NPS में अगर 25 की उम्र में शुरू कर देते हैं निवेश तो मंथली ₹10000 निवेश से रिटायरमेंट तक बनेगा ₹3.4 करोड़ का फंड

रिटायरमेंट प्लानिंग करने में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे जरूरी यह कि सिर्फ 10 साल पहले निवेश शुरू कर देने से आप तीन गुना बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। डीएसपी फंड के सीईओ राहुल भगत ने यह बताया। अगर आप मंथली 10,000 रुपये निवेश करते हैं तो 10 साल में आप सिर्फ 12 रुपये ज्यादा निवेश करेंगे, लेकिन आपके लिए तीन गुना रिटायरमेंट फंड तैयार हो जाएगा।

मंथली 10000 निवेश पर 35 साल में 3.4 करोड़ फंड

भगत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति हर महीने 10,000 रुपये का निवेश करता है तो 25 साल में करीब 1.2 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इस कैलकुलेशन में सालाना रिटर्न 10 फीसदी माना गया है। उन्होंने कहा कि अगर निवेश की अवधि को बढ़ाकर 35 साल कर दिया जाए तो करीब 3.4 करोड़ रुपये का फंड बन सकता है। इसका मतलब है कि निवेश सिर्फ 10 साल शुरू करने पर फंड तीन गुना हो जाता है।

कंपाउंडिंग की वजह से रिटर्न पर रिटर्न मिलता है

इसकी बड़ी वजह कंपाउंडिंग का असर है। कंपाउंडिंग की वजह से लंबी अवधि में निवेश पर मिलने वाला रिटर्न आगे और रिटर्न जेनरेट करता है। हालांकि, उपर्युक्त उदाहरण सिर्फ चीजों को समझने के लिए है। एक्चुअल रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। मार्केट लिंक्ड प्रोडक्ट के रिटर्न की गांरटी नहीं दी जा सकती।

जल्द शुरुआत और निवेश बढ़ाने पर बनेगा बड़ा फंड

भगत ने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में बताया कि जल्द शुरुआत, इनकम बढ़ने के साथ निवेश के अमाउंट को बढ़ाने और सही एसेट ऐलोकेशन का काफी ज्यादा असर रिटायरमेंट फंड पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर आप हर साल मंथली इनवेस्टमेंट सिर्फ 5 फीसदी बढ़ाते हैं तो भी लंबी अवधि में बनने वाले आपके रिटायरमेंट फंड पर बड़ा असर पड़ता है।

लंबी अवधि के निवेश पर शेयरों में उतार-चढ़ाव का कम असर

उन्होंने कहा कि 20 साल से ज्यादा और 30 साल से ज्यादा उम्र के निवेशक आम तौर पर इक्विटी में ज्यादा निवेश करते हैं। इसकी वजह यह है कि उनके पास लंबे समय तक निवेश करने की गुंजाइश होती है। लंबी अवधि के निवेश पर शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का कम असर पड़ता है। अगर बीच में बाजार गिरता भी है तो उसमें रिकवरी आ जाती है।

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रिटायरमेंट फंड पर इनवेस्टमेंट कॉस्ट का भी पड़ता है असर 

इनवेस्टमेंट कॉस्ट का असर भी फाइनल रिटायरमेंट फंड पर पड़ता है। भगत ने एक उदाहरण की मदद से इसे समझाने की कोशिश की। मान लीजिए कोई व्यक्ति हर महीने 10000 रुपये का निवेश 30 साल तक करता है। इस पर सालाना 10 फीसदी ग्रॉस रिटर्न मिलता है। सालाना 0.1 फीसदी चार्ज होने पर यह निवेश 30 साल में बढ़कर करीब 2 करोड़ रुपये हो जाएगा। सालाना चार्ज 1 फीसदी होने पर फाइनल फंड करीब 1.7 करोड़ रुपये बनेगा। इसका मतलब है कि एनुअल चार्ज में इस फर्क से फंड में करीब 33 लाख रुपये का फर्क देखने को मिलता है।