रूस से तेल खरीदने पर 100% अमेरिकी टैरिफ का भारत और चीन पर क्यों पड़ेगा सबसे बड़ा असर?

रूस से तेल खरीदने पर 100% अमेरिकी टैरिफ का भारत और चीन पर क्यों पड़ेगा सबसे बड़ा असर?

US Tariff on Russian Oil

US Tariff on Russian Oil: यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच अमेरिका ने रूस के ऊर्जा राजस्व (Energy Revenue) पर नकेल कसने के लिए एक बड़ा विधायी कदम उठाया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बाधा पार कर आगे बढ़ गया है। 15 सितंबर को हुए इस मतदान में विधेयक के पक्ष में 214 और विरोध में 211 वोट पड़े।

 

यदि यह विधेयक अंतिम रूप से पारित होकर कानून बनता है, तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ (Tariff) लगाने का असीमित अधिकार दे देगा। ALSO READ: तेल संकट पर ट्रंप की दो टूक: यूक्रेन बंद करे रिफाइनरियों पर ड्रोन हमले, जेलेंस्की ने दिया यह जवाब

बिल में भारत और चीन निशाने पर क्यों?

हालांकि अमेरिकी सीनेट द्वारा 7 अगस्त को 86-11 के भारी बहुमत से पारित इस बिल के ड्राफ्ट में भारत या चीन का नाम सीधे तौर पर दर्ज नहीं है, लेकिन इसमें 'रूस से तेल और प्राकृतिक गैस का आयात करने वाले दुनिया के 5 सबसे बड़े देशों' का स्पष्ट उल्लेख है।

  • रूस के सबसे बड़े खरीदार : फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए और रूसी तेल का बहिष्कार किया। इसके बाद भारत और चीन रूसी कच्चे तेल (Discounted Russian Crude) के सबसे बड़े खरीदार बनकर उभरे।
  • यूक्रेन युद्ध का वित्तीय पोषण : अमेरिका का तर्क है कि भारत और चीन द्वारा की जा रही रूसी तेल की खरीद से मॉस्को को भारी विदेशी मुद्रा मिलती है, जिसका इस्तेमाल वह युद्ध को फंड करने के लिए कर रहा है। ALSO READ: अमेरिका में बड़ा चुनावी दांव: ट्रंप का ऐलान- हर वयस्क नागरिक को मिलेंगे 5000 डॉलर

भारत के लिए यह दोहरा झटका क्यों साबित हो सकता है?

यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस कानून के तहत भारत पर 100% टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक और गंभीर प्रभाव पड़ेंगे:

  • अमेरिका को होने वाले निर्यात पर संकट : भारत अमेरिका को इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र (Textiles) और जेम्स एंड ज्वैलरी का भारी मात्रा में निर्यात करता है। 100% टैरिफ लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में दो गुने महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा और महंगा तेल : भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। यदि भारत अमेरिकी दबाव में रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करता है, तो उसे मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है।

बिल के प्रमुख प्रावधान : 'शैडो फ्लीट' पर भी शिकंजा

यह विधेयक केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रूसी ऊर्जा तंत्र की रीढ़ पर हमला करता है:

  • रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध : रूस के नेतृत्व और उसकी सरकारी तेल कंपनियों पर आर्थिक पाबंदियों को और सख्त किया जाएगा।
  • 'शैडो फ्लीट' (Shadow Fleet) के खिलाफ कार्रवाई : रूस अमेरिकी और यूरोपीय प्राइस कैप (Price Cap) से बचने के लिए जिन अघोषित और बिना बीमा वाले तेल टैंकरों के बेड़े (Shadow Fleet) का इस्तेमाल कर रहा है, उन जहाजों और उनसे जुड़ी शिपिंग कंपनियों को भी प्रतिबंधित किया जाएगा।

अमेरिका में ट्रंप को मिलने वाले असीमित अधिकारों पर बहस

इस बिल को लेकर अमरीकी संसद (कैपिटल हिल) के भीतर भी तीखी बहस छिड़ी हुई है:

  • डेमोक्रेट्स की चिंता : विधेयक का विरोध करने वाले डेमोक्रेट सांसदों (जैसे विदेश मामलों की समिति के रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स) का कहना है कि यह बिल राष्ट्रपति को बिना किसी ठोस सुरक्षा उपाय या संसदीय निगरानी के टैरिफ लगाने की 'असीमित और तानाशाही शक्तियां' दे देता है।
  • प्रतिनिधि सभा का शेड्यूल : अमेरिकी प्रतिनिधि सभा 17 सितंबर से अवकाश पर जा रही है और मध्यावधि चुनावों के बाद 9 नवंबर को ही दोबारा मिलेगी। ऐसे में 16 सितंबर का अंतिम मतदान इस विधेयक के भविष्य और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है।

रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ का यह प्रस्ताव अमरीका द्वारा भारत और चीन जैसे वैश्विक खिलाड़ियों पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। भारत के लिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और अमेरिका  के साथ अपने रणनीतिक व व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन साधना अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।