Project Cheetah: भारत में चीतों का नामोनिशान 1952 में पूरी तरह से समाप्त होने की घोषणा के बाद आज एक ऐसी खबर आई है, जिससे प्रोजेक्ट चीता से जुड़ा हर एक शख्स बेहद खुश है। मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी एक मादा चीता ने चार बच्चों को जन्म दिया है। यह खबर प्रोजेक्ट चीता के चार पूरा होने के ठीक एक दिन बाद मिली है। इससे भारत में चीतों की आबादी फिर से शुरू करने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिला है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर और वीडियो के साथ इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए “सच में ऐतिहासिक और खुशी का पल” बताया। यादव ने कुनो नेशनल पार्क और प्रोजेक्ट चीता टीमों को बधाई देते हुए कहा, “चार साल, चार नई जिंदगी — उम्मीद, हिम्मत और भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता का एक सुंदर प्रतीक।”
A truly historic and joyous moment for Project Cheetah!
A day after India’s Cheetah Project completed four years, KGP12, an Indian-born female cheetah, has given birth to four cubs in Kuno.
Four years, four new lives—a beautiful symbol of hope, resilience and the growing… pic.twitter.com/f1zbqSvx1b
— Bhupender Yadav (@byadavbjp) September 18, 2026
चार शावकों को जन्म देने वाली मादा चीता का नाम KGP12 बताया जा रहा है। यह कुनो में पैदा हुए उन भारतीय चीतों में से एक है, जो इस प्रजाति को देश में फिर से लाए जाने के बाद पैदा हुए थे। बता दें, प्रोजेक्ट चीता को भारत में चीतों की आबादी फिर से शुरू करने के मकसद से 17 सितंबर 2022 को लॉन्च किया गया था। इसके लिए नामीबिया से आठ अफ्रीकी चीतों को कुनो नेशनल पार्क लाया गया था। बाद में दक्षिण अफ्रीका से और चीतों के आने के साथ प्रोग्राम को और विस्तार मिला।
1952 में भारत में चीता की प्रजाति के खत्म होने की घोषणा की गई थी। इसके बाद जंगली चीतों की नस्ल को बनाने की भारत की कोशिशों में यह जन्म एक और अहम पड़ाव है। इसके बाद भारत स्थानीय तौर पर खत्म होने के बाद चीतों को जंगल में फिर से लाने वाला एकमात्र देश बन गया। चार स्वस्थ शावकों का जन्म खास तौर पर अहम है क्योंकि दूसरी पीढ़ी का जन्म इस बात का संकेत देते हैं कि फिर से लाई गई आबादी भारतीय हालात के हिसाब से ढलने लगी है।
वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट जंगल में सफल ब्रीडिंग को एक कामयाब कंजर्वेशन प्रोग्राम के सबसे मजबूत संकेतों में से एक मानते हैं। इससे पहले सीएनबीसी नेटवर्क 18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि देश में प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने पर देश में चीतों की आबादी बढ़कर 52 हो गई है, जिसमें 32 देश में पैदा हुए हैं। पिछले चार सालों में, प्रोजेक्ट चीता को कामयाबी और नाकामी दोनों का सामना करना पड़ा है, जिसमें बीमारी, चोट और पर्यावरण की चुनौतियों के कारण कई बड़े चीतों और शावकों की मौत शामिल है।
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