
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता कर एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। देश की आजादी के बाद अब तक 12 बार यह प्रक्रिया हो चुकी है, जिसमें 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में एसआईआर कराया गया। इसके बावजूद राहुल गांधी मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने का दावा कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
मीडिया से चर्चा करते हुए हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों का दोहराव समाप्त करना और विदेशी नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर रखना निर्वाचन प्रक्रिया की बुनियादी आवश्यकताएं हैं। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखते हुए अपात्र नामों को हटाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के साथ भाजपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी शामिल रहते हैं। किसी भी व्यक्ति को मतदाता सूची के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है। उन्होंने गुजरात और अरुणाचल प्रदेश के उदाहरण देते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में मतदाताओं के सत्यापन के लिए निर्वाचन कर्मचारियों को काफी मेहनत करनी पड़ रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर देश में भ्रम और अविश्वास का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की इस राजनीति के खिलाफ भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत इंदौर, जबलपुर और भोपाल में पदयात्राएं निकाली जा चुकी हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी पदयात्राएं आयोजित की जाएंगी। उन्होंने बताया कि इन यात्राओं में डॉक्टर, वकील, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने भाग लिया।
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा और बहस के लिए संसद का मंच निर्धारित है, लेकिन राहुल गांधी सदन में बहस करने के बजाय हंगामा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जब सदन में अपना पक्ष रखने लगी, तब राहुल गांधी और कांग्रेस के सांसद सदन से चले गए।
शुक्ला ने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची में वास्तव में गड़बड़ी हुई है तो कांग्रेस किसी ऐसे पात्र मतदाता का प्रमाण सामने क्यों नहीं रखती, जिसका नाम गलत तरीके से हटाया गया हो। उन्होंने कहा कि बिहार में एसआईआर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में 18 याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन उनके अनुसार विपक्ष अपने आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सका। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार के बाद निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एसआईआर को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने लोकसभा के तीन चुनावों के साथ बड़ी संख्या में विधानसभा चुनाव भी गंवाए हैं। ऐसे में कांग्रेस को अपनी लगातार चुनावी पराजय का कारण अपनी नीतियों, नेतृत्व और जनाधार में तलाशना चाहिए, न कि निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया, लेकिन वास्तव में सिर्फ 25 हजार लोग ही जुट सके थे। विपक्षी दलों की इस रैली के लिए दीपावली से ठीक पहले दिल्ली के पुराने बाजारों के लगभग तीन लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बंद करना पड़ा, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। व्यापारिक संगठनों द्वारा प्रदर्शन की तारीख बदलने की अपील के बावजूद कांग्रेस ने उनकी बात नहीं मानी।


