
Tamil Nadu politics CM Vijay: दक्षिण भारत की राजनीति का नक्शा बदल रहा है और इस नए राजनीतिक केंद्र में खड़े हैं—तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और ‘तमिलगा वेट्री कषगम’ (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay)।
अक्टूबर 2026 की शुरुआत में मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उप-चुनावों में जीत हासिल करने के बाद अचानक ऐसी राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। महज 24 घंटे के भीतर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विजय के निजी आवास पर जाकर उनके साथ लंच किया, तो अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चेन्नई मेट्रो के उद्घाटन के दौरान सीएम विजय को अपने साथ रखकर गर्मजोशी दिखाई। ALSO READ: घूसखोर पुलिसवालों पर गाज! किसी की नौकरी गई तो कोई सस्पेंड, जानें CM विजय के एक्शन की पूरी इनसाइड स्टोरी
सवाल उठना लाजमी है कि लगातार दो बड़े राष्ट्रीय नेता—एक तरफ विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा और दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री—अचानक तमिलनाडु के इस नए क्षेत्रीय नेता पर इतने मेहरबान क्यों दिख रहे हैं?
द्रविड़ राजनीति में 50 साल पुराने ‘बाइपोलर‘ समीकरण का टूटना
तमिलनाडु में पिछले पांच दशकों से राजनीति द्रविड़ कषगमों—DMK और AIADMK—के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विजय की पार्टी TVK ने मुख्यधारा की राजनीति में सीधी धमक दी है। उप-चुनावों में जीत के बाद TVK का विधानसभा में आंकड़ा बढ़कर 109 हो गया है।
- कांग्रेस की मजबूरी: कांग्रेस तमिलनाडु में DMK के साथ गठबंधन में हमेशा “छोटे भाई” की भूमिका में रही है। DMK राज्य में कभी सत्ता-साझेदारी (Coalition Government) के लिए तैयार नहीं हुई। ऐसे में कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में विजय के ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री एलायंस’ (SSJVA) के रूप में एक नया और मजबूत क्षेत्रीय साझेदार देख रही है।
- बीजेपी की रणनीति: बीजेपी तमिलनाडु में पैर जमाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही है। AIADMK के कमजोर पड़ने और DMK के मजबूत होने के बीच, बीजेपी को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो एंटी-DMK वोटों को एकजुट कर सके। पीएम मोदी का विजय के प्रति दोस्ताना रुख यह दर्शाता है कि दिल्ली केंद्र-राज्य संबंधों में विजय को पूरी तवज्जो देने के लिए तैयार है।

‘विजय फॉर पीएम‘ विवाद और विजय का ‘बैलेंसिंग एक्ट‘
TVK के कुछ नेताओं ने पिछले दिनों विजय को 2029 में संभावित प्रधानमंत्री चेहरा के रूप में पेश करने की कोशिश की थी, जिसने कांग्रेस के भीतर हलचल पैदा कर दी थी। हालांकि, राहुल गांधी के साथ हुई बैठक ने इस असहजता को खत्म किया।
विजय ने जिस तरह से राहुल गांधी के साथ सौहार्दपूर्ण बैठक की, लेकिन उनके राजनीतिक मंच को साझा करने से परहेज किया और फिर पीएम मोदी से मिलकर तमिलनाडु के लिए ₹5,110 करोड़ के फंड की मांग रखी, वह दिखाता है कि विजय राष्ट्रीय राजनीति में अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता‘ (Strategic Autonomy) बनाए रखना चाहते हैं।
चाहे राहुल गांधी का ‘लंच’ हो या पीएम मोदी की ‘मेट्रो राइड’, दोनों घटनाएं यह साबित करती हैं कि तमिलनाडु अब केवल दो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों की जागीर नहीं रहा। थलपति विजय न केवल राज्य के प्रशासनिक मुखिया बन चुके हैं, बल्कि दिल्ली की सत्ता के गलियारों में भी वे एक ऐसे ‘किंगमेकर’ के रूप में उभर रहे हैं, जिसे न तो कांग्रेस नजरअंदाज कर सकती है और न ही बीजेपी।


