीगढ़ से श्रीमती पूनम पलटा (शिक्षिका), आयुर्वेद की छात्रा दीपिका तथा इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता विनय ककरेचा भी उपस्थित रहे।

 

NSRI की टीम ने डॉ. मगिलिगन की टिकाऊ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से प्रेरणा ली। दल ने संस्थान में ग्रीन-कैंपस पहल, कचरा प्रबंधन, संसाधन संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तौर-तरीकों को और मजबूत करने पर जोर दिया। 

 

इस अवसर पर यह संदेश भी सामने आया कि “स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं है; यह जीवन जीने का एक टिकाऊ तरीका और सामूहिक जिम्मेदारी है।”

रिपोर्ट:

डॉ. हेमंत माहेश्वरी

वैज्ञानिक, कृषि सूक्ष्मजीव विज्ञान

ICAR–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (NSRI), इंदौर