केमिकल कंपनी एपिग्रल (Epigral) के शेयरों में सोमवार, 2 नवंबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद शेयर 9% उछलकर 956 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 27.5% बढ़कर 65 करोड़ रुपये रहा, जबकि रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 27.1% बढ़कर 746 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह उछाल ऐसे वक्त आया है, जब पिछले एक साल में शेयर 43.7% तक टूट चुका है। कंपनी में प्रमोटर की होल्डिंग 68% है.
लंबी गिरावट के बीच एक दिन की बड़ी छलांग
एपिग्रल का शेयर पिछले काफी वक्त से दबाव में था। इस साल अब तक शेयर 24.6% गिर चुका है और पिछले एक साल का हिसाब देखें तो गिरावट 43.7% की है। यानी साल भर पहले जिस निवेशक ने इसमें पैसा लगाया होगा, उसकी पूंजी का बड़ा हिस्सा कागज पर कट चुका है।
इसी माहौल में सोमवार को नतीजों ने शेयर में नई जान फूंकी। कारोबार के दौरान शेयर 9% चढ़कर 956 रुपये तक गया। हालांकि, बाजार बंद होते-होते शेयर में हल्की गिरावट आई और स्टॉक 943 रुपये पर बंद हुआ.
मुनाफा और कमाई, दोनों में 27% से ज्यादा की बढ़त
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में एपिग्रल का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 65 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में यह 51 करोड़ रुपये था। यानी मुनाफे में 14 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ, जो 27.5% की बढ़त है।
कमाई की रफ्तार भी लगभग इतनी ही तेज रही। सितंबर तिमाही में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 746 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 587 करोड़ रुपये से 27.1% ज्यादा है। रुपयों में देखें तो एक साल में तिमाही कमाई 159 करोड़ रुपये बढ़ गई।
मार्जिन पर कच्चे माल ने डाला दबाव
नतीजों की तस्वीर पूरी तरह चमकदार नहीं रही। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रदर्शन सुस्त रहा। EBITDA सिर्फ 2.9% बढ़कर 136.2 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 132.3 करोड़ रुपये था। जहां रेवेन्यू 27% से ज्यादा बढ़ा, वहीं EBITDA में बढ़त 4 करोड़ रुपये से भी कम रही।
इसका असर मार्जिन पर साफ दिखा। EBITDA मार्जिन 420 बेसिस पॉइंट घटकर 18.3% पर आ गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 22.5% था। कंपनी ने इसकी वजह कच्चे माल की ऊंची कीमतों को बताया है। यानी बिक्री तो बढ़ी, लेकिन हर 100 रुपये की कमाई में से ऑपरेटिंग मुनाफे के रूप में बचने वाला हिस्सा पहले से कम हो गया।
CMD मौलिक पटेल को दूसरी छमाही पर भरोसा
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मौलिक पटेल ने कहा कि चुनौती भरे ऑपरेटिंग माहौल के बावजूद एपिग्रल ने तिमाही के दौरान 28% की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की। उनके मुताबिक यह ग्रोथ ज्यादा वॉल्यूम और बेहतर रियलाइजेशन की वजह से आई।
आगे की तस्वीर पर पटेल ने कहा, “वित्त वर्ष की दूसरी छमाही परंपरागत रूप से पहली छमाही से बेहतर प्रदर्शन करती है, इसलिए हम FY27 की दूसरी छमाही को लेकर पॉजिटिव आउटलुक बनाए हुए हैं।”
CPVC और ECH की क्षमता होगी दोगुनी
कंपनी ने बताया कि क्लोरीनेटेड पॉलीविनाइल क्लोराइड यानी CPVC रेजिन और एपिक्लोरोहाइड्रिन यानी ECH की क्षमता बढ़ाने वाले प्रोजेक्ट, साथ ही विंड-सोलर हाइब्रिड पावर प्लांट, अपने अंतिम चरण में हैं। इन प्रोजेक्ट्स के एक तिमाही के अंदर शुरू होने की उम्मीद है।
CPVC रेजिन प्रोजेक्ट में 75,000 टन सालाना की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी, जिससे कुल क्षमता 1.5 लाख टन सालाना हो जाएगी। यानी CPVC की क्षमता सीधे दोगुनी हो जाएगी। यह बढ़ी हुई क्षमता वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है।
ECH में भी कुछ ऐसी ही कहानी है। यहां 50,000 टन सालाना की क्षमता जुड़ेगी और कुल क्षमता 1 लाख टन सालाना हो जाएगी, यानी यह भी दोगुनी। यह प्रोजेक्ट भी इसी वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है।
कंपनी को इन दोनों प्रोडक्ट्स की मांग पर भरोसा है। एपिग्रल के मुताबिक भारत में CPVC की मांग करीब 12-13% की सालाना चक्रवृद्धि दर यानी CAGR से बढ़ने की उम्मीद है, जबकि ECH की मांग ऊंचे डबल डिजिट की दर से बढ़ने का अनुमान है।
दाहेज में दो नए प्रोजेक्ट को हरी झंडी
मौजूदा विस्तार के अलावा कंपनी ने आगे की तैयारी भी शुरू कर दी है। एपिग्रल के बोर्ड ने गुजरात के दाहेज स्थित मौजूदा कॉम्प्लेक्स में दो नए प्रोजेक्ट्स के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर को मंजूरी दी है। दोनों प्रोजेक्ट्स के वित्त वर्ष 2028 की दूसरी छमाही तक शुरू होने की उम्मीद है।
पहला प्रोजेक्ट 1.25 लाख टन सालाना क्षमता वाला एपॉक्सी रेजिन और फॉर्मूलेशंस प्लांट है। इसका मकसद घरेलू बाजार की बढ़ती मांग को पकड़ना है, जिसके डबल डिजिट की दर से बढ़ने की उम्मीद कंपनी को है। इसके प्रोडक्ट्स कंस्ट्रक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, मरीन, एयरोस्पेस और इंडस्ट्रियल फ्लोरिंग जैसे सेक्टर्स की जरूरत पूरी करेंगे।
दूसरा प्रोजेक्ट एक मल्टी-पर्पज प्लांट यानी MPP है, जो डाउनस्ट्रीम ECH और क्लोरोटोल्यूईन वैल्यू चेन के लिए होगा। यह प्लांट उन प्रोडक्ट्स पर फोकस करेगा जो आयात की जगह ले सकें। इसके ग्राहक एग्रोकेमिकल और फार्मास्युटिकल इंटरमीडिएट्स के साथ वॉटर ट्रीटमेंट केमिकल्स बनाने वाले होंगे।
स्पेशियलिटी केमिकल्स कारोबार का बढ़ता दबदबा
कंपनी की कमाई का ढांचा भी धीरे-धीरे बदल रहा है। एपिग्रल ने बताया कि इस अवधि में उसके डेरिवेटिव्स और स्पेशियलिटी केमिकल्स कारोबार का रेवेन्यू में 57% योगदान रहा। यानी कंपनी की हर 100 रुपये की कमाई में से 57 रुपये इसी कारोबार से आए।
कंपनी के मुताबिक जैसे-जैसे नए प्रोजेक्ट्स चालू होंगे, कुल कमाई में इस कारोबार का योगदान और बढ़ने की उम्मीद है। शेयर बाजार ने सोमवार को इसी तस्वीर पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी, जब साल भर से गिरते शेयर में एक दिन में 9% की तेजी आई।
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