
शहर की सुप्रसिद्ध रचनाकार ज्योति जैन की चार पुस्तकों का भव्य लोकार्पण एवं परिचर्चा समारोह ‘शिवना प्रकाशन’ के तत्वावधान में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस गरिमामयी साहित्यिक कार्यक्रम में वक्ताओं ने लेखिका के रचनाकर्म और उनकी नई पुस्तकों पर खुले दिल से अपने विचार व्यक्त किए।
1. कार्यक्रम का शुभारंभ एवं स्वागत भाषण
सरस्वती वंदना: कार्यक्रम का प्रारंभ भारती भाटे द्वारा प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ गान, दिव्या मंडलोई द्वारा ‘सरस्वती वंदना’ और अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
स्वागत वक्तव्य: शिवना प्रकाशन के पंकज सुबीर ने समारोह में उपस्थित अतिथियों और प्रबुद्ध जनसमूह का स्वागत किया। उन्होंने लेखिका को ‘सुपर वुमन’ की संज्ञा देते हुए चूल्हे-चौके से निकलकर किताबों का चौका लगाने पर बधाई दी। लेखिका को आत्मीयता से बहन बताते हुए उन्होंने इंदौर से बड़ी संख्या में आए साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति की सराहना की।
2. चार कृतियों का लोकार्पण एवं समर्पण
समारोह के दौरान मंचासीन अतिथियों द्वारा लेखिका ज्योति जैन की चार चर्चित कृतियों का लोकार्पण किया गया:
- ‘घूरना मना है’
- ‘मूँडो देखी ने तिलक काढ़े’
- ‘षष्ठीपूर्ति’
- ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’
लेखिका ने अपनी ये चारों पुस्तकें अपने नातियों और नातिनों को समर्पित की हैं।
3. लेखिका का वक्तव्य एवं रचना प्रक्रिया
लोकार्पण के पश्चात ज्योति जैन ने अपनी रचना प्रक्रिया के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सभागार में उपस्थित सभी लोग ब्रह्मांड के सितारे और नक्षत्र हैं, जिनके स्नेहाशीष ने ही उन्हें ‘ज्योति’ बनाया है। उन्होंने समय का सम्मान करने को लेखन की साधना बताया और अपने व्यंग्य लेखन की शुरुआत से जुड़े संस्मरण सुनाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री की सहजता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने यह शेर पढ़ा:
“था नहीं उसे अपने कद का अंदाज़,
आसमाँ है वो, सिर झुकाए बैठा है।”
इसके साथ ही उन्होंने शिवना प्रकाशन के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया।
4. अतिथियों के विचार
मुख्य अतिथि (डॉ. विकास दवे): मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने लेखिका को चार साहित्यिक ‘संततियों’ के जन्म की बधाई दी और खचाखच भरे सभागार को ‘स्नेह की विजय का पर्व’ बताया। उन्होंने लेखिका की ‘नज़रबट्टू’, ‘शिरीन’, ‘इफ़ यू लव समबडी’, ‘घूरना मना है’ और ‘साड़ी बुला रही है’ जैसी रचनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने मालवी संग्रह के लिए विशेष बधाई देते हुए गृहस्थी के साथ किए गए इस साहित्य सृजन को अत्यंत प्रशंसनीय बताया।
अध्यक्षीय उद्बोधन (बी. एल. आच्छा): प्रसिद्ध आलोचक एवं व्यंग्यकार बी. एल. आच्छा ने कृतियों की गहराई और सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यंग्य विधा आलोचना नहीं, बल्कि तर्क का विषय है। उन्होंने लघुकथाओं के अंतर्मन पर गहरे स्पर्श की सराहना की और कहा कि जीवन को बोनसाई (सीमित) करने की नहीं, बल्कि छांव देने की आवश्यकता है।
5. अतिथि सम्मान एवं संचालन
विशेष स्वागत: कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया का स्वागत लेखिका ज्योति जैन ने स्वयं किया। अन्य मंचासीन अतिथियों का स्वागत शरद कुमार जैन, अमर कौर चड्ढा, महेंद्र जैन, वैजयंती दाते, राजेंद्र कुमार तिवारी और डॉ. शोभा प्रजापति द्वारा किया गया।
स्मृति चिह्न वितरण: समारोह के दौरान हेमंत बड़जात्या, चेतन कुसुमाकर और विजयलक्ष्मी ने अतिथियों एवं सहयोगियों को स्मृति चिह्न भेंट किए। लेखिका ज्योति जैन ने भारती भाटे, दिव्या मंडलोई और कार्यक्रम का कुशल संचालन करने वाली स्मृति आदित्य को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
आभार प्रदर्शन: कार्यक्रम के अंत में स्वर्णिम माहेश्वरी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शहर की कई गणमान्य और प्रसिद्ध हस्तियां उपस्थित रहीं।


