मैनेजमेंट व साइंस के छात्रों ने डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से सीखी पर्यावरण आधारित अर्थव्यवस्था

मैनेजमेंट व साइंस के छात्रों ने डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से सीखी पर्यावरण आधारित अर्थव्यवस्था

janak palta vaishnav college indore

श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस ने BCA, BBA और B.Sc. पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए सनावादिया गाँव स्थित ‘जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का एक शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया।

 

सेंटर की डायरेक्टर पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने सभी छात्रों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने छात्रों को संपूर्ण जैव-विविधता (बायोडायवर्सिटी) परिसर का भ्रमण कराया, जो सौर एवं पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) से संचालित होता है और पूरी तरह आत्मनिर्भर है। इस भ्रमण के माध्यम से छात्रों को टिकाऊ व सतत जीवनशैली (सस्टेनेबल लाइफस्टाइल) के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने का प्रत्यक्ष अवसर मिला।

 

प्रेरणादायक जीवन यात्रा और पर्यावरण संरक्षण

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने अपनी प्रेरणादायक जीवन यात्रा और पर्यावरण की स्थिरता के प्रति अपने समर्पण को छात्रों के साथ साझा किया। उन्होंने दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपनाने के महत्व पर बल दिया और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में व्यक्तिगत भूमिका को रेखांकित किया। उनके अनुभवों और सतत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार संरक्षक बनने के लिए प्रेरित किया।

 

ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा और व्यावहारिक उपाय

उन्होंने ऊर्जा एवं भोजन की बढ़ती कमी की चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए ऊर्जा संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, सोलर कुकर, वैकल्पिक जैव-इंधन (बायोफ्यूल), औषधीय वनस्पति विज्ञान, जैविक खेती और संसाधनों के संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी का प्रभावी उपयोग शामिल था। छात्रों ने उन व्यावहारिक उपायों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त की जो भोजन की निरंतर उपलब्धता और पर्यावरण-अनुकूल अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने में सहायक हो सकते हैं।

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ज़ीरो वेस्ट मैनेजमेंट और ‘नो शॉपिंग’ दर्शन

उन्होंने ऊर्जा और भोजन की बर्बादी के कारणों व दुष्परिणामों को समझाते हुए ज़ीरो वेस्ट मैनेजमेंट (शून्य अपशिष्ट प्रबंधन) तथा विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन के महत्व पर चर्चा की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी ‘नो शॉपिंग’ फिलॉसफी (न्यूनतम खरीदारी आधारित जीवनशैली) को साझा किया। उन्होंने एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य के निर्माण में पर्यावरण-आधारित अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

 

शैक्षणिक भ्रमण के प्रमुख निष्कर्ष (Learning Outcomes)

इस शैक्षणिक दौरे से छात्रों ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु समझे:

सतत विकास: सस्टेनेबल डेवलपमेंट के मूलभूत सिद्धांतों की समझ विकसित हुई।

संसाधन संरक्षण: भोजन और ऊर्जा संरक्षण के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी प्राप्त की।

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता: मौखिक स्वच्छता (ओरल केयर) और हाइजीन उत्पादों के प्रति जागरूकता प्राप्त की।

नवीन ऊर्जा विकल्प: पाक-कला तकनीक और बायो-कंप्रेस्ड ईंधन के उपयोग के बारे में जाना।

सामूहिक जिम्मेदारी: ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा में व्यक्तिगत और सामूहिक उत्तरदायित्व के महत्व को पहचाना।

सकारात्मक दृष्टिकोण: दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया।

 

प्रेरणादायक अनुभव और आभार

संस्थान के फैकल्टी सदस्य और छात्र यह देखकर अत्यंत प्रभावित हुए कि किस प्रकार एक अकेली महिला इतने विशाल और प्रेरणादायक अभियान को सफलतापूर्वक संचालित कर रही है।

 

‘जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का यह शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक रहा। UNEP कार्यक्रम के तहत जल और वायु संरक्षण पर आयोजित सत्र ने विद्यार्थियों को पर्यावरण स्थिरता की गहरी समझ प्रदान की। इस भ्रमण ने सभी प्रतिभागियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अपना योगदान देने तथा एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य के निर्माण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

 

रिपोर्ट स्रोत: यह समाचार डॉ. क्षमा पैठणकर, डीन (एकेडमिक्स) एवं विभागाध्यक्ष (कंप्यूटर साइंस), श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदौर द्वारा प्रेषित रिपोर्ट पर आधारित है।